क्या ईरान पर अटैक करने वाला है अमेरिका? 5 काम जो इस बात का देते हैं संकेत

ईरान को सऊदी अरब और इजराइल का विरोधी माना जाता है. ये दोनों ही देश अमेरिका के करीबी हैं. अमेरिका की नजर ईरान के ऑयल और गैस रिजर्व पर है. मौजूदा तनाव के पीछे इसे बड़ी वजह माना जा रहा है.

Published date india.com Published: January 16, 2026 11:46 PM IST
क्या ईरान पर अटैक करने वाला है अमेरिका? 5 काम जो इस बात का देते हैं संकेत
US नेवी का USS अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के साथ साउथ चाइना सी से मिडिल ईस्ट की ओर रवाना हो गया है.

मिडिल ईस्ट देश ईरान में महंगाई के खिलाफ लंबे समय से चल रहे प्रदर्शन के बीच अमेरिकी हमले का खतरा मंडरा रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामनेई को चेतावनी दी है कि अगर प्रदर्शनकारियों की हत्या हुई, तो अमेरिका सीधे ईरान पर हमला कर देगा. बीते कुछ रोज से ईरान में प्रदर्शकारियों की हत्याएं रुकी हैं. पहले ईरान ने सत्ता के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले करीब 800 लोगों को सरेआम फांसी देने का फैसला लिया था. बाद में इस फैसले को रोक दिया गया.

कई रिपोर्ट में ऐसा दावा किया गया है कि इंटरनेशनल प्रेशर में आकर ईरान ने फांसी रोकी है. ऐसे में अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने भी कहा कि फिलहाल ईरान पर अटैक नहीं किया जाएगा. इस बीच अमेरिका, ईरान और इजरायल में ऐसे 5 काम हुए हैं; जो साफ संकेत देते हैं कि अमेरिका कभी भी ईरान पर हमला कर सकता है.

कौन से 5 संकेत?
पहला संकेत: US नेवी का USS अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के साथ साउथ चाइना सी से मिडिल ईस्ट की ओर रवाना हो गया है.अमेरिकी न्यूज वेबसाइट न्यूज नेशन की रिपोर्ट के मुताबिक, ये फैसला ईरानी एयरस्पेस के बंद होने के ठीक एक घंटे बाद लिया गया है.USS अब्राहम लिंकन अमेरिकी नौसेना का एक न्यूक्लियर-पावर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर है. यह दुनिया के सबसे बड़े और सबसे ताकतवर वॉरशिप में से एक माना जाता है.इसे मिडिल ईस्ट पहुंचने में करीब एक हफ्ता लग सकता है.

दूसरा संकेत: अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपने कुछ आर्मी बेस से स्टाफ को निकालना शुरू कर दिया है. रॉयटर्स के मुताबिक, कतर में स्थित अल उदैद एयर बेस से कुछ कर्मचारियों को बुधवार शाम तक निकालने को कहा गया है. ये मिडिल ईस्ट का सबसे बड़ा अमेरिकी बेस है. यहां करीब 10,000 सैनिक तैनात हैं.वहीं, मिडिल ईस्ट और पर्शियन गल्फ में लगभग 30,000 से 40,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं.

तीसरा संकेत: ईरान ने विरोध प्रदर्शन के बीच अपने एयरस्पेस को ज्यादातर उड़ानों के लिए अस्थायी रूप से बंद कर दिया है. नोटिस टू एयर मिशन्स (NOTAM) जारी किया जा चुका है.

चौथा संकेत: ये इजरायल से आया है. अमेरिका के साथ इजरायल की दोस्ती जगजाहिर है. अमेरिका का राष्ट्रपति कोई भी हो, लेकिन इजरायल के लिए मदद बनी रहती है. ट्रंप और नेतन्याहू आपसी साझेदार भी हैं. पुराने रिकॉर्ड देखें, तो जब कभी मिडिल ईस्ट या इजरायल के पड़ोसी देशों पर कोई राजनीतिक संकट गहराता है या फिर अटैक होने वाला होता है,तो बेंजामिन नेतन्याहू इजरायल से बाहर निकल जाते हैं. इससे पहले 13 जून 2025 को जब ईरान और अमेरिका में तनातनी बढ़ी थी, तब भी नेतन्याहू का प्लेन देश से बाहर था.

