World News: इंडोनेशिया की एक अदालत ने एक विवादास्पद मौलवी को कोविड-19 महामारी से निपटने के सरकार के प्रयासों का समर्थन नहीं करने और उसकी पॉजिटिव स्थिति पर झूठ बोलने के आरोप में चार साल जेल की सजा सुनाई है. पूर्वी जकार्ता जिला अदालत के एक न्यायाधीश खदवंतो ने कहा कि मौलवी मुहम्मद रिजीक शिहाब, हार्ड-लाइन समूह इस्लामिक डिफेंडर्स फ्रंट के नेता हैं, जिन्हें 2020 में इंडोनेशियाई सरकार द्वारा प्रतिबंधित कर दिया गया था.Also Read - भगोड़े कारोबारी विजय माल्या को झटका, ब्रिटिश हाईकोर्ट ने घोषित किया दिवालिया...

बीते गुरूवार को उनके खिलाफ फर्जी अधिसूचना का अपराध साबित हुआ था. यह फैसला अभियोजक की छह साल की जेल की मांग से कम है. मामला तब शुरू हुआ जब पश्चिम जावा प्रांत के बोगोर के उम्मी अस्पताल में इलाज करा रहे शिहाब ने टेस्ट से इनकार कर दिया था. एक टेलीविजन स्टेशन पर भेजे गए एक वीडियो में शिहाब ने कहा कि वह अच्छी और स्वस्थ स्थिति में है, हालांकि एंटीजन टेस्ट से पता चला कि वह कोविड पॉजिटिव थे. Also Read - Dubai Airport: दुबई में एयरपोर्ट पर टकराए दो विमान, कोई हताहत नहीं

न्यायाधीश ने कहा कि फर्जी अधिसूचना का बड़ा प्रभाव हो सकता है क्योंकि वह कई अनुयायियों के साथ एक धार्मिक व्यक्ति हैं. अदालत ने उम्मी अस्पताल के निदेशक एंडी टाट और शिहाब के दामाद हनीफ अलतास को भी अपने झूठ को छिपाने के लिए एक-एक साल जेल की सजा सुनाई है. (IANS Hindi) Also Read - Google News: गूगल भारत में अपना दूसरा क्लाउड क्षेत्र लॉन्च करने के लिए तैयार