न्यूयॉर्क: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि उनकी सरकार ने सभी को किफायती स्वास्थ्य देखभाल सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए ‘आयुष्मान भारत’ जैसे कुछ ”ऐतिहासिक कदम” उठाए हैं. ‘सार्वभौम स्वास्थ्य देखभाल’ पर आयोजित अब तक की सबसे पहली उच्चस्तरीय बैठक को यहां संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि विश्व का कल्याण, लोगों के कल्याण के साथ शुरू होता है और स्वास्थ्य इसका एक महत्वपूर्ण घटक है. इस वैश्विक सिद्धांत के अनुरूप भारत स्वास्थ्य पर बड़ा ध्यान दे रहा है. सभी को किफायती, समावेशी और सुगम स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए नए प्रयास शुरू करने के वास्ते शिखर सम्मेलन का आयोजन हुआ.

 

पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने स्वास्थ्य क्षेत्र की दिशा में कई तरह के कदम उठाए हैं और इसके चार प्रमुख स्तम्भों-एहतियाती स्वास्थ्य, किफायती स्वास्थ्य देखभाल, आपूर्ति पक्ष में हस्तक्षेप और हस्तक्षेप को मिशन आधार पर चलाने-पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है. उन्होंने रेखांकित किया कि उनकी सरकार का एहतियाती स्वास्थ्य देखभाल का एक महत्वपूर्ण अंग-योग, आयुर्वेद और हाल में शुरू किया गया ‘फिट इंडिया मूवमेंट (स्वस्थ भारत अभियान)’ है. मोदी ने कहा कि इनकी मदद से मधुमेह, रक्तचाप, अवसाद आदि जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों को नियंत्रित किया जा सकता है. प्रधानमंत्री ने शिखर सम्मेलन में यह भी कहा कि सरकार के स्वच्छ भारत अभियान ने भारत के लोगों में जागरूकता पैदा की है और हजारों जिन्दगियों को बचाने की संभावना बढ़ाई है. उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत के एहतियाती स्वास्थ्य देखरेख कार्यक्रम का एक और आयाम 1,25,000 से अधिक वेलनेस सेंटर खोलने का है तथा देश टीकाकरण पर विशेष जोर दिया जा रहा है. मोदी ने कहा कि इसके अलावा, नए टीके लाने के साथ ही, हम अपने टीकाकरण कार्यक्रम को दूर-दराज के क्षेत्रों तक पहुंचाने में सफल रहे हैं. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना ‘आयुष्मान भारत’ सहित ऐतिहासिक कदम उठाए हैं जो सफलतापूर्वक क्रियान्वित किए जा रहे हैं.

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प्रधानमंत्री ने कहा कि इस योजना के तहत 50 करोड़ गरीबों को हर साल पांच लाख रुपये तक के नि:शुल्क उपचार की सुविधा दी गई है. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने पांच हजार से अधिक जन औषधि केंद्र भी खोले हैं जहां 800 से अधिक प्रकार की दवाएं उचित मूल्य पर उपलब्ध हैं. मोदी ने कहा कि स्टेंट्स की कीमत में 80 प्रतिशत तक की कमी और घुटना प्रतिरोपण की कीमत में 50 से 70 प्रतिशत तक की कमी सहित किफायती स्वास्थ्य देखभाल सुनिश्चित करने के सरकार के प्रयासों से हजारों लोग लाभान्वित हो रहे हैं और हजारों लोगों को सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गईं नि:शुल्क डायलेसिस सुविधाओं का लाभ मिल रहा है. उन्होंने कहा कि भारत का ध्यान गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए आधुनिक संस्थानों की स्थापना पर रहा है. मोदी ने कहा कि महिलाओं और बच्चों की स्वास्थ्य देखभाल के क्रम में राष्ट्रीय पोषण अभियान और अन्य नए कार्यक्रम मिशन आधार पर शुरू किए गए हैं.

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प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘भारत में मेडिकल कॉलेजों में सीटों की संख्या में ऐतिहासिक वृद्धि की गई है. उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने जहां सतत विकास लक्ष्यों के लिए 2030 तक की समयसीमा तय की है, वहीं भारत ने क्षय रोग के खात्मे के वास्ते अपने लिए 2025 तक की समयसीमा निर्धारित की है. मोदी ने कहा कि आज समग्र स्वास्थ्य देखभाल के संबंध में एक नयी जागरूकता आई है. स्वस्थ शरीर रखने के लिए स्वस्थ वातावरण का होना भी आवश्यक है. इस समझ के साथ हमारी सरकार ने वायु प्रदूषण और जानवरों के माध्यम से फैलने वाली बीमारियों के खिलाफ एक अभियान शुरू किया है. उन्होंने कहा कि सिर्फ रोगमुक्त जीवन तक पहुंच ही नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन भी सभी लोगों का अधिकार है, और इसके लिए आवश्यक सेवाएं तैयार करने तथा उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी सरकार तथा सामाजिक संस्थानों की है. इस दायित्व के तहत, आयुर्वेद, योग और टेली मेडिसिन के रास्ते भारत अनेक देशों, खासकर अफ्रीकी देशों की किफायती स्वास्थ्य देखभाल तक पहुंच बढ़ा रहा है. मोदी ने अपने संबोधन का समापन संस्कृत के श्लोक ‘सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे संतु निरामया:’ से किया जिसका अथ है ‘सभी सुखी हों, सभी रोगमुक्त रहें. (इनपुट एजेंसी)