जिस एनरिच्ड यूरेनियम को हड़पने के लिए तड़प रहे ट्रंप, ईरान ने उसके साथ किया ये काम, समझिए कितना बढ़ गया खतरा
ईरान के पास 450 किलो तक का 60% एनरिच्ड यूरेनियम है. अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, 60% एनरिच यूरेनियम का लगभग आधा अब भी इस्फाहान फैसिलिटी में रखा हुआ हो सकता है.
साल 2002 में खुलासा हुआ कि ईरान सीक्रेट तरीके से न्यूक्लियर प्रोग्राम चला रहा है. (AI जेनरेटेड इमेज)
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के साथ जंग खत्म हो गई है. ईरान अपना अब तक का सारा एनरिच्ड यूरेनियम अमेरिका को सौंप देगा. इस बीच ईरान ने एक बार फिर से ट्रंप को झटका दिया है. अमेरिका ईरान के जिस एनरिच्ड यूरेनियम को हड़पने के लिए बेताब हुआ जा रहा है, उसके साथ ईरान ने ऐसा कुछ किया; जिसके बारे में ट्रंप सोच भी नहीं सकते. एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने हाल के हफ्तों में अपने इस्फहान न्यूक्लियर फेसिलिटी की कई सुरंगों को जानबूझकर माइंस से तबाह किया है. उनके एंट्री गेट पर भी बारूदी सुरंगें बिछा दी गई हैं. माना जाता है कि ईरान का 90 फीसदी एनरिच्ड यूरेनियम इसी न्यूक्लियर फेसिलिटी के नीचे मौजूद सुरंगों में रखा गया है.
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में ये जानकारी दी गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने इस फेसिलिटी सेंटर के कई अंडरग्राउंड एंट्री गेटों को मिट्टी और कंक्रीट से बंद कर दिया है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऐसा सिर्फ तभी किया जाता है, जब अंदर कोई बेहद कीमती या रणनीतिक रूप से अहम चीजें रखी गई हो. अगर सुरंगें खाली होतीं, तो उन्हें इतनी सख्त सुरक्षा देने की जरूरत नहीं पड़ती.
रॉयटर्स के पास इन सुरंगों की सैटेलाइट तस्वीरों का एक्सेस है. इनमें कुछ सुरंगों के एंट्री गेट पर बड़े पैमाने पर ईरानी सेना की एक्टिविटी देखी गई है. इससे यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि वहां यूरेनियम जैसी कोई संवेदनशील चीज शिफ्ट की गई है या उसे पहले से ज्यादा सेफगार्ड किया गया है.
ईरान को घेरने के लिए अमेरिका ने कैसे बिछाई बिसात? होर्मुज में कहां-कहां तैनात किए मिसाइल और टैंकर
जमीनी सैनिक भेजकर यूरेनियम जब्त कर सकता है अमेरिका
अमेरिकी न्यूज चैनल CNN ने मामले की जानकारी रखने वाले दो सूत्रों के हवाले से बताया कि मई के आखिर में अमेरिका के टॉप जनरल ने फ्लोरिडा में यूएस सेंट्रल कमांड हेडक्वार्टर का गुपचुप दौरा किया था. उन्हें ईरान में जमीनी सैनिक भेजकर वहां से हाईली एनरिच्ड यूरेनियम को जब्त करने की अमेरिकी सेना की योजनाओं के बारे में जानकारी दी गई.
यूरेनियम का किसलिए होता है इस्तेमाल?
नेचुरल यूरेनियम को मशीनों (सेंट्रीफ्यूज) के जरिए धीरे-धीरे प्योर किया जाता है. इसी प्रक्रिया को यूरेनियम एनरिचमेंट’ कहते हैं. 3 से 5% तक एनरिच्ड यूरेनियम का इस्तेमाल बिजली बनाने वाले न्यूक्लियर पावर प्लांट में होता है. 20% तक एनरिच्ड यूरेनियम हाई लेवल का माना जाता है, लेकिन इससे हथियार नहीं बनता. 60% तक एनरिच्ड यूरेनियम बहुत प्योर माना जाता है. इसे नियर वेपन ग्रेड कहा जाता है. इसके जरिए न्यूक्लियर बम बनाने के करीब पहुंचा जा सकता है. जबकि 90% या उससे ज्यादा एनरिच्ड यूरेनियम वेपन ग्रेड कहलाते हैं. इससे आसानी से न्यूक्लियर बम बनाया जा सकता है.
