ट्रंप की बातचीत के बीच ईरान का बड़ा दांव, अमेरिकी सैन्य बेस पर दागीं बैलिस्टिक मिसाइलें; मिडिल ईस्ट में फिर बढ़ा तनाव
ईरान ने जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं. अमेरिका का दावा है कि सभी मिसाइलें हवा में ही नष्ट कर दी गईं. घटना के बाद पश्चिम एशिया में तनाव फिर बढ़ गया और कूटनीतिक प्रयासों पर भी सवाल खड़े हो गए.
- ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य बेस को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया.
- CENTCOM के मुताबिक सभी मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर दिया गया और कोई नुकसान नहीं हुआ.
- यह हमला ट्रंप द्वारा ईरान पर सैन्य कार्रवाई रोकने के बाद पहला सीधा मिसाइल अटैक है.
- इसी बीच हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में एक सऊदी तेल टैंकर पर भी मिसाइल हमला करने का दावा किया.
Iran Vs US: पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है. ईरान ने मंगलवार को जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डे पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इसे अचानक किया गया हमला बताया और दावा किया कि सभी मिसाइलों को सफलतापूर्वक हवा में ही मार गिराया गया. शुरुआती जानकारी के अनुसार इस हमले में किसी सैनिक की मौत या किसी तरह के नुकसान की खबर नहीं है.
ये हमला ऐसे समय हुआ है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ दिन पहले ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान रोककर बातचीत का रास्ता अपनाने की बात कही थी. इसलिए इस घटना ने दोनों देशों के बीच चल रहे कूटनीतिक प्रयासों पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं. CENTCOM के अनुसार हमला भारतीय समयानुसार देर रात से पहले किया गया और अमेरिकी सेना पहले से हाई अलर्ट पर थी. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने की वजह से सभी मिसाइलों को लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही रोक लिया गया.
अमेरिका-ईरान में बातचीत जारी
दरअसल अमेरिका ने हाल ही में ईरान से जुड़े ठिकानों पर चल रहा दो सप्ताह का बमबारी अभियान रोक दिया था. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने राष्ट्रपति ट्रंप को सलाह दी थी कि उपलब्ध सैन्य लक्ष्यों पर कार्रवाई अपनी सीमा तक पहुंच चुकी है और अब बातचीत को मौका दिया जाना चाहिए. इसके बाद ट्रंप ने भी कहा था कि अमेरिका और ईरान के बीच अच्छी बातचीत चल रही है और समझौते की संभावना बनी हुई है. हालांकि उन्होंने यह भी चेतावनी दी थी कि यदि वार्ता विफल रही तो सैन्य कार्रवाई फिर शुरू की जा सकती है.
अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर हमले
जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाना पहले भी हमलों का निशाना बन चुका है. इसी महीने मिसाइल और ड्रोन हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई थी. उसी घटना के बाद अमेरिका ने ईरान समर्थित समूहों के खिलाफ लगातार कई दिनों तक सैन्य कार्रवाई की थी.
इस बीच क्षेत्र में तनाव केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं है. यमन के हूती विद्रोहियों ने दावा किया है कि उन्होंने लाल सागर में एक सऊदी तेल टैंकर पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं. हूती संगठन का कहना है कि जहाज ने उनके घोषित समुद्री प्रतिबंध का उल्लंघन किया था. हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है. ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी UKMTO ने भी लाल सागर में एक जहाज के पास विस्फोट जैसी घटना की जानकारी दी है, लेकिन दोनों घटनाओं के बीच सीधा संबंध अभी स्पष्ट नहीं है.
ट्रंप और नेतन्याहू के बीच बातचीत
इन घटनाओं के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की व्हाइट हाउस में करीब 90 मिनट तक बैठक हुई. दोनों नेताओं ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा पर विस्तार से चर्चा की. बैठक के बाद दोनों पक्षों ने बातचीत को सकारात्मक और उपयोगी बताया.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है. फिलहाल अमेरिका ने सतर्कता बढ़ा दी है, जबकि दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या दोनों देश फिर बातचीत की राह चुनेंगे या क्षेत्र एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव की ओर बढ़ेगा.
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