ईरान के पास ऐसा क्या है, जिसे छीनने के लिए तड़प रहे ट्रंप? आखिर कैसे शुरू हुई अमेरिका से दुश्मनी

ईरान को कंट्रोल करने के लिए 1979 के बाद से अमेरिका ने कई कवायद की, लेकिन उसे सफलता नहीं मिल पाई. यही वजह है कि इस बार के विरोध प्रदर्शन को लेकर अमेरिका ज्यादा सतर्क है. डोनाल्ड ट्रंप की दिलचस्पी ईरान के ऑयल रिजर्व में है.

Published date india.com Published: January 9, 2026 11:38 PM IST
ईरान के पास ऐसा क्या है, जिसे छीनने के लिए तड़प रहे ट्रंप? आखिर कैसे शुरू हुई अमेरिका से दुश्मनी
ट्रंप ने खामनेई को ईरान पर हमला करने की धमकी दी है.

मिडिल ईस्ट देश ईरान में महंगाई के खिलाफ 13 दिनों से चल रहे प्रदर्शन के बीच तख्तापलट की कोशिश भी जारी है. ईरान में खामनेई के तख्तापलट की कोशिश में अमेरिका का बड़ा हाथ माना जा रहा है.अमेरिकी न्यूज चैनल CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, महंगाई को लेकर ईरान में 100 से ज्यादा शहरों में प्रदर्शन फैल चुका है. अमेरिकी ह्यूमन राइट एजेंसी के मुताबिक, प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा में अब तक 45 लोग मारे गए हैं, जिनमें 8 बच्चे शामिल हैं.इन प्रदर्शनों को देखते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सुप्रीम लीडर खामनेई को चेतावनी दी है.

ट्रंप ने धमकी दी कि अगर ईरानी सुरक्षा बल प्रदर्शनकारियों की हत्या करते हैं, तो अमेरिका ईरान पर हमला कर सकता है. खामनेई ने भी राष्ट्र को संबोधित करते हुए ट्रंप को जवाब दे दिया है. तमाम घटनाक्रम के बीच बड़ा सवाल ये है कि आखिर ईरान-अमेरिका में दुश्मनी क्यों शुरू हुई? ईरान में ऐसा क्या है, जिसके लिए ट्रंप बार-बार हमले की धमकी दे रहे हैं? क्या वेनेजुएला की तरह ईरान पर भी अमेरिका एयर स्ट्राइक कर सकता है:-

पहले ईरान के ताजा हालात जान लीजिए
ईरान आज आर्थिक संकट, भारी महंगाई, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों, बेरोजगारी, मुद्रा गिरावट और लगातार जन आंदोलनों जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है. 28 दिसंबर 2025 से ईरान की राजधानी तेहरान में महंगाई को लेकर विरोध प्रदर्शन की शुरुआत हुई. ग्रैंड बाजार में व्यापारियों ने हड़ताल के साथ विरोध प्रदर्शन का आगाज किया. ये प्रदर्शन देखते-देखते बाकी शहरों में फैलने लगा. 47 साल बाद अब मौजूदा आर्थिक बदहाली और सख्त धार्मिक शासन से नाराज लोग अब बदलाव चाहते हैं. तेहरान में इंटरनेट बंद है. इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी बंद कर दिया गया है. सेना को अलर्ट पर रखा गया है.

अमेरिका और ईरान की दुश्मनी
20वीं सदी के ज्यादातर समय में अमेरिका और ईरान दोस्त रहे हैं. 1950 के दशक में जब शीत युद्ध ने जोर पकड़ा, तो अमेरिका ने ईरान पर बहुत भरोसा किया था. उस समय अमेरिका की मदद से वहां के शाह ने ना सिर्फ ईरान में अपना शासन मजबूत किया, बल्कि तेल से धनी मध्यपूर्व के इलाके में सोवियत संघ के प्रभाव को सीमित करने में भी अमेरिका के साथी बने. हालांकि, एक समय के बाद शाह का कठोर शासन और देश में अमेरिकी दखल ईरान में अलोकप्रिय होने लगा.

CIA ने मोसादेघ को सत्ता से हटाया
साल 1953 में अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के एजेंटों ने ईरान के प्रधानमंत्री मोहम्मद मोसादेघ की चुनी हुई सरकार का तख्तापलट करवा दिया. इसके बाद ईरान में शाह वंश का शासन स्थापित हुआ. ये शाह वंश अमेरिका के इशारों पर ही काम कर रहा था. ईरान पर शाह वंश के जरिए अमेरिका का 26 साल तक कंट्रोल रहा. फिर 1978 के आसपास अली खुमैनी के नेतृत्व में ईरान में इस्लामिक क्रांति की शुरुआत हुई. इस क्रांति में शाह वंश का पतन हो गया. इसके बाद ईरान में इस्लामिक गणराज्य की वापसी हुई.खुमैनी के बाद अयातुल्लाह अली खामेनेई को ईरान की सत्ता मिली.

