Iran War: अमेरिका इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान की राजधानी तेहरान पर जो एयर स्ट्राइक की थी, वह बेहद सटीक थी. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने एक नए टीवी इंटरव्यू में इस घटना का ब्योरा दिया. इसमें उन्होंने बताया कि जिस इमारत में हम बैठे थे, उसे निशाना बनाया गया था, लेकिन जिस हिस्से में हम थे वह सुरक्षित रहा, जबकि इमारत का दूसरा हिस्सा नष्ट हो गया. लेबनान स्थित और हिजबुल्लाह-समर्थित ‘अल-मायादीन’ टीवी नेटवर्क पर 4 जून को प्रसारित एक इंटरव्यू में अरागची ने ये बातें कही हैं.
फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, अरागची 28 फरवरी के हमले में बच गए क्योंकि हमले के समय वे खामेनेई के परिसर के दूसरे हिस्से में थे. वहीं खामेनेई अपने ऑफिस में थे, इसलिए वे मारे गए.
मोहम्मद ने समझाया, अरबी संस्करण में, अरागची कहते हैं कि वे परिसर के दूसरे हिस्से में एक अन्य अधिकारी को जानकारी दे रहे थे, और उनका हिस्सा सुरक्षित रहा जबकि नेता का ऑफिस नष्ट हो गया. अरागची ने बताया कि उस दिन जिनेवा वार्ता के संबंध में परिसर में एक अधिकारी के साथ उनकी मीटिंग थी और सामान्य कामकाज के तरीके के अनुसार, खामेनेई को अपने ऑफिस में मौजूद होना चाहिए था.
आतंकवाद-विरोधी विशेषज्ञों ने कहा कि ईरान के शीर्ष राजनयिक से उस हमले के बारे में मिली नई जानकारी, जिसमें सर्वोच्च नेता अली खामेनेई मारे गए थे, अमेरिका-इजरायल के संयुक्त ऑपरेशन ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के पीछे की सटीकता और रणनीति का अब तक का सबसे स्पष्ट सबूत देती है. यह दिखाता है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति कामयाब रही, जिसमें उन्होंने दुश्मन सरकार के खिलाफ ‘डिकैपिटेशन स्ट्राइक’ (नेतृत्व को खत्म करने वाला हमला) करना और साथ ही संघर्ष खत्म करने का रास्ता भी बनाना, जैसे लक्ष्य तय किए थे.
आतंकवाद-विरोधी विशेषज्ञ डॉ. उमर मोहम्मद ने बताया कि अरागची की बात से पुष्टि होती है कि ऑपरेशन में पूरे परिसर को नष्ट करने के बजाय उसके एक खास हिस्से को निशाना बनाया गया था.
जॉर्ज वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के ‘प्रोग्राम ऑन एक्सट्रीमिज़्म’ में ‘एंटीसेमिटिज़्म रिसर्च इनिशिएटिव’ के डायरेक्टर मोहम्मद ने कहा कि अगर अरागची की बात सही है, तो यह ईरान की तरफ से अमेरिका की रणनीतिक क्षमताओं को साफ तौर पर मानने जैसा था.
मोहम्मद ने कहा, उन्होंने पूरी इमारत को जमींदोज नहीं किया; उन्होंने एक विंग को निशाना बनाया और उसके बगल वाली विंग को वैसे ही छोड़ दिया. एक ही हमले में राष्ट्रपति ट्रंप की पूरी नीति दिखती है. वह कब्जे वाली जंग नहीं चाहते, वह दिखाना चाहते हैं कि अमेरिका दुश्मन सरकार के केंद्र तक सटीक निशाना लगा सकता है और फिर उन्हें बाहर निकलने का रास्ता भी दे सकता है.
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