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पांचवा संकेत: ये भी एक रिकॉर्ड है कि जब कभी पेंटागन यानी अमेरिकी रक्षा मुख्यालय के बगल के पिज्जा स्टोर में ऑर्डर बढ़ जाते हैं, तो कोई न कोई मिलिट्री एक्शन होता है.इसे पेंटागन पिज्जा थ्योरी कहते हैं.

अब ईरान के ताजा हालात जान लीजिए
ईरान आज आर्थिक संकट, भारी महंगाई, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों, बेरोजगारी, मुद्रा गिरावट और लगातार जन आंदोलनों जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है. 28 दिसंबर 2025 से ईरान की राजधानी तेहरान में महंगाई को लेकर विरोध प्रदर्शन की शुरुआत हुई. ग्रैंड बाजार में व्यापारियों ने हड़ताल के साथ विरोध प्रदर्शन का आगाज किया. ये प्रदर्शन देखते-देखते बाकी शहरों में फैलने लगा. 47 साल बाद अब मौजूदा आर्थिक बदहाली और सख्त धार्मिक शासन से नाराज लोग अब बदलाव चाहते हैं. मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, अब तक 3,428 प्रदर्शनकारियों को मार डाला गया, जबकि 18,000 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. हालांकि संयुक्त राष्ट्र इन आंकड़ों की पुष्टि नहीं कर सका है. तेहरान में इंटरनेट बंद है. इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी बंद कर दिया गया है. सेना को अलर्ट पर रखा गया है.

आखिर ईरान से अमेरिका को क्या चाहिए?
ईरान की इकोनॉमी मुख्य रूप से ऑयल और नैचुरल गैस पर निर्भर है. ईरान के पास 208209 अरब बैरल तेल अभी है. ये दुनिया के कुल प्रमाणित तेल भंडार का 12% हिस्सा है. ईरान को सऊदी अरब और इजराइल का विरोधी माना जाता है. ये दोनों ही देश अमेरिका के करीबी हैं. अमेरिका की नजर ईरान के ऑयल और गैस रिजर्व पर है. अगर अमेरिका, ईरान पर कंट्रोल कर लेता है, तो दुनिया के व्यापार का 20% उसके कब्जे में आ जाएगा. अमेरिका की खास दिलचस्पी होर्मुज स्ट्रेट और फारस की खाड़ी पर है.

होर्मुज स्ट्रेट और फारस की खाड़ी इतना अहम क्यों?
दरअसल, होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण चोकपॉइंट है.दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का 25% और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) व्यापार का 20% सालाना होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है.यह रोजाना होने वाले ग्लोबल प्रोडक्शन का पांचवां हिस्सा है. अभी ईरान के पास इसका कंट्रोल है. ईरान अगर नहीं चाहेगा तो यहां से कोई भी जहाज नहीं गुजर सकता है. होर्मुज स्ट्रेट ही फारस की खाड़ी से खुले समुद्र तक पहुंचने का एकमात्र जरिया भी है. यही वजह है कि अमेरिका ईरान को कंट्रोल करके होर्मुज स्ट्रेट और फारस की खाड़ी पर अपनी पहुंच बनाना चाहता है.

ईरान का न्यूक्लियर प्रोजेक्ट
दूसरी ओर, ईरान के न्यूक्लियर प्रोजेक्ट की वजह से भी अमेरिका के साथ दुश्मनी बढ़ी है. अमेरिका और पश्चिमी देशों को यह डर है कि ईरान न्यूक्लियर हथियार बना कर मिडिल ईस्ट पर दबदबा बढ़ा सकता है. इसे रोकने के लिए अमेरिका ने ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए हैं.

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