बीजिंग: 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस है. 6 साल पहले भारत की योग संस्कृति के महत्व को देश ने ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया ने समझा. लेकिन आज 6 साल बाद कोरोना वायरस महामारी के इस दौर में योग को शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का सबसे कारगर तरीका माना जा रहा है. इस साल अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को कोरोना प्रकोप नियंत्रण उपाय के तौर पर देखा जा रहा है. 6 साल पहले जो योग को लेकर एक सकारात्मक पहल की गई, उससे योग का धर्मनिरपेक्ष व पंथ निरपेक्ष स्वरूप देश-दुनिया के सामने आया. जैसे-जैसे दुनिया में तनाव बढ़ता जा रहा है, लोगों के अंदर काम करने का दबाव बढ़ता जा रहा है. उससे निजात पाने के लिए योग का सहारा लिया जा रहा है. योग को प्राचीन भारतीय कला का एक प्रतीक माना जाता है. भारतीय योग को जीवन में सकारात्मकता और ऊजार्वान बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं. इस दिन को मनाने का उद्देश्य योग के प्रति लोगों में जागरुकता पैदा करने के साथ लोगों को तनावमुक्त करना भी है. Also Read - कांग्रेस का सवाल- भारतीय सेना LAC पर हमारी ही सरजमी से क्यों हट रही है पीछे, क्या पीएम मोदी के शब्दों के मायने नहीं?

जाहिर है, हर साल योग दिवस की एक थीम होती है. 2015 की थीम थी सद्भाव और शांति के लिए योग, 2016 की थीम थी युवाओं को आपस में जोड़े, 2017 की थीम बनी स्वास्थ्य के लिए योग, 2018 की थीम थी शांति के लिए योग, 2019 की थीम थी हृदय के लिए योग, लेकिन इस साल कोरोनावायरस महामारी यानी कोविड-19 के चलते लोगों को ऐसी थीम दी गई है, जो सेहत और स्वस्थ्य को बढ़ावा देगी. अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2020 थीम है घर में रहते हुए अपने परिवार के साथ योग करें. Also Read - उत्तराखंड के मंत्री ने चीनी राष्ट्रपति को रामायण भेजी, कहा- रावण भी ऐसी ही सोच का था, पढ़कर सबक लें

लेकिन आज भारत के बाद जो सबसे बड़े योग उत्साही हैं और अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के कार्यक्रम में सबसे ज्यादा हिस्सा लेते हैं, वे हैं चीनी लोग. जी हां, चीन में भी मानसिक और आध्यात्मिक रूप में स्वस्थ जीवन जीने की प्राचीन कला ‘योग’ की लोकप्रियता और उसका जुनून बढ़ रहा है. अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने के लिए चीन में हजारों लोग अलग-अलग शहरों में इकट्ठा होते हैं और योग अभ्यास करते हैं. चीन के बीजिंग, शंघाई, थियनचिन, छिंगताओ, हांगकांग, मकाओ, क्वांगचो, छंगतु, खुनमिंग, शियामन, वूशी, हांग्जो, वानजोउ समेत 17 शहरों में योग उत्सव मनाया जाता है. भारतीय दूतावास की ओर से आयोजित योग कार्यक्रमों में सैकड़ों लोग शामिल होते हैं. Also Read - Bubonic Plague: चीन में बढ़ा ब्यूबोनिक प्लेग का खतरा, क्या भारत को डरने की जरूरत है?

दरअसल, चीन में योग का प्रचलन बहुत तेजी से बढ़ रहा है. चीन में योग ने इतनी तेजी से पैर पसारे हैं कि अब बीजिंग, शंघाई जैसे बड़े चीनी शहरों में योग के कई सारे सेंटर भी खुल चुके हैं. न केवल चीन के महानगरों में बल्कि चीन के किसी छोटे शहर, या किसी औद्योगिक कस्बे में योग सीखने के तमाम सेंटर खुले दिखाई दे जाएंगे. चीन के लगभग 57 शहरों और 17 प्रांतों में अलग-अलग योग संस्थानों के द्वारा योग सिखाया जा रहा है. योग को मानने और समझने वाले चीनी लोगों की तादाद में बढ़ोत्तरी होती जा रही है.

आज के समय में, योग चीनी लोगों के लिए एक फैशन बन गया है. यह एक आधुनिक ट्रेंड के तौर पर उभरकर आया है. यह लोगों की दिनचर्या का एक भाग बन चुका है. बहुत से चीनी लोग योग सीखने के लिए भारत जाने की चाह रखते हैं. योग चीन में एक नए व्यवसाय के रूप में विकसित हो रहा है. चीनी लोगों में योग के झुकाव को देखते हुए, चीन के अनेक शहरों में बहुत से योग सेंटर खुल चुके हैं, यहां तक कि चीन के कई विश्वविद्यालयों में योग ट्रेनिंग प्रतिष्ठान भी खुल रहे हैं.