मशहद में लाखों का सैलाब, खामेनेई को अंतिम विदाई... फिर गूंजे मिसाइल हमलों के धमाके, अमेरिका-ईरान में बढ़ा टकराव
ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया गया. लाखों लोगों ने अंतिम यात्रा में हिस्सा लिया. इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच नए हमलों ने शांति वार्ता पर सवाल खड़े कर दिए और क्षेत्रीय तनाव फिर बढ़ गया.
मशहद में लाखों का सैलाब, खामेनेई को अंतिम विदाई.
- मशहद में लाखों लोगों की मौजूदगी के बीच अयातुल्ला अली खामेनेई को सुपुर्द-ए-खाक किया गया.
- अंतिम संस्कार के दौरान अमेरिका और ईरान ने एक-दूसरे पर नए हमलों के आरोप लगाए.
- नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई सार्वजनिक कार्यक्रमों से अब तक दूर रहे हैं.
- हालिया सैन्य तनाव ने अमेरिका-ईरान शांति वार्ता और संघर्ष विराम पर सवाल खड़े कर दिए.
Iran Supreme Leader Funeral: ईरान के सुप्रीम लीडल अयातुल्ला अली खामेनेई को गुरुवार (9 जुलाई) की देर शाम उनके जन्मस्थान मशहद स्थित इमाम रजा दरगाह परिसर में पूरे राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खास किया गया. 6 दिनों तक चले राष्ट्रीय शोक और अलग-अलग शहरों में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रमों के बाद ये अंतिम संस्कार संपन्न हुआ, मशहद की सड़कों पर लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने इसे हाल के वर्षों की सबसे बड़ी सार्वजनिक अंतिम यात्राओं में शामिल कर दिया है.
अंतिम यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में लोग काले कपड़ों में नजर आए. कई लोग ईरानी झंडे और लाल रंग के बैनर लेकर पहुंचे जिन्हें प्रतिशोध का प्रतीक माना जाता है. भीड़ में खामेनेई की तस्वीरें भी दिखाई थीं. सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी की गई थी और पूरे शहर को सुरक्ष घेरे में रखा गया था.
28 फरवरी को हुई थी खामेनेई की मौत
खामेनेई की मौत 28 फरवरी को तेहरान स्थित उनके आवास पर हुए एक बड़े हमले में हुई थी. इस मामले में उनके परिवार के कई सदस्य भी मारे गए थे. उनके निधन के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता बनाया गया, लेकिन अब तक वह सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं. माना जा रहा है कि हमले में उन्हें भी गंभीर चोटें आई थीं.
अंतिम संस्कार से पहले खामेनेई और उनके परिवार के सदस्यों के पार्थिव शरीर को इराक के नजफ और करबला ले जाया गया, जहां लाखों लोगों ने श्रद्धांजलि अर्पित की. इसके बाद स्पेशल फ्लाइट से शव मशहद पहुंचाए गए. शाम होते-होते उनका ताबूत इमाम रज़ा दरगाह पहुंचा, जहां धार्मिक परंपराओं के अनुसार अंतिम रस्में पूरी की गईं.
अमेरिका-ईरान भी भड़की जंग
इधर अंतिम संस्कार के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया. ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने तेहरान से मशहद जाने वाली रेलवे लाइन के दो पुलों पर हमला किया ताकि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया प्रभावित हो सके. वहीं, अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि उसकी सैन्य कार्रवाई का उद्देश्य क्षेत्र में ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना था.
जवाब में ईरान ने कुवैत, बहरीन और कतर में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया. इससे मध्य पूर्व में तनाव और गहरा गया है. कुछ हफ्ते पहले दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम और परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत के लिए एक प्रारंभिक समझौता हुआ था, लेकिन हालिया घटनाओं के बाद उसके भविष्य पर अनिश्चितता बढ़ गई है.
डोनाल्ड ट्रंप की धमकी
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिया है कि पहले हुआ समझौता अब प्रभावी नहीं माना जा सकता है. अगर दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव जारी रहता है तो कूटनीतिक समाधान की संभावना कमजोर पड़ सकती है. ईरान के लिए खामेनेई का अंतिम संस्कार केवल एक धार्मिक और भावनात्मक आयोजन नहीं था, बल्कि ये देश की राजनीतिक एकजुटता और शक्ति प्रदर्शन का भी अवसर माना गया. हालांकि, अंतिम विदाई के साथ ही नए सैन्य तनाव ने पूरे क्षेत्र के भविष्य को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं.
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