अमेरिका 1979 से ईरान पर कंट्रोल की कर रहा कोशिश
1978 के बाद से अमेरिका की दुश्मनी ईरान के साथ ज्यादा बढ़ गई. ईरान को कंट्रोल करने के लिए 1979 के बाद से अमेरिका ने कई कवायद की, लेकिन उसे सफलता नहीं मिल पाई.आखिर बार जून 2025 में जब अमेरिका ने ईरान पर हमला किया था, तो उस वक्त ईरान ने होर्मुज के नीचे बारूद बिछवा दिया. इसकी वजह से आनन-फानन में अमेरिका को सीजफायर करना पड़ा.अब ट्रंप नए सिरे से ईरान पर कंट्रोल हासिल करने की प्लानिंग में हैं.

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आखिर ईरान से अमेरिका को क्या चाहिए?
ईरान की इकोनॉमी मुख्य रूप से ऑयल और नैचुरल गैस पर निर्भर है. ईरान के पास 208209 अरब बैरल तेल अभी है. ये दुनिया के कुल प्रमाणित तेल भंडार का 12% हिस्सा है. ईरान को सऊदी अरब और इजराइल का विरोधी माना जाता है. ये दोनों ही देश अमेरिका के करीबी हैं. अमेरिका की नजर ईरान के ऑयल और गैस रिजर्व पर है. अगर अमेरिका, ईरान पर कंट्रोल कर लेता है, तो दुनिया के व्यापार का 20% उसके कब्जे में आ जाएगा. अमेरिका की खास दिलचस्पी होर्मुज स्ट्रेट और फारस की खाड़ी पर है.

होर्मुज स्ट्रेट और फारस की खाड़ी इतना अहम क्यों?
दरअसल, होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण चोकपॉइंट है.दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का 25% और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) व्यापार का 20% सालाना होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है.यह रोजाना होने वाले ग्लोबल प्रोडक्शन का पांचवां हिस्सा है. अभी ईरान के पास इसका कंट्रोल है. ईरान अगर नहीं चाहेगा तो यहां से कोई भी जहाज नहीं गुजर सकता है. होर्मुज स्ट्रेट ही फारस की खाड़ी से खुले समुद्र तक पहुंचने का एकमात्र जरिया भी है. यही वजह है कि अमेरिका ईरान को कंट्रोल करके होर्मुज स्ट्रेट और फारस की खाड़ी पर अपनी पहुंच बनाना चाहता है.

ईरान का न्यूक्लियर प्रोजेक्ट
दूसरी ओर, ईरान के न्यूक्लियर प्रोजेक्ट की वजह से भी अमेरिका के साथ दुश्मनी बढ़ी है. अमेरिका और पश्चिमी देशों को यह डर है कि ईरान न्यूक्लियर हथियार बना कर मिडिल ईस्ट पर दबदबा बढ़ा सकता है. इसे रोकने के लिए अमेरिका ने ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए हैं.

इजराइल भी दुश्मनी की वजह
ईरान के साथ अमेरिकी दुश्मनी की एक वजह इजराइल भी है. यहूदियों का अमेरिका पर बहुत ज्यादा प्रभाव है. अमेरिका, हमेशा से ही इजराइल का समर्थन करता रहा है. ईरान और इजराइल कट्टर दुश्मन हैं. यही वजह है कि ईरान भी फिलीस्तीन में इजराइल के दुश्मन हमास और हिजबुल्लाह के लड़ाकों को मदद करता रहता है.

क्या खामनेई के साथ मादुरो जैसा बर्ताव कर सकता है अमेरिका?
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला में एयर स्ट्राइक के बाद वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के साथ जैसा बर्ताव किया, वैसा खामनेई के साथ करना मुमकिन नहीं लगता. ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसी आम फौज के पास नहीं है. यह जिम्मा Sepah-e Vali-ye Amr यानी वली-ए-अम्र फोर्स का है. ये ईरान की कुख्यात इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की सबसे खास और रहस्यमयी यूनिट है. वली-ए-अम्र का मतलब है आदेश देने वाले की सेना. ईरान में इसका मतलब साफ है सुप्रीम लीडर की जान की हिफाज़त. इस यूनिट में करीब 12,000 चुनिंदा, अत्याधुनिक ट्रेनिंग पाए जवान शामिल हैं.

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