लेबनान पर इजरायली हमलों के बाद ईरान ने बंद किया होर्मुज, जहाजों को चेतावनी- पास आए तो सुरक्षा की गारंटी नहीं

Written By: Anjali Karmakar Updated by: Anjali Karmakar
Updated Date:June 20, 2026 8:50 PM IST

अमेरिका-ईरान समझौते के बाद 18 जून को 25 कारोबारी जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजरे. यह अप्रैल के बाद एक दिन में सबसे ज्यादा संख्या है. हालांकि, 500 से ज्यादा जहाज और 11 हजार नाविक अब भी खाड़ी में फंसे हुए हैं.

  • होर्मुज स्ट्रेट करीब 167 किमी लंबा, ईरान का इसपर काफी कंट्रोल.
  • दुनिया के कुल पेट्रोलियम प्रोडक्ट के 20% इसी रूट से होता है सप्लाई.
  • ईरान और अमेरिका के बीच 17 जून को हुए 14 प्वॉइंट की पीस डील.
  • 18 जून को 25 जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजरे, 500 से ज्यादा अभी भी फंसे.

लेबनान पर इजरायली हमलों के बाद ईरान ने एक्शन लिया है. ईरान ने शनिवार (20 जून 2026) को होर्मुज स्ट्रेट दोबारा से बंद कर दिया. ईरान की ज्वॉइंट मिलिट्री कमांड ने सरकारी टीवी पर ऐलान करते हुए कहा कि इसकी वजह लेबनान में हो रहे इजरायली हमले हैं. अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून की रात शांति समझौते पर दस्तखत हुए थे. इसमें होर्मुज को खोलने और लेबनान में हमले बंद करने की शर्तें थीं. 19 जून को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कतर के साथ मिलकर इजरायल-लेबनान में सीजफायर कराने का दावा किया. इजरायल ने भी सीजफायर की बात कंफर्म की. लेकिन, सीजफायर के महज 8 घंटे के अंदर इजरायल ने दोबारा हमले शुरू कर दिए.

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ईरान ने कहा- अमेरिका ने नहीं मानी पहली शर्त

ईरानी सरकारी मीडिया इरना के मुताबिक, देश की टॉप ज्वॉइंट मिलिट्री कमांड ने सरकारी टीवी पर होर्मुज को बंद करने का ऐलान किया. खतम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने कहा कि अमेरिका ने पीस डील की पहली शर्त को लागू नहीं किया है. इजरायल लगातार दक्षिणी लेबनान में सीजफायर का उल्लंघन कर रहा है. इसी के जवाब में ईरान ने होर्मुज से जहाजों की आवाजाही बंद करने का फैसला लिया है.

इजरायल के हमलों में अब तक 16 मौतें

अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायली सेना ने ड्रोन और तोपों से लेबनान के नबाहितए इलाके में अटैक किया. इन हमलों में कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई है. इजरायली PM बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि इजरायल अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा. इजरायल गाजा और लेबनान में अपने सैन्य अभियान जारी रखेगा.

लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि 2 मार्च से जारी इजरायल और हिजबुल्लाह की जंग में अब तक मरने वालों की संख्या 4,000 के पार पहुंच गई है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार को दोनों पक्षों के बीच हुई भारी गोलीबारी और हमलों में लेबनान में कम से कम 47 लोगों की मौत हो गई.

IRGC ने जारी की चेतावनी

ईरान की रिवोल्यूशनरी फोर्स (IRGC) ने जहाजों को होर्मुज स्ट्रे के पास से न गुजरने की चेतावनी दी है. ईरान की सरकारी मीडिया इरना के मुताबिक, IRGC ने कहा है कि अगर दूसरे देशों के जहाज होर्मुज के नजदीक आए, तो उनकी सुरक्षा की गारंटी नहीं होगी. IRGC से जुड़ी एक मिलिट्री कमांड ने कहा कि होर्मुज बंद करना पहला कदम है. इजरायल आगे भी लेबनान पर हमला करता रहा, तो जरूरी कदम उठाए जाएंगे.

