Iran-US War: कब तक जारी रहेगी अमेरिका और ईरान के बीच जंग? IRGC सलाहकार के बयान से बढ़ी हलचल

Written By: Tanuja Joshi Updated by: Tanuja Joshi
Updated Date:August 13, 2026 8:16 AM IST

ईरान के IRGC के वरिष्ठ सलाहकार ने संकेत दिया है कि अमेरिका के साथ संघर्ष को लंबे समय तक जारी रखना तेहरान की रणनीति हो सकती है. उनका कहना है कि युद्ध से अमेरिका पर दबाव बढ़ेगा और भविष्य के हमलों के खिलाफ ईरान की deterrence मजबूत होगी.

Iran-US War: अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव को लेकर एक ऐसा बयान सामने आया है, जिसने आने वाले समय की तस्वीर को और गंभीर बना दिया है. ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के वरिष्ठ सलाहकार मोहम्मद रजा नकदी ने कहा है कि तेहरान जरूरत पड़ने पर संघर्ष को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मौजूदा कार्यकाल के अंत तक खींच सकता है.

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नकदी ने PBS NewsHour से बातचीत में कहा कि युद्ध को लंबा खींचना ईरान की रणनीति का हिस्सा हो सकता है. उनके मुताबिक इसका मकसद सिर्फ मौजूदा लड़ाई लड़ना नहीं, बल्कि अमेरिका को लंबे समय तक लागत उठाने के लिए मजबूर करना और भविष्य में ईरान पर हमला करने वाले किसी भी देश के लिए एक मजबूत संदेश तैयार करना है.

ट्रंप के कार्यकाल से क्यों जोड़ा युद्ध?

ईरानी अधिकारी के बयान में सबसे ज्यादा ध्यान इस बात ने खींचा कि उन्होंने संघर्ष की अवधि को सीधे ट्रंप के राष्ट्रपति पद से जोड़ दिया. उनका तर्क है कि अगर युद्ध लंबे समय तक चलता है और अमेरिका को लगातार संसाधन तथा सैन्य ताकत खर्च करनी पड़ती है, तो इससे ईरान भविष्य के हमलों के खिलाफ अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है. नकदी के मुताबिक तेहरान का लक्ष्य ऐसी deterrence तैयार करना है, जिससे अमेरिका या कोई अन्य संभावित दुश्मन ईरान पर हमला करने से पहले उसके संभावित नुकसान के बारे में कई बार सोचे.

ईरान खुद को युद्ध में मजबूत मान रहा

IRGC सलाहकार ने दावा किया कि ईरान फिलहाल खुद को इस संघर्ष में बढ़त की स्थिति में देखता है, हालांकि उन्होंने ये भी माना कि तेहरान ने अभी अपना अंतिम लक्ष्य हासिल नहीं किया है. उनका कहना था कि मौजूदा लड़ाई से ईरानी सेना को अमेरिका की सैन्य क्षमता को करीब से समझने का मौका मिला है. नकदी ने दावा किया कि संघर्ष के दौरान ईरान ने अमेरिकी सैन्य ताकत को पहले की तुलना में कम प्रभावी पाया है. हालांकि, ये ईरानी पक्ष के दावे हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से सत्यापित तथ्य के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए.

मिसाइलों को लेकर भी बड़ा दावा

नकदी ने ईरान की मिसाइल क्षमता पर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि ईरान हर दिन जितनी मिसाइलें इस्तेमाल कर रहा है, उससे अधिक मिसाइलें बनाने में सक्षम है. उनके मुताबिक उत्पादन को अलग-अलग स्थानों पर जारी रखा जा सकता है और इस वजह से लंबे संघर्ष की स्थिति में भी ईरान अपनी मिसाइल क्षमता बनाए रख सकता है. उन्होंने यहां तक दावा किया कि अगर युद्ध कई वर्षों तक चलता है, तब भी ईरान मिसाइल निर्माण और हमलों को जारी रखने की स्थिति में रह सकता है.

मिसाइल खत्म हुईं तो क्या होगा?

सबसे विवादित बयान तब सामने आया जब नकदी से पूछा गया कि अगर ईरान के पास मिसाइलें नहीं बचीं तो वह अमेरिका के लिए कैसे बड़ा खतरा बन सकता है. इसके जवाब में उन्होंने अमेरिका के दुनियाभर में मौजूद आर्थिक हितों का जिक्र किया और दावा किया कि इन हितों को नुकसान पहुंचाया जा सकता है. हालांकि, उन्होंने ये साफ नहीं किया कि किन आर्थिक ठिकानों की बात हो रही है या ईरान उन्हें किस तरह निशाना बना सकता है.

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