ट्रंप की ईरान से फाइनल डिमांड? बस इतने साल के लिए परमाणु प्रोग्राम रोक दे तेहरान
Iran Nuclear Program: ट्रंप पहले कह रहे थे कि ईरान को अपना परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह खत्म करना होगा. लेकिन, नया बयान दिखाता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी अपने रुख में बदलाव किया है. चीनी राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद बीजिंग से वापसी की उड़ान के दौरान ट्रंप से ईरान के बारे में सवाल पूछे गए थे.
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Iran Nuclear Program: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान अगर अपने परमाणु कार्यक्रम को 20 साल के लिए निलंबित करने की बात करता है, तो वह इस डील पर मान जाएंगे. यानी ट्रंप ने अपने पुराने रुख में बदलाव किया है जिसमें वह बार-बार कह रहे थे कि ईरान को अपना परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह खत्म करना होगा.
क्या कहा है ट्रंप ने
बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बीजिंग में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बातचीत के बाद, 'एयर फोर्स वन' विमान में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने ये बातें कही हैं. ट्रंप ने कहा कि दोनों पक्ष (चीन और अमेरिका) इस बात पर सहमत थे कि तेहरान को परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती और उसे 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को फिर से खोलना होगा; जिसे उसने अभी बंद कर रखा है, जिसके कारण दुनिया भर में तेल की कीमतें बढ़ गई हैं.
जब एक पत्रकार ने सुझाव दिया कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को 20 साल के लिए निलंबित करना काफी नहीं है, तो उन्होंने जवाब दिया: बीस साल काफी हैं, लेकिन उनकी तरफ से मिलने वाली गारंटी का स्तर दूसरे शब्दों में कहें तो यह असली 20 साल होने चाहिए.
पहले क्या था ट्रंप का रुख
डोनाल्ड ट्रंप पहले ईरान से यूरेनियम संवर्धन (जो हथियार बनाने का एक चरण है) को स्थायी रूप से रोकने और उसे कभी भी परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने की मांग की थी.
बातचीत में सफलता के कोई संकेत नहीं
ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान के साथ उनका सब्र अब जवाब दे रहा है, क्योंकि बातचीत में किसी भी तरह की सफलता के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं. ट्रंप ने युद्ध खत्म करने के अमेरिकी प्रस्ताव पर ईरान की प्रतिक्रिया को 'पूरी तरह से अस्वीकार्य' बताया है.
बड़ी बातें
- ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ संघर्ष-विराम 'बहुत ही नाजुक हालत' में है
- पाकिस्तान इस मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है
- ईरान चाहता है कि सभी मोर्चों पर युद्ध को तत्काल खत्म किया जाए
- ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को हटाने की भी मांग है
- साथ ही ईरान को भविष्य में कोई और हमला न करने की गारंटी भी चाहिए
सफल रहा सीजफायर
इजरायली और अमेरिकी सेनाओं ने 28 फरवरी को ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए. पिछले महीने से लागू एक संघर्ष-विराम (सीजफायर), जिसका मकसद बातचीत के लिए माहौल बनाना था, उसका काफी हद तक पालन किया गया है, हालांकि बीच-बीच में गोलीबारी की कुछ घटनाएं भी हुईं.
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