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ईरान की सबसे ताकतवर सेना को मिल गया नया चीफ, जानिए कौन हैं जनरल अहमद वाहिदी
Israel-Iran War Update: ईरान के शक्तिशाली सैन्य संगठन IRGC को नया प्रमुख मिल गया है. अहमद वाहिदी को ये जिम्मेदारी सौंपी गई है, आइए जानते हैं इनके बारे में...
वाहिदी का करियर जितना प्रभावशाली रहा है, उतना ही विवादों से भी घिरा रहा है. (Photo from Al Jazeera)
ईरान की सैन्य और सुरक्षा व्यवस्था में ब्रिगेडियर जनरल अहमद वाहिदी को बहुत सख्त नेता माना जाता हैं. हाल ही में, उन्हें ईरान की ताकतवर सैन्य संस्था इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का प्रमुख बनाया गया है. उनका जन्म ईरान में हुआ और शुरुआत से ही वे इस्लामिक क्रांति की विचारधारा से प्रभावित रहे. 1979 की ईरानी इस्लामिक क्रांति के बाद, उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ सैन्य गतिविधियों में दिलचस्पी दिखाई और जल्द ही IRGC से जुड़ गए. वाहिदी को शुरू से ही संगठन में एक रणनीतिक और अनुशासित अधिकारी माना जाता था, जिसकी वजह से वे तेजी से नेतृत्व की भूमिकाओं तक पहुंचे.
युद्ध के वक्त IRGC में पहचान और मजबूत हुई
1980 के दशक में जब ईरान-इराक युद्ध शुरू हुआ, तब वाहिदी ने IRGC के भीतर कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं. युद्ध के दौरान, उन्होंने सैन्य संचालन और खुफिया गतिविधियों में काम किया, जिससे संगठन में उनकी पहचान और मजबूत हुई. इसी युद्ध के बाद वे धीरे-धीरे IRGC के उच्च पदों तक पहुंचे. ईरानी मीडिया के मुताबिक, 1988 से 1997 तक वे IRGC की एलिट यूनिट कुद्स फोर्स के पहले कमांडर रहे. यह वही यूनिट है जो ईरान की विदेश नीति और क्षेत्रीय सैन्य रणनीति में अहम भूमिका निभाती है.
अहमद वाहिदी कभी रक्षा मंत्री भी थे
सैन्य नेतृत्व के अलावा, वाहिदी ने राजनीति और सरकार में भी अहम भूमिकाएं निभाईं. वे 2009 से 2013 तक ईरान के तत्कालीन राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद की सरकार में रक्षा मंत्री रहे. इसके बाद, उन्होंने आंतरिक सुरक्षा और प्रशासन से जुड़े कई पदों पर काम किया. हाल ही के सालों में वे राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की सरकार में गृह मंत्री भी रहे. उनकी यह राजनीतिक और प्रशासनिक पृष्ठभूमि उन्हें सिर्फ एक सैन्य अधिकारी ही नहीं, बल्कि एक मजबूत रणनीतिक प्रशासक भी बनाती है. विश्लेषक कहते हैं कि यही अनुभव उन्हें युद्ध जैसे मुश्किल दौर में IRGC का नेतृत्व करने के लिए उपयुक्त बनाता है.
इंटरपोल नोटिस और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध
वाहिदी का करियर जितना प्रभावशाली रहा है, उतना ही विवादों से भी घिरा रहा है. अर्जेंटीना की जांच एजेंसियों ने 1994 में ब्यूनस आयर्स के AMIA यहूदी सामुदायिक केंद्र बम धमाके में उनकी कथित भूमिका को लेकर इंटरपोल से रेड नोटिस जारी कराया था. उस हमले में 85 लोगों की मौत हुई थी, हालांकि ईरान ने इन आरोपों को हमेशा खारिज किया है और इन्हें राजनीतिक बताया है. इसके अलावा, 2022 में महसा अमीनी की मौत के बाद ईरान में हुए प्रदर्शनों पर सरकारी कार्रवाई को लेकर अमेरिका और यूरोपीय संघ ने भी उन पर प्रतिबंध लगाए. इन विवादों के बावजूद ईरान की सत्ता व्यवस्था में उनका प्रभाव कम नहीं हुआ.
IRGC की कमान अब वाहिदी के हाथों में
अहमद वाहिदी ऐसे समय में IRGC के प्रमुख बने हैं, जब ईरान गंभीर सैन्य तनाव और हमलों का सामना कर रहा है. हाल के संघर्षों में ईरान के कई शीर्ष सैन्य नेताओं की हत्या हो चुकी है, जिससे संगठन की कमान संभालना और भी चुनौतीपूर्ण हो गया है. विश्लेषकों का मानना है कि वाहिदी को एक कठोर और रणनीतिक सुरक्षा विशेषज्ञ माना जाता है, जो संकट की स्थिति में मजबूत फैसले लेने के लिए जाने जाते हैं. उनका अनुभव – सैन्य, राजनीतिक और खुफिया – उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में स्थापित करता है जो विकेंद्रीकृत IRGC ढांचे को समन्वित कर सकता है. ईरान की राजनीति में यह भी माना जाता है कि इस संगठन की ताकत ही इस्लामिक गणराज्य की स्थिरता का आधार है. इसलिए वाहिदी की भूमिका आने वाले समय में और भी निर्णायक साबित हो सकती है.
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