
Tanuja Joshi
हल्द्वानी से दिल्ली के बड़े न्यूजरूम तक... तनुजा जोशी, उत्तराखंड के शांत और खूबसूरत शहर हल्द्वानी से ताल्लुक रखती हैं. देहरादून के ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी ... और पढ़ें
Iran-US Conflict: मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ लेता दिख रहा है. ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि अगर संयुक्त राज्य अमेरिका ने उसके खिलाफ कथित नौसैनिक घेराबंदी जारी रखी, तो वो क्षेत्र के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों को बंद कर सकता है. ये चेतावनी केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी बड़ा खतरा मानी जा रही है.
रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान का कहना है कि वह फारस की खाड़ी, ओमान सागर और लाल सागर जैसे अहम रास्तों पर व्यापार को रोक सकता है. ये वे समुद्री मार्ग हैं, जिनसे दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल और जरूरी सामान का ट्रांसपोर्ट होता है. अगर यहां रुकावट आती है, तो इसका असर सीधे वैश्विक बाजारों पर पड़ेगा.
खास तौर पर बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट को लेकर चिंता ज्यादा है. ये एक संकरा समुद्री रास्ता है, जो यूरोप, एशिया और अफ्रीका के बीच व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. अगर यहां किसी तरह की रुकावट आती है, तो शिपिंग इंडस्ट्री और तेल सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हो सकती है.
ईरान की सेना के शीर्ष कमांड ने बयान में कहा है कि अगर अमेरिकी दबाव जारी रहा, तो वे किसी भी देश को इन रास्तों से निर्यात या आयात करने की अनुमति नहीं देंगे. उनका दावा है कि अमेरिका की कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय नियमों और युद्धविराम समझौते का उल्लंघन है.
इस पूरे मामले में Al Jazeera और The Washington Post जैसी अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थाओं ने भी रिपोर्ट किया है कि अमेरिका इस क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने की तैयारी कर रहा है. खबरों के मुताबिक, हजारों अतिरिक्त सैनिकों को तैनात किया जा सकता है, जिससे हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो सकते हैं.
एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर ये टकराव बढ़ता है, तो सबसे बड़ा असर तेल की कीमतों पर पड़ेगा. मिडिल ईस्ट दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक क्षेत्र है और यहां किसी भी तरह का संकट पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ा सकता है. भारत जैसे देश, जो तेल आयात पर निर्भर हैं, उन्हें इसका सीधा झटका लग सकता है.
इसके अलावा, ग्लोबल सप्लाई चेन भी प्रभावित हो सकती है. पिछले कुछ सालों में दुनिया पहले ही कई सप्लाई संकटों का सामना कर चुकी है, और अब अगर समुद्री रास्ते बंद होते हैं, तो इलेक्ट्रॉनिक्स, खाद्य पदार्थ और अन्य जरूरी चीजों की उपलब्धता पर असर पड़ेगा.
फिलहाल स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है. दोनों देशों के बीच तनाव अगर और बढ़ता है, तो ये केवल एक क्षेत्रीय विवाद नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक संकट का रूप ले सकता है. आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कूटनीतिक स्तर पर इस संकट को कैसे संभाला जाता है.
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