ईरान का बड़ा फैसला, कहा - 'इजरायल के हमले जारी रहे तो अमेरिका से नहीं करेंगे बात...'
Iran US Peace Talks: ईरान ने कहा है कि गाजा और लेबनान में इजरायल के सैन्य अभियान बंद होने तक अमेरिका के साथ कोई शांति वार्ता नहीं होगी. जानिए मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का दुनिया पर क्या असर पड़ सकता है.
ईरान की बातचीत टीम ने अमेरिका के साथ चल रहे अप्रत्यक्ष मैसेज एक्सचेंज को रोकने का फैसला लिया है. (Photo from Al Jazeera)
मिडिल ईस्ट में चल रहा तनाव अब खतरनाक स्तर पर पहुंचता दिख रहा है. ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक इजरायल लेबनान और गाजा में अपने सैन्य अभियान नहीं रोकता, तब तक अमेरिका के साथ किसी भी तरह की शांति वार्ता नहीं होगी. ईरान की सरकारी मीडिया और IRGC से जुड़ी तसनीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक, तेहरान अब बातचीत से ज्यादा जवाबी रणनीति पर ध्यान दे रहा है. इस बयान के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है, क्योंकि अमेरिका लगातार इजरायल का समर्थन करता रहा है और ईरान इसे क्षेत्रीय अस्थिरता की बड़ी वजह मानता है.
अमेरिका से बातचीत बंद करने का फैसला
न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की बातचीत टीम ने अमेरिका के साथ चल रहे अप्रत्यक्ष मैसेज एक्सचेंज को रोकने का फैसला लिया है. अब तक दोनों देशों के बीच कुछ संदेश मध्यस्थ देशों के जरिए भेजे जा रहे थे, लेकिन इजरायल के हालिया सैन्य ऑपरेशन के बाद ईरान ने यह प्रक्रिया बंद कर दी. ईरान का कहना है कि जब तक गाजा और लेबनान में हमले जारी रहेंगे, तब तक किसी भी शांति पहल का कोई मतलब नहीं है. इससे पहले भी ईरान कई बार कह चुका है कि क्षेत्र में स्थिरता तभी आएगी जब फिलिस्तीन और लेबनान में हिंसा रुकेगी.
होर्मुज को लेकर बढ़ी दुनिया की चिंता
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि ईरान और होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह ब्लॉक करने की रणनीति पर विचार कर रहे हैं. आपको बता दें यह समुद्री रास्ता दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल रास्तों में गिना जाता है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस की सप्लाई होती है. अगर यहां किसी तरह का अवरोध पैदा होता है, तो इसका असर सीधे वैश्विक तेल बाजार और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि होर्मुज स्ट्रेट में तनाव बढ़ने का मतलब सिर्फ मध्य पूर्व नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ना हो सकता है.
Yemen और Red Sea का जिक्र क्यों हुआ?
ईरान समर्थित समूहों की बात करते हुए तस्नीम ने बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य का भी जिक्र किया, जो यमन के पास स्थित बेहद अहम समुद्री मार्ग है. यहां ईरान समर्थित हूती विद्रोही पहले भी जहाजों को निशाना बना चुके हैं. हूती संगठन यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण रखता है और वह लंबे समय से अमेरिका और इजरायल विरोधी रुख अपनाता रहा है. रिपोर्ट में कहा गया कि जरूरत पड़ने पर प्रतिरोध मोर्चा के दूसरे मोर्चों को भी सक्रिय किया जा सकता है. इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि अगर तनाव और बढ़ा, तो रेड सी (Red Sea) और आसपास के समुद्री इलाकों में भी खतरा बढ़ सकता है.
मिडिल ईस्ट पर दुनिया की नजर
ईरान के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है. अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता तनाव पहले ही वैश्विक राजनीति और व्यापार को प्रभावित कर रहा है. अगर बातचीत पूरी तरह रुकती है और समुद्री रास्तों पर संकट गहराता है, तो इसका असर तेल की कीमतों से लेकर अंतरराष्ट्रीय व्यापार तक हर जगह दिखाई दे सकता है. फिलहाल पूरी दुनिया की नजर मिडिल ईस्ट की स्थिति पर टिकी हुई है, क्योंकि आने वाले दिनों में वहां का हर फैसला वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है.
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