अपने पालतू जानवरों का मुंह बंद कराएं, वरना मजा चखाएंगे... आखिर ट्रंप पर क्यों भड़का ईरान
ईरान और इजरायल के बीच पिछले महीनों में कई बार सैन्य तनाव देखने को मिला है. मिसाइल हमलों, ड्रोन हमलों और एक-दूसरे पर आरोपों के बाद दोनों देशों के रिश्ते बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं.
ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने डोनाल्ड ट्रंप को चेतावनी दी है. (ANI)
- 17 जून को US और ईरान ने किए थे डील पर साइन
- ईरान की 5 शर्तें पूरी होने के बाद ही लागू होगी डील
- 60 दिनों के अंदर जंग खत्म करने के लिए बनेगा प्लान
- अमेरिका-ईरान डील से नाराज हैं इजरायली PM नेतन्याहू
ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव एक बार फिर तेज होता दिख रहा है. इस बार ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अमेरिका और इजरायल दोनों को निशाने पर लिया है.अराघची ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपने अधिकारियों को संभालने को कहा है. ईरानी विदेश मंत्री ने कहा, "ट्रंप तेल अवीव में अपने पालतू जानवरों को काबू में रखें, वरना ईरान खुद मजा चखाएगा."
यह बयान ऐसे समय आया है जब इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज़ (Israel Katz) ने ईरान के सुप्रीम लीडरशिप को लेकर सख्त चेतावनी दी थी. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा,"ट्रंप की जिम्मेदारी है कि वह तेल अवीव में अपने 'पालतू' को कंट्रोल करें. अगर वे अपने मालिक की बात नहीं मानते, तो ईरान उन्हें सबक सिखाएगा."
ईरान की सरकारी मीडिया इरना की रिपोर्ट के मुताबिक, विदेश मंत्री अराघची ने आगे कहा कि ईरान के लोगों और उसके नेतृत्व के खिलाफ किसी भी तरह की धमकी का जवाब तुरंत और पूरी ताकत के साथ दिया जाएगा. अराघची का यह बयान साफ संकेत देता है कि तेहरान अब सार्वजनिक रूप से इजरायल पर और अधिक आक्रामक भाषा का इस्तेमाल कर रहा है.
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इजरायल के रक्षा मंत्री ने क्या कहा था?
इससे पहले इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज़ ने ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई और इस्लामिक सत्ता को लेकर कड़ी चेतावनी दी थी. काट्ज़ ने कहा था कि अगर ईरान इजरायल के खिलाफ किसी भी तरह की आक्रामक कार्रवाई जारी रखता है, तो उसके गंभीर नतीजे होंगे. काट्ज़ के बयान के बाद दोनों देशों के बीच बयानबाजी और तेज हो गई है.
ट्रंप को बीच में क्यों घसीटा?
ईरान लंबे समय से यह आरोप लगाता रहा है कि अमेरिका इजरायल का सबसे बड़ा समर्थक है. अमेरिका अपने दोस्त इजरायल की सैन्य और कूटनीतिक मदद करता है. इसी कड़ी में अराघची ने ट्रंप के लिए कहा कि अगर अमेरिका वास्तव में क्षेत्र में तनाव कम करना चाहता है, तो उसे इजरायल पर कंट्रोल रखना होगा.
क्षेत्रीय तनाव फिर बढ़ने के संकेत
इस तरह की तीखी बयानबाजी मिडिल ईस्ट में पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा सकती है. अगर दोनों पक्षों की ओर से इसी तरह के बयान और जवाबी कदम जारी रहे, तो क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति और जटिल हो सकती है.
फिलहाल न तो अमेरिका और न ही इजरायल की ओर से अराघची के ताजा बयान पर आधिकारिक प्रतिक्रिया आई है. हालांकि, ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपने नेतृत्व या नागरिकों के खिलाफ किसी भी खतरे का मजबूत और तत्काल जवाब देगा.
ईरान की सलाह- होर्मुज पर किसी को दखल देने की जरूरत नहीं
इस बीच ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े मामलों में किसी भी विदेशी देश, यहां तक कि फ्रांस के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है. फ्रांस का कहना था कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका होनी चाहिए, ताकि जहाजों की आवाजाही सुरक्षित रहे.
ईरान और अमेरिका के बीच 17 जून को हुई थी डील
17 जून को अमेरिका और ईरान के बीच एक अंतरिम समझौता हुआ था. इसके तहत ईरान अपने एनरिच्ड यूरेनियम के स्टॉक को कम करेगा. बदले में अमेरिका ईरानी तेल निर्यात पर कुछ प्रतिबंधों में राहत देगा. वहीं, होर्मुज में जहाजों की आवाजाही सामान्य करने की कोशिश करेगा. ईरान और अमेरिका दोनों देशों को अंतिम समझौते के लिए 60 दिन का समय मिलेगा.
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