क्या पाकिस्तान का EO-2 सैटेलाइट है भारत के लिए नया खतरा? इस्लामाबाद को मिलेगा जमीन की रीयल टाइम तस्वीर

Pakistan: पाकिस्तान कह रहा है कि EO-2 सैटेलाइट से उसे जमीन की रीयल टाइम तस्वीर प्रदान करेगा. विशेषज्ञों के मुताबिक इससे भारत को सतर्क रहना चाहिए.

Published date india.com Published: February 13, 2026 1:31 PM IST
क्या पाकिस्तान का EO-2 सैटेलाइट है भारत के लिए नया खतरा? इस्लामाबाद को मिलेगा जमीन की रीयल टाइम तस्वीर
(photo credit AI, for representation only)

Pakistan:पाकिस्तान ने गुरुवार को अंतरिक्ष में एक बड़ी कामयाबी हासिल की है. चीन के यांगजियांग सीशोर लॉन्च सेंटर से EO-2सैटेलाइट लॉन्च हुआ. यह पाकिस्तान का दूसरा स्वदेशी सैटेलाइट है.

बता दें कि पिछले साल, पाकिस्तान ने उत्तरी चीन के जिउक्वान सैटेलाइट लॉन्च सेंटर से अपना पहला स्वदेशी इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल (EO-1) सैटेलाइट लॉन्च किया था.

किसने बनाई ये सैटेलाइट

पाकिस्तान के स्पेस एंड अपर एटमॉस्फियर रिसर्च कमीशन ( अंतरिक्ष और ऊपरी वायुमंडल अनुसंधान आयोग) की ओर से EO-2 सैटेलाइट को डेवलप किया गया है. इसका मकसद पाकिस्तान की अर्थ ऑब्जर्वेशन और हाई-रिजॉल्यूशन इमेजिंग क्षमताओं को काफी बढ़ाने के लिए डिजाइन किया गया है.

क्या होगा पाकिस्तान को फायदा

पाकिस्तान का दावा है कि EO-2 सैटेलाइट से उसे जमीन की रीयल टाइम तस्वीर प्रदान करेगा. सुपारको के अधिकारियों ने कहा कि सैटेलाइट पाकिस्तान की राष्ट्रीय विकास योजना, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, पर्यावरण की निगरानी और शहरी विस्तार में मदद करने के लिए जरूरी डेटा देगा. यह सटीक और समय पर सैटेलाइट तस्वीरें देकर शासन, आपदा प्रबंधन, जलवायु विश्लेषण और स्ट्रेटेजिक फैसले लेने को भी मजबूत करेगा.

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भारत को क्यों करनी चाहिए चिंता

पाकिस्तान EO-2 सैटेलाइट का इस्तेमाल भारत की जासूसी के लिए कर सकता है. इसमें जमीन से आ रही रीयल टाइम तस्वीरें उसकी काफी मदद कर सकती हैं. खासकर सेना, पेट्रोलिंग पर नजर रखने में.

क्या कह रहा पाकिस्तान

सुपारको के अधिकारियों ने इस लॉन्च को पाकिस्तान की स्पेस यात्रा में एक मील का पत्थर बताया, और कहा कि EO-2 का सफल स्वदेशी डेवलपमेंट देश की बढ़ती तकनीकी विशेषज्ञता और एडवांस्ड सैटेलाइट टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भरता को दिखाता है. प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान ने “एक और स्पेस मील का पत्थर” हासिल किया है. यह सफलता हमारे बढ़ते टेक्नोलॉजिकल फुटप्रिंट को दिखाती है और पाकिस्तान-चीन की हमेशा रहने वाली ऑल-वेदर स्ट्रेटेजिक कोऑपरेटिव पार्टनरशिप का एक और उदाहरण है जो अब स्पेस तक पहुंच रही है.

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