
Anjali Karmakar
अंजलि कर्मकार 12 साल से जर्नलिज्म की फील्ड में एक्टिव हैं. उन्होंने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन किया है. यहीं से मास कॉम में मास्टर्स की डिग्री ली ... और पढ़ें
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच 40 दिन से चली जंग पर 2 हफ्ते का ब्रेक लगा है. 8 अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच 2 हफ्ते के सीजफायर का ऐलान हुआ था. पाकिस्तान की मदद से ये सीजफायर हुआ. अब आगे समझौते के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में मीटिंग होने जा रही है. अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस सीजफायर डील की मीटिंग के लिए इस्लामाबाद रवाना हो चुके हैं. पाकिस्तान बेसब्री से मीटिंग का इंतजार कर रहा है. इस बीच अमेरिका के साथ प्रस्तावित बातचीत से पहले ईरान ने सख्त चेतावनी दी है. ईरान की सशस्त्र सेनाओं ने कहा है कि उनकी उंगली ट्रिगर पर है और वे किसी भी स्थिति के लिए तैयार हैं. इसपर डोनाल्ड ट्रंप का बयान भी आ गया है. ट्रंप ने CNN के साथ एक इंटरव्यू में कहा, “अगर हमने ईरान को जिंदा रखा है, तो सिर्फ और सिर्फ बातचीत के लिए. डील तो होकर रहेगी.”
ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबाफ ने कहा है कि जब तक लेबनान में सीजफायर लागू नहीं होता, तब तक बातचीत शुरू नहीं की जाएगी. गालिबाफ ने कहा कि लेबनान में युद्धविराम बातचीत की प्रमुख शर्त है. इसके साथ ही उन्होंने ईरान के फ्रीज किए गए फंड को जारी करने की भी मांग रखी. यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की तैयारी चल रही है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं.
ईरान बोला- हमारी उंगली ट्रिगर पर है
ईरान के सैन्य अधिकारियों के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल के बार-बार भरोसा तोड़े जाने के कारण यह सतर्कता बरती जा रही है. ईरान ने यह भी साफ किया है कि वह होर्मुज स्ट्रेट पर अपना नियंत्रण नहीं छोड़ेगा, जो ग्लोबल ऑयल सप्लाई के लिए बेहद अहम रूट है. इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच अहम बैठक होने वाली है, लेकिन बैठक से पहले ही अनिश्चितता बनी हुई है. ईरानी डेलिगेशन अब तक पाकिस्तान नहीं पहुंचा है.
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ईरान-अमेरिका सीजफायर डील में शामिल होने वाले नेता?
5 मुद्दों पर हो सकती है बातचीत?
होर्मुज से गुजरने की फीस अपनी करेंसी रियाल में वसूलेगा ईरान
ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों के लिए एक अहम प्रस्ताव तैयार किया है. इसके तहत ट्रांजिट फीस अब उसकी अपनी करेंसी रियाल में वसूली जा सकती है. ईरान की संसद की नेशनल सिक्योरिटी कमिशन के प्रमुख के मुताबिक, यह प्रस्ताव पेमेंट सिस्टम में बदलाव लाने के लिए तैयार किया गया है. यह कदम डॉलर पर निर्भरता कम करने और अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.
लेबनान में सीजफायर की मांग क्यों कर रहा है ईरान?
असल में ईरान, लेबनान के आतंकी संगठन हिजबुल्लाह को फंडिंग करता है. लेबनान में हिजबुल्लाह ईरान समर्थित और हथियारों से लैस सबसे शक्तिशाली मिलिशिया है. अगर लेबनान में इजरायल के हमले जारी रहे, तो जाहिर तौर पर हिजबुल्लाह कमजोर होगा. ऐसे में ईरान का क्षेत्रीय नेटवर्क टूट सकता है. इसलिए ईरान, लेबनान को सेफ करने की मांग कर रहा है.
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