कैसे पता चला यूरेनियम एनरिच कर रहा ईरान?
साल 2002 में खुलासा हुआ कि ईरान सीक्रेट तरीके से न्यूक्लियर प्रोग्राम चला रहा है. खास तौर पर दो जगहें सामने आईं. नतांज (यूरेनियम संवर्धन प्लांट) और अराक (हेवी वाटर रिएक्टर). ईरान का कहना था कि उसका न्यूक्लियर प्रोग्राम सिर्फ बिजली बनाने और शांति के कामों के लिए है, लेकिन अमेरिका और कई पश्चिमी देशों को शक था कि ईरान न्यूक्लियर हथियार बनाने की दिशा में काम कर रहा है.
ईरान के पास कितना यूरेनियम?
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के पास 450 किलो तक का 60% एनरिच्ड यूरेनियम है. अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, 60% एनरिच यूरेनियम का लगभग आधा अब भी इस्फाहान फैसिलिटी में रखा हुआ हो सकता है. साथ ही कुछ नतान्ज फैसिलिटी में हो सकता है.
IAEA ने ईरान पर लगाई पाबंदियां
इस खुलासे के बाद इंटरनेशनल न्यूक्लियर एनर्जी एजेंसी (IAEA) ने ईरान से जवाब मांगा और जांच शुरू हुई. 2003 में IAEA की टीम ईरान पहुंची. उन्होंने पाया कि ईरान लंबे समय से यूरेनियम एनरीच कर रहा था. इसके बाद संयुक्त राष्ट्र ने 2006 में ईरान के न्यूक्लियर और बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम पर बैन लगाए. इनका चीन ने समर्थन किया. बाद में अमेरिका ने भी ईरान पर तमाम तरह की आर्थिक पाबंदियां लगा दी.
34 साल बाद 2 दुश्मनों की बातचीत, लेबनान-इजरायल में 10 दिनों का सीजफायर, फिर क्रेडिट ले गए ट्रंप
यूरेनियम के लिए ट्रंप का ग्राउंड ऑपरेशन हो सकता है खतरनाक
एक्सपर्ट ट्रंप के यूरेनियम हासिल करने के लिए जमीनी ऑपरेशन शुरू करने की योजना को मुश्किल और खतरनाक मानते हैं. उनका कहना है कि इसके लिए बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिकों को ईरान के अंदर भेजना पड़ेगा. इससे खून-खराबा बढ़ेगा और कई अमेरिकी सैनिकों की जान जाएगी.
क्या बच गया है ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम?
अमेरिका और इजरायल के हमलों से ईरान के न्यूक्लियर फेसिलिटी को नुकसान पहुंचा था, लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि इन हमलों में सिर्फ प्रोडक्शन प्रोसेस का कुछ हिस्सा ही प्रभावित हुआ है. 90% एनरिच्ड यूरेनियम का बड़ा हिस्सा शायद अब भी सुरक्षित है. खासतौर पर ईरान के इस्फहान और दूसरे अंडरग्राउंड फेसिलिटी सेंटर को लेकर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि वहां की कुछ सुरंगों को हमलों के बाद भी लगभग सुरक्षित पाया गया.
अगर ईरान के पास पर्याप्त मात्रा में हाईली एनरिच्ड यूरेनियम मौजूद है, तो वह भविष्य में अपेक्षाकृत कम समय में न्यूक्लियर हथियार बनाने की क्षमता हासिल कर सकता है. हालांकि, ईरान लगातार दावा करता रहा है कि उसका न्यूक्लियर प्रोग्राम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है.
आगे क्या हो सकता है?
आने वाले दिनों में इंटरनेशनल न्यूक्लियर एनर्जी एजेंसी (IAEA), अमेरिका और इजरायल की निगाहें ईरान की इन अंडरग्राउंड फेसिलिटी सेंटर पर टिकी रहेंगी. अगर ईरान निगरानी की परमिशन नहीं देता या सुरंगों को पूरी तरह बंद रखता है, तो तनाव और बढ़ सकता है.
ट्रंप का बड़ा दावा- यूरेनियम को लेकर हो गई डील, क्या वाकई अमेरिका के आगे झुक गया ईरान?
ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें. India.Com पर विस्तार से पढ़ें मनोरंजन की और अन्य ताजा-तरीन खबरें