
Tanuja Joshi
हल्द्वानी से दिल्ली के बड़े न्यूजरूम तक... तनुजा जोशी, उत्तराखंड के शांत और खूबसूरत शहर हल्द्वानी से ताल्लुक रखती हैं. देहरादून के ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी ... और पढ़ें
Israel Action in Tehran: मिडिल ईस्ट में चल रहे इजरायल-ईरान युद्ध के बीच एक बड़ा सैन्य घटनाक्रम सामने आया है. इजरायली वायुसेना ने दावा किया है कि उसके एडवांस F-35 स्टेल्थ फाइटर जेट ने तेहरान के आसमान में ईरान के Yak-130 विमान को मार गिराया. इस घटना का एक वीडियो भी जारी किया गया है, जिसमें फाइटर जेट को निशाना बनाते हुए देखा जा सकता है.
इजरायली सेना के अनुसार ये घटना बुधवार (4 मार्च) को हुई. वीडियो करीब 16 सेकंड का है और इसे इजरायली वायुसेना के ऑफिशियल सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर किया गया है. वीडियो में काले-सफेद रंग की एरियल फुटेज दिखाई देती है, जिसमें टारगेट पर हमला करते हुए F-35 ‘Adir’ जेट नजर आता है.
बताया जा रहा है कि ये पहली बार है जब इजरायल के F-35 विमान ने किसी पायलट वाले विमान को हवा में मार गिराया है. इजरायल के सैन्य अधिकारियों ने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है. वीडियो में पायलट की आवाज भी सुनाई देती है, जिसमें वह कहता है कि लक्ष्य को सफलतापूर्वक निशाना बनाया गया है और मिशन जारी रहेगा.
“ביצעתי, המטרה נפלה, נמשיך לתקיפה”: תיעוד ראשון ממטוס ה״אדיר״ (F-35I) מפיל מטוס קרב איראני (YAK-130) מעל שמי טהרן.
חיל-האוויר ממשיך לתקוף עשרות תשתיות של משטר הטרור האיראני וסולל את הדרך ליצירת עליונות אווירית בשמי טהרן. pic.twitter.com/RGUX4x1bFK
— Israeli Air Force (@IAFsite) March 5, 2026
इजरायली वायुसेना प्रमुख मेजर जनरल टोमर बार ने भी इस कार्रवाई की सराहना की. उन्होंने पायलट से बातचीत के दौरान कहा कि तेहरान के आसमान में यह ऐतिहासिक सफलता इजरायली वायुसेना की ताकत और सैनिकों के संकल्प को दिखाती है. उन्होंने पायलट को सुरक्षित लौटने की शुभकामनाएं दीं और कहा कि अगला मिशन भी जल्द शुरू होगा.
यह घटना इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि करीब 40 साल बाद इजरायली वायुसेना ने किसी पायलट वाले दुश्मन विमान के साथ हवा में सीधी लड़ाई लड़ी है. इस बीच इजरायल ने दावा किया है कि उसने ईरान के कई सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया है. इजरायली सेना के अनुसार तेहरान में कई सुरक्षा कमांड सेंटर और मिसाइल स्टोरेज साइट्स पर हमले किए गए. इसके अलावा पश्चिमी ईरान के इस्फहान इलाके में भी मिसाइल सुविधा पर हमला किया गया.
इजरायली सेना का कहना है कि इन ठिकानों का इस्तेमाल बैलिस्टिक मिसाइलों को रखने और इजरायल पर हमले की तैयारी के लिए किया जा रहा था. इसलिए इन्हें निशाना बनाना जरूरी था. दरअसल, मिडिल ईस्ट में युद्ध की शुरुआत उस समय हुई जब इजरायल और अमेरिका ने ईरान पर संयुक्त हमला किया. इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) की मौत की खबर भी सामने आई थी. इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल और खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए.
हालात इतने बिगड़ गए कि यह संघर्ष अब पूरे क्षेत्र में फैलता हुआ दिखाई दे रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने श्रीलंका के तट के पास एक ईरानी युद्धपोत (Iranian Warship) को भी निशाना बनाया, जिसमें कई लोगों की मौत हुई. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ये संघर्ष इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक सुरक्षा और ऊर्जा बाजार पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है.
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