पाकिस्तान मुस्लिम नाटो बनाता रह गया, भारत ने UAE-इजरायल के साथ मिलकर पलट दिया गेम, समझिए कैसे एशिया में बढ़ने वाला है India का दबदबा

India-UAE and Israel: भारत-इजरायल और संयुक्त अरब अमीरात मिलकर ऊर्जा, व्यापार और निवेश, तकनीक और रक्षा के क्षेत्र में मिलकर काम कर सकते हैं.

Written by: Shivendra Rai
Published: May 16, 2026, 1:04 PM IST

India-Israel-UAE Alliance: पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते हालात के बीच भारत ने एक ऐसा मास्टरस्ट्रोक खेला है जिससे मुस्लिम नाटो बनाने का सपना देख रहा पाकिस्तान ही नहीं बल्कि चीन भी दंग है. प्रभावशाली अरब देशों में से एक संयुक्त अरब अमीरात अब भारत का एक करीबी सहयोगी बनने जा रहा है. UAE के रिश्ते इजरायल के साथ भी मजबूत हो रहे हैं. भारत और इजरायल पहले से ही रणनीतिक साझीदार हैं. ऐसे में एक ऐसा रणनीतिक गठबंधन बनता दिख रहा है जो पूरे क्षेत्र पर अपना दबदबा कायम कर सकता है.

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पीएम मोदी की UAE यात्रा से क्या हासिल हुआ

15 मई को संयुक्त अरब अमीरात दौरे पर पहुंचे पीएम मोदी और यूएई के प्रेसिडेंट शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बीच कई अहम मुद्दों पर बात हुई. प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी यात्रा को छोटी लेकिन बहुत ही सकारात्मक बताया. भारत के विदेश मंत्रालय ने भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा से कई अहम नतीजे सामने आए हैं और भारत-यूएई की कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप और मजबूत हुई है. पीएम मोदी ने यूएई के साथ ऊर्जा, व्यापार और निवेश, ब्लू इकोनॉमी, तकनीक (जिसमें फिनटेक शामिल है), रक्षा और लोगों के बीच आपसी संपर्क बढ़ाने जैसे मुद्दों पर बात की.

भारत- UAE-इजरायल की जोड़ी कैसे ताकतर हो गई है?

संयुक्त अरब अमीरात पिछले कुछ सालों में इजरायल के करीब आया है और अब इन दोनों देशों के संबंध बेहद अच्छे हैं. भारत के संबंध दोनों ही देशों से अच्छे हैं. ऐसे में तीनों देश कई क्षेत्रों में मिलकर काम कर सकते हैं. इजरायल की तकनीक, भारत की इंजीनियरिंग और उत्पादन क्षमता और संयुक्त अरब अमीरात की फंडिंग से डिफेंस सेक्टर में बूम आ सकता है.

रक्षा विशेषज्ञ सुशांत सरीन के अनुसार, मिस्त्र और अफ्रीका के कई देशों में संयुक्त अरब अमीरात का अच्छा प्रभाव है. इसका फायदा भारत को भी मिल सकता है. यही नहीं, भारत की ब्रह्मोस मिसाइल, आकाश और बराक जैसे एयर डिफेंस सिस्टम के लिए यूएई अपना खजाना खोल सकता है. भारत-इजरायल और यूएई मिलकर आने वाले समय में कई हथियारों का संयुक्त विकास भी कर सकते हैं.

ईरान और स्ट्रेट ऑफ होर्मूज पर निर्भरता कम

ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से ही स्ट्रेट ऑफ होर्मूज एक संवेदनशील समुद्री मार्ग हो गया है. इसके बंद होने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा रहा है. लेकिन, संयुक्त अरब अमीरात के साथ मिलकर भारत कुछ ऐसा कर सकता है जो चीन-पाकिस्तान जैसे देश सोच भी नहीं सकते. संयुक्त अरब अमीरात के फ़ुजैराह पोर्ट से भारत तक एक पाइपलाइन बिछाने पर भी विचार हो रहा है. हालांकि इसमें अभी समय लगेगा.

यूएई अब अपने पूरे तेल उत्पादन को ओमान की खाड़ी में स्थित फ़ुजैराह बंदरगाह से बाहर भेजने की योजना पर काम कर रहा है. ऐसा हुआ तो स्ट्रेट ऑफ होर्मूज के खुले या बंद होने से कोई फर्क ही नहीं पड़ेगा. संयुक्त अरब अमीरात के पूर्वी समुद्र तट पर स्थिक इस बंदरगाह को पाइपलाइनों के माध्यम से यूएई के सभी तेल और गैस उत्पादन केंद्रो से जोड़ा जा रहा है. इस परियोजना का सबसे बड़ा फायदा भारत को ही होने वाला है.

अंतरिक्ष में बढ़ेगी ताकत

भारत-इजरायल और संयुक्त अरब अमीरात की तिकड़ी सिर्फ जमीन और समंदर तक ही सीमित नहीं रहेगी. तीनों देश मिलकर स्पेस कार्यक्रम भी लॉन्च कर सकते हैं. इन तीनों देशों का स्पेस प्रोग्राम पहले से ही काफी उन्नत है. अब अगर ये साथ आते हैं तो क्षेत्र में चीन-पाकिस्तान-सऊदी अरब की जोड़ी को पीछे छोड़ा जा सकता है.

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