युद्ध से बर्बाद हुआ ईरान! एक टोस्ट की कीमत 10 लाख रियाल, दवा की गोली 18 करोड़ की, जानिए कहां से कहां पहुंच गई महंगाई

Written By: Shivendra Rai Updated by: Shivendra Rai
Updated Date:April 9, 2026 2:56 PM IST

ईरान की बदहाल अर्थव्यवस्था का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि इसके केंद्रीय बैंक ने मार्च के मध्य में 1 करोड़ रियाल का एक नया नोट जारी किया था. यह चलन में मौजूद अब तक का सबसे नया और सबसे बड़ी कीमत वाला नोट है.

Inflation in Iran: अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे युद्ध में 14 दिनों के सीजफायर को भले ही ईरान में बड़ी राहत और उपलब्धि मानी जा रही हो लेकिन, इस जंग ने देश की अर्थव्यवस्था पर बेहद बुरा असर डाला है. पहले से ही प्रतिबंधों से जूझ रहा ईरान अब और मुश्किल में फंसता नजर आ रहा है. युद्ध शुरू होने से पहले ही ईरान में महंगाई चरम पर थी. अर्थव्यवस्था को लेकर लोगों में इतना गुस्सा था कि सरकार के खिलाफ सड़कों पर आ गए थे. अब एक महीने से ज्यादा चले संघर्ष के बाद हालात और भी बदतर हो गए हैं.

Advertising
Advertising

रोटी और दवा की कीमत लाखों-करोड़ों में

युद्ध के कारण जरूरी चीजों जैसे- खाना, दवाएं, पीने के पानी की कीमतें बढ़ गई हैं. द इकॉनमिक टाइम्स ने AFP की रिपोर्ट के हवाले से बताया है कि तेहरान के बाहरी इलाके में टोस्ट की कीमत अचानक 700,000 रियाल से बढ़कर 1,000,000 रियाल हो गई है. हालांकि यह डालर में 0.75 ही है. ईरान में एक डॉलर की कीमत 13 लाख 15 हजार रियाल से ज्यादा है. ईरान में रहने वाले लोगों ने AFP को बताया है कि कैंसर के इलाज की एक गोली के लिए 180 मिलियन रियाल चुकाने पड़ रहे हैं.

हालांकि हालात पहले भी ठीक नहीं थे. रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी को ईरान पर मेरिका और इजरायल के हमले शुरू होने से पहले कैंसर की इसी दवा की कीमत लगभग 30 लाख रियाल थी. आम नागरिकों की मुश्किलें इतनी ही नहीं हैं. कैंसर मरीजों को 18 करोड़ रियाल कीमत वाली दवा की एक गोली हर 20 दिन में खरीदनी पड़ती है.

ईरान की बदहाल अर्थव्यवस्था

ईरान की बदहाल अर्थव्यवस्था का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि इसके केंद्रीय बैंक ने मार्च के मध्य में दस मिलियन रियाल का एक नया नोट जारी किया था. यह चलन में मौजूद अब तक का सबसे नया और सबसे बड़ी कीमत वाला नोट है. इससे ठीक एक महीने पहले बैंक ने पांच मिलियन रियाल का एक नोट जारी किया था. यह इस बात का संकेत था कि ईरान की मुद्रा कितनी कमजोर है.

पिछले साल जून में अमेरिका और इजरायल के साथ युद्ध के बाद से ही मुद्रा का मूल्य लगातार नीचे गिरता गया है. राजधानी तेहरान की ही तरह ईरान के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में भी जरूरी चीजों की कीमतें कई गुना बढ़ गई हैं. इस इलाके में पहले तुर्की से आने वाली चीजें आसानी से मिल जाती थीं. लेकिन, अब सामान्य चीजों की कीमत भी तीन गुना ज्यादा हो गई हैं.

आम लोगों पर सीधा असर

कीमतों में हुई बढ़ोतरी और ईरानी मुद्रा के लगातार कमजोर होते जाने से लोगों के घरेलू बजट पर और अधिक दबाव पड़ा है. पहले खराब अर्थव्यवस्था और फिर युद्ध के कारण लाखों लोग बेरोजगार हुए हैं. युद्ध के कारण कई व्यवसायों को अपने प्रतिष्ठान बंद करने पड़े हैं. हजारों कर्मचारियों का वेतन नहीं मिल पाया है. निर्माण कंपनियों ने बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी की है. इन सबका असर आम जनता पर बुरी तरह पड़ा है.

बैंकिंग सेक्टर ढहने के कगार पर

AFP की रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध शुरू होने से पहले ही ईरान का बैंकिंग सेक्टर मुश्किल हालात में था. युद्ध की वजह से इस सेक्टर को और भी ज़्यादा नुकसान होगा. बहुत सारे कारोबारी और लोग अब अपना कर्ज नहीं चुका पाएंगे. युद्ध के दौरान, बड़े पैमाने पर पैसे निकालने से रोकने के लिए कैश मशीनों पर कुछ पाबंदियां लगाई गई थीं. लेकिन, इससे भी कुछ खास मदद मिलती नहीं दिख रही. ईरान के सबसे बड़े प्राइवेट बैंकों में से एक 'आयांदेह बैंक' पिछले साल के आखिर में ही 5.2 अरब डॉलर के कर्ज के डूब जाने से हुए नुकसान को झेल नहीं पाया और पूरी तरह ठप हो गया था. अब बाकी बैंकों को बचाने के लिए सेंट्रल बैंक को मजबूरन और ज्यादा नोट छापने पड़ सकते हैं. हालांकि, इससे बाजार में पैसे की सप्लाई बढ़ जाएगी और एक बार फिर महंगाई (inflation) तेजी से बढ़ने लगेगी. ईरान की सांख्यिकी एजेंसी के आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी महीने में सालाना महंगाई दर 47.5 प्रतिशत थी.

Add India.com as a Preferred Source

ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें. India.Com पर विस्तार से पढ़ें मनोरंजन की और अन्य ताजा-तरीन खबरें