न्यूक्लियर बम से भी बड़ा ईरान का वो हथियार, जिससे मिनटों में पूरी दुनिया की इकोनॉमी का पहिया कर सकता है जाम

Written By: Anjali Karmakar Updated by: Anjali Karmakar
Updated Date:April 21, 2026 8:44 PM IST

ईरान का न्यूक्लियर हथियार भले कागज पर हो या न हो, लेकिन तेल का नियंत्रण ही उसकी असली ताकत है. अगर होर्मुज पर संकट गहराता है, तो इसका असर सीधा आपकी जेब, आपकी थाली और पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा.

अमेरिका और ईरान के बीच फिलहाल सीजफायर लागू तो है, लेकिन तनाव हर दिन बढ़ता जा रहा है. इस तनाव के बीच एक बात साफ होती जा रही है कि ये जंग सिर्फ मिसाइलों और बमों की नहीं, बल्कि तेल और समुद्री रास्तों की जंग है. ईरान के पास भले ही न्यूक्लियर हथियार न हो. उसके पास ऐसा 'हथियार' जरूर है जो पूरी दुनिया की इकोनॉमी को हिला सकता है. इस हथियार का नाम है होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz). यह वही रास्ता है, जहां से दुनिया का लगभग 20% तेल गुजरता है. अगर यह रास्ता बंद होता है, तो इसका असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा. इसकी वजह से पूरी दुनिया में फ्यूल क्राइसिस खड़ा हो जाएगा.

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ईरान की रणनीति

हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ सीधे बड़े हमलों की बजाय एक अलग रणनीति अपनाई है. वह छोटे-छोटे हमलों, ड्रोन और वॉरशिप के जरिए इस समुद्री रास्ते को असुरक्षित बना रहा है. इससे ईरान का मकसद साफ है. अगर तेल की सप्लाई रुकती है, तो अमेरिका और उसके सहयोगी देशों पर दबाव बढ़ेगा. ईरान बखूबी जानता है कि युद्ध में सीधी टक्कर में वह कमजोर पड़ सकता है. अगर वह ग्लोबल इकोनॉमी को चोट पहुंचाए, तो वह अपनी शर्तों पर बातचीत कर सकता है.

दुनिया में आ सकता है महंगाई का तूफान

जैसे ही होर्मुज में तनाव बढ़ता है, तेल की कीमतें आसमान छूने लगती हैं. 2026 के संकट में तेल की कीमतें 100 डॉलर से ऊपर चली गईं. यह हालात 1970 के बाद सबसे बड़े ऊर्जा संकट जैसे बताए जा रहे हैं. तेल महंगा होते ही असर हर जगह दिखता है. सबसे पहले पेट्रोल-डीजल महंगा हो जाता है. ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ जाता है. खाने-पीने की चीजें महंगी होने लगती हैं. उद्योगों की लागत बढ़ जाती है. यानी आम आदमी की जेब और थाली दोनों पर सीधा असर पड़ता है.

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जमीन नहीं समंदर है युद्ध का असली मैदान

मिडिल ईस्ट में चल रही इस जंग का सबसे खतरनाक पहलू यह है कि यह जमीन पर नहीं, बल्कि समुद्र में लड़ी जा रही है. अमेरिका ने ईरान के खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी (Naval Blockade) सीजफायर के बाद भी जारी रखी है. ईरान जवाब में जहाजों को रोकने और हमले करने की धमकी दे रहा है. कई बार ईरान ने इस रास्ते को बंद भी कर दिया, जिससे दुनिया भर में तेल की सप्लाई प्रभावित हुई. होर्मुज अभी भी बंद है.

शांति की कोशिश, लेकिन भरोसा नहीं

जंग रोकने और डील के लिए अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत भी चल रही है, लेकिन दोनों के बीच भरोसे की कमी साफ दिखती है. अमेरिका चाहता है कि ईरान अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम खत्म करे. जबकि, ईरान ऐसा नहीं चाहता. ईरान चाहता है कि उस पर लगे प्रतिबंध हटाए जाएं. फ्रिज किए गए अकाउंट को अनफ्रीज किया जाए. इस बीच, ईरान के पास सबसे बड़ा दबाव का हथियार वही है—होर्मुज. ईरान ने साफ संकेत दिया है कि अगर दबाव बढ़ा, तो वह इस रास्ते को पूरी तरह बंद कर सकता है. ऐसे में एक्सपर्ट मानते हैं कि अगर यह तनाव बढ़ता है, तो ग्लोबल मंदी आ सकती है. सप्लाई चेन टूट सकती है. और तो और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर ब्रेक तक लग सकता है.

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