अमेरिकी उपराष्ट्रपति का दावा- होर्मुज पार कर रहे जहाज

वहीं, अमेरिका के फॉक्स न्यूज के मुताबिक, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने होर्मुज के खुले रहने का दावा किया. वेंस ने कहा है कि उन्हें भरोसा है कि ईरान और अमेरिका के बीच हुई 14 प्वॉइंट की पीस डील कायम रहेगी. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका को ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है, जिससे पता चले कि होर्मुज मरीन ट्रैफिक के लिए बंद कर दिया गया है.

डील के बाद होर्मुज पर बढ़ी थी जहाजों की आवाजाही

अमेरिका-ईरान समझौते के बाद 18 जून को 25 कारोबारी जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजरे. यह अप्रैल के बाद एक दिन में सबसे ज्यादा संख्या है. हालांकि, 500 से ज्यादा जहाज और 11 हजार नाविक अब भी खाड़ी में फंसे हुए हैं.

होर्मुज कब बन गया पूरी दुनिया की लाइफलाइन? जानिये पहले किस रास्ते से होती थी तेल-गैस की सप्लाई

होर्मुज स्ट्रेट की पोजिशन?

होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से और अरब सागर से जोड़ता है. इसके उत्तर में ईरान सटा हुआ है. होर्मुज स्ट्रेट करीब 167 किमी लंबा है. इसमें आने-जाने वाले समुद्री ट्रैफिक के लिए 3 किमी चौड़ी शिपिंग लेन तय है. इसके दक्षिण में ओमान और संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE पड़ता है. इसके आसपास सभी तेल उत्पादक देश हैं. लेकिन, ईरान का कंट्रोल ज्यादा है.

दुनिया के लिए होर्मुज स्ट्रेट इतना अहम क्यों है?

अमेरिका के एनर्जी इन्फॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन यानी EIA के मुताबिक, दुनिया के कुल पेट्रोलियम में से करीब 20% होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है. हर दिन लगभग 1.78 करोड़ बैरल से 2.08 करोड़ बैरल कच्चा तेल और ईंधन इस रूट से जाता है. ईरान रोजाना 17 लाख बैरेल पेट्रोलियम इस रूट से निर्यात करता है. हॉर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) अचानक से दुनिया की लाइफलाइन नहीं बना. 20वीं सदी में ये अहम ऑयल रूट बना था. 1950–1970 के दशक के बीच होर्मुज स्ट्रेट धीरे-धीरे ग्लोबल एनर्जी सप्लाई का केंद्र बन गया.

होर्मुज के लाइफलाइन बनने के 3 कारण

दूसरे विश्व युद्ध के बाद सऊदी अरब, कुवैत, इराक और ईरान में बड़े पैमाने पर तेल उत्पादन शुरू हुआ. जैसे-जैसे उत्पादन बढ़ा, इस तेल को दुनिया तक पहुंचाने के लिए सबसे आसान और सीधा समुद्री रास्ता होर्मुज बन गया. 1960 के बाद बड़े-बड़े तेल टैंकर (VLCCs) आने लगे, जो सीधे खाड़ी से तेल लेकर यूरोप, अमेरिका और एशिया तक जाते थे. इन जहाजों के लिए होर्मुज सबसे छोटा और किफायती रास्ता था. 1970 के दशक तक पश्चिमी देशों (खासकर अमेरिका और यूरोप) की तेल पर निर्भरता बहुत बढ़ गई. यहीं से होर्मुज स्ट्रेट दुनिया की लाइफलाइन और चोक प्वॉइंट बन गया. यानी ऐसा रास्ता, जिसे बंद किया जाए तो पूरी दुनिया पर असर पड़ेगा.

होर्मुज से पहले कैसे होता था तेल और गैस का कारोबार?

होर्मुज से पहले 1960–1980 के बीच खाड़ी देशों (Saudi, Iran, Iraq, Kuwait, UAE) में बड़े पैमाने पर तेल उत्पादन शुरू हुआ. इन देशों से तेल और गैस खरीदने के लिए यूरोप, अमेरिका और बाद में एशिया (India, China, Japan) की डिमांड तेजी से बढ़ी. उस समय पाइपलाइन सीमित थीं. आज जैसा डेवलप समुद्री नेटवर्क तब मौजूद नहीं था. इसलिए ट्रेनों से तेल की सप्लाई होती थी.

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