ईरान के सबसे बड़े दुश्मन ने ही रुकवाया अमेरिकी हमला? डोनाल्ड ट्रंप से की थी फोन पर बात, वजह जानिए

रिपोर्ट के अनुसार, बेंजामिन नेतन्याहू ने डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बात की थी और मिलिट्री हमले न करने के लिए मनाया था. बेंजामिन नेतन्याहू को इस बात की आशंका थी कि ऐसा करने से ईरान बदले में सबसे पहले इजराइल पर ही जवाबी हमला करेगा.

Published date india.com Published: January 17, 2026 12:39 PM IST
(प्रतीकात्मक एआई इमेज)
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Iran protests: ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों को लेकर दुनिया भर में कयास लगाए जा रहे थे कि अमेरिका अयातुल्ला के इस्लामिक शासन के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकता है. हालांकि अमेरिका ने ऐसा नहीं किया. अब मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिका को ऐसा करने से ईरान के सबसे बड़े दुश्मन इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रोका था.

क्या है पूरा मामला

डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार, बेंजामिन नेतन्याहू ने डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बात की थी और मिलिट्री हमले न करने के लिए मनाया था. बेंजामिन नेतन्याहू को इस बात की आशंका थी कि ऐसा करने से ईरान बदले में सबसे पहले इजराइल पर ही जवाबी हमला करेगा. नेतन्याहू ने ट्रंप से बात करने से पहले अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से भी बात की थी. इसी दिन व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने ईरान के खिलाफ मिलिट्री विकल्पों पर चर्चा करने के लिए बैठक की थी. लेकिन, बेंजामिन नेतन्याहू से बात के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया से कहा कि ईरान ने सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों को फांसी देने का फैसला टाल दिया है. इसलिए मामले का कूटनीतिक हल खोजा जाएगा.

इन मुस्लिम देशों की भी रही भूमिका

कतर, सऊदी अरब, ओमान और मिस्र समेत दूसरे खाड़ी देशों ने भी डोनाल्ड ट्रंप से हमले न करने को कहा था. उन्हें डर था कि इससे इलाके में जंग छिड़ सकती है.खाड़ी देशों के सीनियर अधिकारियों ने ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों से इस बारे में कई बार बात की. इजरायली और अरब अधिकारियों दोनों को डर था कि अमेरिका के हमले के जवाब में ईरान उनके देशों पर हमला कर सकता है. अरब देश न सिर्फ अमेरिका से बल्कि टॉप ईरानी अधिकारियों के साथ भी बातचीत कर रहे थे.

अब भी जारी है तनाव

डेली मेल की रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप ने ईरान पर हमला करने के मिलिट्री ऑप्शन को खत्म नहीं किया है और उनका फैसला अभी भी इस बात पर निर्भर करता है कि ईरानी अधिकारी बाकी विरोध प्रदर्शनों से कैसे निपटते हैं. बता दें कि पिछले कुछ हफ्तों में ईरान में सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं. इसमें 2500 लोगों के मारे जाने की खबर है. ईरान ने लगभग 18,000 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है. ईरान की न्यायपालिका के प्रमुख गुलाम हुसैन मोहसेनी-एजेई ने संकेत दिए हैं कि हिरासत में लिए गए लोगों के खिलाफ तेजी से सुनवाई होगी और फांसी की सजा दी जाएगी.

ईरान से लौटे भारतीय

ईरान में हालात अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं. ईरान से भारतीय नागरिक वापस लौट रहे हैं. 17 जनवरी, शनिवार को दिल्ली एयरपोर्ट पर ईरान से भारतीय नागरिकों का पहला जत्था उतरा. वापस आए लोगों ने बताया कि पिछले एक हफ्ते से इंटरनेट बंद था.

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