हमारी उंगली ट्रिगर पर... सीजफायर डील से पहले ईरान की चेतावनी, ट्रंप बोले- सिर्फ बातचीत के लिए आपको रखा जिंदा

ईरान लेबनान में जारी इजरायली हमलों से नाराज है. इसी वजह से उसने बातचीत को लेकर सख्त रुख अपनाया है. ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबाफ ने कहा है कि जब तक लेबनान में सीजफायर लागू नहीं होता, तब तक बातचीत शुरू नहीं की जाएगी.

Published date india.com Updated: April 10, 2026 10:30 PM IST
हमारी उंगली ट्रिगर पर... सीजफायर डील से पहले ईरान की चेतावनी, ट्रंप बोले- सिर्फ बातचीत के लिए आपको रखा जिंदा
ईरान और अमेरिका के बीच 2 हफ्ते का सीजफायर है.

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच 40 दिन से चली जंग पर 2 हफ्ते का ब्रेक लगा है. 8 अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच 2 हफ्ते के सीजफायर का ऐलान हुआ था. पाकिस्तान की मदद से ये सीजफायर हुआ. अब आगे समझौते के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में मीटिंग होने जा रही है. अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस सीजफायर डील की मीटिंग के लिए इस्लामाबाद रवाना हो चुके हैं. पाकिस्तान बेसब्री से मीटिंग का इंतजार कर रहा है. इस बीच अमेरिका के साथ प्रस्तावित बातचीत से पहले ईरान ने सख्त चेतावनी दी है. ईरान की सशस्त्र सेनाओं ने कहा है कि उनकी उंगली ट्रिगर पर है और वे किसी भी स्थिति के लिए तैयार हैं. इसपर डोनाल्ड ट्रंप का बयान भी आ गया है. ट्रंप ने CNN के साथ एक इंटरव्यू में कहा, “अगर हमने ईरान को जिंदा रखा है, तो सिर्फ और सिर्फ बातचीत के लिए. डील तो होकर रहेगी.”

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ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबाफ ने कहा है कि जब तक लेबनान में सीजफायर लागू नहीं होता, तब तक बातचीत शुरू नहीं की जाएगी. गालिबाफ ने कहा कि लेबनान में युद्धविराम बातचीत की प्रमुख शर्त है. इसके साथ ही उन्होंने ईरान के फ्रीज किए गए फंड को जारी करने की भी मांग रखी. यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की तैयारी चल रही है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं.

ईरान बोला- हमारी उंगली ट्रिगर पर है
ईरान के सैन्य अधिकारियों के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल के बार-बार भरोसा तोड़े जाने के कारण यह सतर्कता बरती जा रही है. ईरान ने यह भी साफ किया है कि वह होर्मुज स्ट्रेट पर अपना नियंत्रण नहीं छोड़ेगा, जो ग्लोबल ऑयल सप्लाई के लिए बेहद अहम रूट है. इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच अहम बैठक होने वाली है, लेकिन बैठक से पहले ही अनिश्चितता बनी हुई है. ईरानी डेलिगेशन अब तक पाकिस्तान नहीं पहुंचा है.

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ईरान-अमेरिका सीजफायर डील में शामिल होने वाले नेता?

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  • अमेरिका की तरफ से इस बैठक में जेडी वेंस (उपराष्ट्रपति), स्टीव विटकॉफ(स्पेशल प्रतिनिधि), जेरेड कुशनर (सीनियर सलाहकार) और ब्रैड कूपर (सैन्य अधिकारी) शामिल हो रहे हैं.
  • ईरान की तरफ से मोहम्मद बघेर गालिबफ (ईरानी संसद के स्पीकर), अब्बास अराघची (विदेश मंत्री) और मजीद तख्त रवांची (उप-विदेश मंत्री) बातचीत के टेबल पर मौजूद रहेंगे.
  • इंटरमीडिएटर बने पाकिस्तान की तरफ से शहबाज शरीफ (पाकिस्तान PM), आसिम मुनीर (सेना प्रमुख), इशाक डार (विदेश मंत्री) और आसिम मलिक (राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार) हिस्सा ले रहे हैं.

5 मुद्दों पर हो सकती है बातचीत?

  • ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम बातचीत का मुख्य मुद्दा होगा. अमेरिका का कहना है कि ईरान में कोई यूरेनियम एनरिचमेंट नहीं होगा. यानी न्यूक्लियर प्रोग्राम को बढ़ावा नहीं मिलेगा. अमेरिका की ये भी शर्त है कि ईरान को अपना सारा हाई-लीवल इनरिच्ड यूरेनियम बाहर करना होगा. न्यूक्लियर फैसिलिटीज भी बंद करने पड़ सकते हैं.
  • दूसरा मुद्दा होर्मुज स्ट्रेट का है. ये 28 फरवरी से दुनिया के लिए चोक प्वॉइंट बना हुआ है. इससे एनर्जी क्राइसिस हो गया है. ईरान ने इसपर फुल कंट्रोल बनाए रखने की शर्त रखी है. वह यहां से जहाजों को रास्ता देने के एवज में टोल (फीस) वसूलने की बात भी कर रहा है. लेकिन, अमेरिका चाहता है कि ये रास्ता बिना की टोल या शर्त के पूरी तरह खुला रहे.
  • अमेरिका और ईरान के बीच बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम का मुद्दा भी रहेगा. अमेरिका ईरान की लंबी दूरी की मिसाइलों पर रोक लगाना चाहता है. ईरान इसके लिए तैयार नहीं है.
  • ईरान ये भी चाहता है कि जंग पूरी तरह से खत्म हो और उसे नुकसान का पूरा हर्जाना मिले. अमेरिका को ये नामंजूर है. इसलिए इस मुद्दे पर विवाद हो सकता है.
  • इसके अलावा ईरान ये भी चाहता है कि सभी अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध तुरंत हटा दिए जाएं, फ्रोजन एसेट्स वापस मिले.

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होर्मुज से गुजरने की फीस अपनी करेंसी रियाल में वसूलेगा ईरान
ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों के लिए एक अहम प्रस्ताव तैयार किया है. इसके तहत ट्रांजिट फीस अब उसकी अपनी करेंसी रियाल में वसूली जा सकती है. ईरान की संसद की नेशनल सिक्योरिटी कमिशन के प्रमुख के मुताबिक, यह प्रस्ताव पेमेंट सिस्टम में बदलाव लाने के लिए तैयार किया गया है. यह कदम डॉलर पर निर्भरता कम करने और अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.

लेबनान में सीजफायर की मांग क्यों कर रहा है ईरान?
असल में ईरान, लेबनान के आतंकी संगठन हिजबुल्लाह को फंडिंग करता है. लेबनान में हिजबुल्लाह ईरान समर्थित और हथियारों से लैस सबसे शक्तिशाली मिलिशिया है. अगर लेबनान में इजरायल के हमले जारी रहे, तो जाहिर तौर पर हिजबुल्लाह कमजोर होगा. ऐसे में ईरान का क्षेत्रीय नेटवर्क टूट सकता है. इसलिए ईरान, लेबनान को सेफ करने की मांग कर रहा है.

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