इस्लामाबाद। शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के तहत यहां होने वाले आतंकवाद निरोधक सम्मेलन में शामिल होने वालों में भारतीय प्रतिनिधिमंडल भी शामिल होगा. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने यह जानकारी दी. भारत के साथ 2017 में एसएसीओ का सदस्य बनने के बाद पाकिस्तान पहली एससीओ बैठक की मेजबानी करेगा. Also Read - पूर्वी लद्दाख में और बढ़ेगा तनाव! भारत, चीन ने अपने अड्डों पर भारी उपकरण और हथियार प्रणाली पहुंचाए

तीन दिन चलेगी बैठक Also Read - अमेरिकी सांसद का दावा, चीन को हराना है तो भारत को 'शक्तिशाली' बनाना होगा

एक बयान में कहा गया कि एससीओ के आठ सदस्य राष्ट्रों – चीन, कजाख्स्तान , भारत , किर्गिस्तान , रूस , तजाकिस्तान , उज्बेकिस्तान और पाकिस्तान के विशेषज्ञों के साथ ही एससीओ – क्षेत्रीय आतंकवाद निरोधक ढांचे (एससीओ – आरएटीएस) के प्रतिनिधि भी कल से शुरू हो रही इस तीन दिवसीय बैठक में हिस्सा लेंगे. Also Read - वैज्ञानिकों ने किया खुलासा, बताया आखिर किस तरह से जानवर से मनुष्य में पहुंचता है कोरोना वायरस

विधि विशेषज्ञ क्षेत्र में मौजूद आतंकवाद के खतरे और आतंकवाद निरोधक प्रयासों के तौर तरीकों और इन्हें बढ़ाने पर चर्चा करेंगे. इसमें कहा गया कि पाकिस्तान सरकार एससीओ के सदस्य देशों के प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करने को लेकर बेहद खुश है.

इस बैठक में भारत की मौजूदगी विशेष महत्व रखती है क्योंकि उसने 2016 में यहां होने वाले दक्षेस शिखर सम्मेलन का बहिष्कार किया था. तब इसके पीछे वजह पाकिस्तान द्वारा लगातार आतंकवाद को समर्थन देना जारी रखने को बताया गया था.

भारत-पाक बातचीत अटकी 

बता दें कि आतंकवाद के मुद्दे पर ही भारत ने पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय बैठक से दूरी बनाकर रखी है. पाकिस्तान की ओर से लगातार आतंकियों को समर्थन दिए जाने और कश्मीर में उसकी खुली दखलअंदाजी से भारत नाराज है. पाकिस्तान कई बार भारत से बातचीत की पेशकश कर चुका है, लेकिन भारत ने आतंकवाद के मुद्दे पर अभी तक बातचीत को हरी झंडी नहीं दिखाई है. 2016 के सार्क सम्मेलन का भी भारत ने आतंकवाद के मुद्दे पर ही बहिष्कार किया था. मुंबई हमले को लेकर भारत कई बार पाकिस्तान को सबूत भी दे चुका है, लेकिन इसे लेकर पाकिस्तान ने हमेशा सुस्ती दिखाई है. दिखावे के लिए लखीउर रहमान और सईद हाफिज जैसे आतंकियों को हिरासत में तो लिया, लेकिन सबूतों के अभावों में कोर्ट ने इन्हें रिहा कर दिया.