नई दिल्‍ली/काठमांडू: नेपाल की की राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी ने बृहस्पतिवार को इंडियन आर्मी के चीफ जनरल एम एम नरवणे को नेपाली सेना के जनरल रैंक की मानद उपाधि प्रदान की है.  यह पिछले कई सालों से परंपरा जारी है. जनरल एम एम नरवणे शुक्रवार को प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली से मिलेंगे. इंडियन आर्मी के चीफ नेपाल की तीन दिन की यात्रा पर वहांं पहुंचे हैैं. Also Read - Gold Silver Price Today in India: और महंगा होगा सोना-चांदी! शादी का सीजन शुरू होने से बढ़ेगी मांग

भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे ने अपने नेपाली समकक्ष जनरल पूर्ण चंद्र थापा से मुलाकात की और दोनों सेनाओं के बीच सहयोग और मित्रता के मौजूदा संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने के उपायों पर चर्चा की. Also Read - Ceasefire Violations पर विदेश मंत्रालय ने पाकिस्‍तानी हाई कमीशन को तलब कर जताया कड़ा विरोध

समारोह में प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली, भारतीय राजदूत विनय एम क्वात्रा और दोनों देशों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए. यह दशकों पुरानी परंपरा है जो दोनों सेनाओं के बीच के मजबूत संबंधों को परिलक्षित करती है. उन्हें काठमांडू में राष्ट्रपति के आधिकारिक निवास ‘शीतलनिवास’ में आयोजित कार्यक्रम में सम्मानित किया गया और इस दौरान उन्हें एक तलवार भी भेंट की गई.

इस परंपरा की शुरूआत 1950 में हुई थी. जनरल केएम करियप्पा पहले भारतीय थलसेना प्रमुख थे, जिन्हें 1950 में इस उपाधि से सम्मानित किया गया था. पिछले साल जनवरी में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने नई दिल्ली में नेपाली थल सेना के प्रमुख जनरल पूर्ण चंद्र थापा को भारतीय सेना के मानद जनरल की उपाधि दी थी.

भारतीय दूतावास द्वारा यहां जारी एक बयान के अनुसार समारोह के बाद जनरल नरवणे ने राष्ट्रपति भंडारी से मुलाकात की और सम्मान के लिए उनका आभार व्यक्त किया. उन्होंने द्विपक्षीय सहयोग में वृद्धि के उपायों पर भी चर्चा की. उनके साथ भारतीय राजदूत क्वात्रा भी थे.

जनरल थापा के निमंत्रण पर जनरल एम एम नरवणे तीन दिवसीय यात्रा पर अभी काठमांडू में हैं. उनकी यात्रा काफी हद तक दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करने के मकसद से है. दोनों देशों के संबंध सीमा विवाद को लेकर तनावपूर्ण हो गए हैं. उन्होंने थापा से यहां उनके कार्यालय में मुलाकात की.

नेपाल थलसेना मुख्यालय द्वारा एक बयान के अनुसार, “उन्होंने द्विपक्षीय हितों के मुद्दों के अलावा दोनों सेनाओं के बीच मित्रता और सहयोग के मौजूदा बंधन को और मजबूत बनाने के उपायों पर चर्चा की.”

बयान में कहा गया है कि उन्हें नेपाली सेना के इतिहास और वर्तमान भूमिकाओं के बारे में भी अवगत कराया गया. बुधवार को काठमांडू पहुंचे नरवणे बृहस्पतिवार को सेना मुख्यालय में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल हुए. सुबह ‘आर्मी पैविलियन’ में शहीदों को श्रद्धांजलि देने के बाद उन्हें सेना मुख्यालय में ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया. उन्होंने पहले के वरिष्ठ सैन्य आगंतुकों की परंपरा के अनुसार सेना मुख्यालय में एक पेड़ भी लगाया.

जनरल नरवणे नेपाली सेना के दो ‘फील्ड’ अस्पतालों के लिए वेंटिलेटर, एम्बुलेंस और चिकित्सा उपकरण भी सौंपे. थापा ने
नेपाल में बने 1,00,000 मेडिकल मास्क और शांति के प्रतीक के रूप में भगवान बुद्ध की एक मूर्ति नरवणे को भेंट की.

बता दें कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आठ मई को उत्तराखंड में धारचूला को लिपुलेख दर्रे से जोड़ने वाली 80 किलोमीटर लंबी अहम सड़क का उद्घाटन किया था. उसके बाद दोनों देशों के संबंधों में तनाव में आ गया.

नेपाल ने सड़क के उद्घाटन का विरोध करते हुए दावा किया कि यह उसके भूक्षेत्र से होकर गुजरता है. इसके बाद नेपाल ने लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा को अपने हिस्से के रूप में दिखाया था. नेपाल द्वारा नक्शा जारी किए जाने के बाद भारत ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा था कि यह “एकतरफा कृत्य” है. भारत ने नेपाल को आगाह करते हुए कहा था कि क्षेत्रीय दावों की “कृत्रिम वृद्धि” उसे स्वीकार्य नहीं होगी.