अमेरिका जैसी सुपरपावर के सामने आखिर कैसे टिका हुआ है ईरान? जानिए वो 'सीक्रेट' जो अब तक दुनिया से छिपा रहा
पश्चिम एशिया में चल रही जंग में क्यों अमेरिका ईरान को हरा नहीं पा रहा, आइए जानते हैं इस बारे में. साथ ही आपको बताएंगे ईरान की वो सीक्रेट रणनीति जो अब तक दुनिया से छिपी रही.
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्राइम टाइम संबोधन ने ज्यादा सवाल खड़े कर दिए. उन्होंने कहा कि ईरान की सैन्य ताकत - जैसे मिसाइल सिस्टम, एयरफोर्स और परमाणु ढांचा काफी हद तक खत्म हो चुका है. उन्होंने कहा जंग अपने आखिरी दौर में है, इसी के साथ उन्होंने आने वाले समय में और हमलों की चेतावनी भी दी. अब यह बयान सवाल उठाता है कि - अगर जीत करीब है तो फिर जंग बढ़ाने की जरूरत क्यों? यह दिखाता है कि अमेरिका एक तरफ अपनी ताकत दिखाना चाहता है, लेकिन दूसरी तरफ वह इस संघर्ष में पूरी तरह फंसने से भी बचना चाहता है.
ईरान में डर नहीं, बल्कि गुस्सा और एकजुटता
ट्रंप के सख्त बयानों, खासकर 'स्टोन एज में भेज देंगे' जैसी बातों का असर ईरान के अंदर उल्टा पड़ा. जहां अमेरिका को लगा था कि इससे अंदरूनी दबाव बढ़ेगा, वहीं लोगों में गुस्सा और एकता बढ़ती नजर आई. यहां तक कि जो लोग पहले अमेरिका को बदलाव का जरिया मानते थे, वे भी अब देश के साथ खड़े दिख रहे हैं. इस तरह की स्थिति में बाहरी खतरा अक्सर अंदरूनी मतभेदों को कम कर देता है. देश को और ज्यादा एकजुट बना देता है.
क्या ईरान में सत्ता परिवर्तन हो सकता है?
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि ईरान में सत्ता परिवर्तन हो चुका है और नया नेतृत्व पहले से कम कट्टर है, लेकिन जमीनी सच्चाई इससे अलग है. अली खामेनेई अभी भी सत्ता के केंद्र में हैं और बाकी प्रमुख चेहरे - राष्ट्रपति, संसद प्रमुख और विदेश नीति के नेता भी वही हैं. कुछ कमांडर जरूर मारे गए, लेकिन उनकी जगह उसी विचारधारा के लोग आ गए हैं. इससे साफ है कि सिस्टम टूटा नहीं, बल्कि और सख्त हो गया है. इसे बदलाव नहीं, बल्कि मजबूती के रूप में देखा जा रहा है.
ईरान का मकसद जीतना नहीं, टिके रहना
ईरान की रणनीति सीधी है - उसे युद्ध जीतना नहीं, बल्कि टिके रहना है. उसका मानना है कि अगर वह एक मजबूत देश के सामने खड़ा रह गया, तो वही उसकी जीत होगी. एक महीने से ज्यादा समय हो चुका है, लेकिन ईरान का प्रशासन, सैन्य ढांचा और कमांड सिस्टम अभी भी काम कर रहा है. इसके अलावा होर्मुज स्ट्रेट पर उसकी पकड़ उसे एक बड़ी ताकत देती है. क्योंकि दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल यहीं से गुजरता है. यही कारण है कि ईरान पूरी तरह कमजोर होने के बावजूद भी खेल में बना हुआ है.
अमेरिका को सताता डर
अमेरिका इस समय एक मुश्किल स्थिति में फंसा हुआ है. अगर वह पीछे हटता है, तो ईरान का डटे रहने वाला मॉडल सही साबित होगा. और अगर वह आगे बढ़ता है, तो उसे लंबी और महंगी जंग में उलझना पड़ेगा, जिसका कोई साफ अंत नहीं दिखता. इसी बीच कुछ अरब देश भी चाहते हैं कि अमेरिका इस जंग को अधूरा न छोड़े, क्योंकि अधूरी लड़ाई भविष्य में और बड़ी समस्या बन सकती है. कुल मिलाकर, यह साफ है कि अभी तक कोई नया ईरान सामने नहीं आया है, और अगर युद्ध के बाद भी वही स्थिति बनी रहती है, तो अमेरिका के जीत के दावे सवालों के घेरे में आ सकते हैं.
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