जकार्ता: इंडोनेशिया में ज्वालामुखी फटने के बाद आई विनाशकारी सुनामी में मारे गए लोगों की संख्या मंगलवार को बढ़कर 429 पहुंच गई. वहीं, सुनामी में जीवित बचे लोगों की तलाश व शवों की बरामदगी में भारी बारिश बचाव दलों के लिए मुश्किल पैदा कर रही है. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन बोर्ड (बीएनपीबी) के प्रवक्ता सुतोपो पुरवो नुगरोहो ने एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि मृतकों का आंकड़ा बढ़ सकता है क्योंकि राहत व बचाव टीमें पानी में अभी भी शवों की तलाश कर रही हैं. Also Read - Earthquake Tsunami Alert: प्रशांत महासागर में आया 7.7 तीव्रता का भूकंप, सुनामी की चेतावनी जारी

Also Read - World's Oldest Painting: दुनिया की सबसे पुरानी पेंटिंग, 45 हजार साल पहले की है...

इंडोनेशिया त्रासदी: ग्रामीणों की जुबानी सुनामी की भयावह तस्वीरों की कहानी Also Read - Indonesia Plane Crash: दुर्घटना स्थल पर जांचकर्ताओं को मिले बॉडी पार्ट्स, विमान में 62 लोग थे सवार

जकार्ता पोस्ट’ की रिपोर्ट के अनुसार, नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक 1,485 लोग घायल हुए हैं, 154 लापता हैं जबकि 16,082 बेघर हुए हैं. सुंडा स्ट्रेट पर एनाक क्राकाटोओ ज्वालामुखी में विस्फोट के बाद आई सुनामी ने इंडोनेशिया के जावा और सुमात्रा द्वीप में शनिवार देर रात तबाही मचाई. इसकी पहले से कोई चेतावनी जारी नहीं हुई थी. सुतोपो ने कहा कि सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र जावा के पश्चिमोत्तर का पांडेगलांग है जहां 290 लोगों की मौत हुई है. कुत्तों और भारी मशीनरी की मदद के साथ बचावकर्मी मलबे के हर ढेर को खंगाल रहे हैं जो त्रासदी से पहले स्थानीय निवासियों के घर और दुकानें थीं. रिपोर्ट में कहा गया है कि पांडेगलांग में आपातकालीन प्रतिक्रिया चार जनवरी तक जबकि लैम्पुंग इलाके में यह सात दिनों तक जारी रहेगी. सुनामी की त्रासदी के चलते क्रिसमस की खुशियां मातम में बदल गईं, क्रिसमस के समय बजने वाली जिंगल्स की जगह सुनामी से प्रभावित लोगों के लिए होने वाली प्रार्थनाओं ने ले ली.

सोशल मीडिया पर साझा एक वीडियो में दिखाया जा रहा है कि राहतकर्मियों का एक समूह 12 घंटों तक फंसे रहे एक पांच साल के एक बच्चे को जीवित बचाने में कामयाब रहा. आपदा प्रबंधन की राष्ट्रीय एजेंसी ने बताया कि इंडोनेशिया में ज्वालामुखी की गतिविधियों के कारण आने वाली सुनामी की चेतावनी प्रणाली नहीं है और भूकंप के बाद समुद्र की लहरों में अचानक वृद्धि का पता लगाने में विफल रहने के लिए प्रबंधन, रख-रखाव और धन की कमी जिम्मेदार है.