इजरायल ने चंद घंटों में तोड़ दिया सीजफायर, लेबनान पर बरसाए तोप के गोले, आखिर क्या चाहते हैं नेतन्याहू?
बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा, इजरायल गाजा और लेबनान में अपने सैन्य अभियान जारी रखेगा. इजरायली सेना ने गाजा में हमास पर दबाव और बढ़ा दिया है. अब पट्टी के 60% से ज्यादा हिस्से पर उसका नियंत्रण है.
इजरायल ने 2 मार्च से लेबनान के खिलाफ हमले शुरू किए थे. अब तक मरने वालों की संख्या 3,980 पहुंच गई है. (ANI)
- 1982 से शुरू हुई इजरायल-हिजबुल्लाह की दुश्मनी.
- लेबनान सीमा पर लगातार बढ़ता सैन्य तनाव.
- इजरायल पर रॉकेट हमले करता है हिजबुल्लाह.
- ईरान के समर्थन से दोनों के बीच बढ़ता है संघर्ष.
इजरायल ने लेबनान के साथ सीजफायर चंद घंटों में ही तोड़ दिया है. इजरायली सेना ने लेबनान पर शनिवार (20 जून 2026) को ड्रोन, मिसाइल से हमले किए हैं और तोप के गोले बरसाए हैं. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इन हमलों में अब तक 16 लोगों की जान जा चुकी है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल और लेबनान के बीच सीजफायर स्थानीय समयानुसार शुक्रवार (19 जून 2026) की शाम 4 बजे लागू हुआ था. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सीजफायर का क्रेडिट खुद को और कतर को दिया था.
इससे पहले अप्रैल में इजरायल और लेबनान के बीच 10 दिनों का सीजफायर हुआ था. डोनाल्ड ट्रंप ने ये सीजफायर करवाने का दावा किया था. तब भी इजरायल ने सीजफायर तोड़कर हिजबुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाया था. लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, दक्षिणी लेबनान और बेका घाटी में शुक्रवार देर (19 जून) रात से हुए इजरायली हवाई हमलों में 47 लोग मारे गए और 97 घायल हुए हैं. 2 मार्च से अब तक मरने वालों की संख्या 3,980 पहुंच गई है.
नेतन्याहू बोले- अपनी सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा इजरायल
अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम समझौते को लेकर अमेरिका और इजरायल के बीच मतभेद सामने आ रहे हैं. इस बीच इजरायली PM बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि इजरायल अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा, लेकिन अमेरिका के साथ करीबी रिश्ते भी बनाए रखेगा.
इजरायल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा, "इजरायल गाजा और लेबनान में अपने सैन्य अभियान जारी रखेगा. इजरायली सेना ने गाजा में हमास पर दबाव और बढ़ा दिया है. अब पट्टी के 60% से ज्यादा हिस्से पर उसका नियंत्रण है."
इजरायल और लेबनान में क्या है दुश्मनी?
- असल में इजरायल की सीधी दुश्मनी लेबनान से नहीं है, बल्कि लेबनान के आतंकी संगठन हिजबुल्लाह से है. ईरान के साथ जंग में हिजबुल्लाह इजरायल पर हमले कर रहा है.
- इजरायल और ईरान के बीच करीब 1000 किलोमीटर की दूरी है. हिज्बुल्लाह सीधे इजरायल की उत्तरी सीमा यानी लेबनान पर मौजूद है.
- अगर ईरान हमला करता है, तो इजरायल के पास तैयारी के लिए कुछ समय मिल सकता है, लेकिन हिज्बुल्लाह के रॉकेट या ड्रोन हमले के मामले में इजरायल को संभलने का कम वक्त मिलता है. इस वजह से इजरायल को लगता है कि उत्तरी इजरायल के शहर और बस्तियां हमेशा तत्काल खतरे में रहती हैं.
- हिज्बुल्लाह को अक्सर ईरान की फर्स्ट लाइन ऑफ डिफेंस माना जाता है. अगर इजरायल कभी ईरान के न्यूक्लियर वॉरहेड पर हमला करता है, तो हिज्बुल्लाह को जवाबी हमले के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.
- एक तरह से हिज्बुल्लाह ईरान के लिए बैक अप प्लान है. इसलिए ईरान को हर वक्त दो मोर्चों (ईरान और हिजबुल्लाह) से खतरा बना रहता है.
ईरान और हिजबुल्लाह का कनेक्शन क्या है?
हिजबुल्लाह (Hezbollah) लेबनान का एक शिया राजनीतिक और सैन्य संगठन है, जिसकी स्थापना 1982 में हुई थी. इसे ईरान का सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रीय सहयोगी (Proxy Group) माना जाता है. ईरान ने इसकी स्थापना, प्रशिक्षण और विस्तार में बड़ी भूमिका निभाई है.
कैसे जुड़ा है ईरान?
1979 की ईरानी क्रांति के बाद ईरान ने मिडिल ईस्ट में अपना प्रभाव बढ़ाने की रणनीति अपनाई. इसी दौरान लेबनान में शिया लड़ाकों को संगठित कर हिजबुल्लाह खड़ा किया गया. ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने संगठन को मिलिट्री ट्रेनिंग और हथियार उपलब्ध कराए.
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ईरान हिजबुल्लाह की मदद कैसे करता है?
- अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय आकलनों के मुताबिक, ईरान हर साल हिजबुल्लाह को सैकड़ों मिलियन डॉलर की मदद देता रहा है. कुछ रिपोर्टों में यह राशि 700–800 मिलियन डॉलर सालाना तक बताई गई है.
- ईरान हिजबुल्लाह को रॉकेट, मिसाइल, ड्रोन और अन्य आधुनिक हथियार उपलब्ध कराता है. अनुमान है कि 2006 में हिजबुल्लाह के पास लगभग 12,000 रॉकेट थे, जो बाद में बढ़कर 1.5 लाख से अधिक हो गए.
- IRGC की कुद्स फोर्स (Quds Force) हिजबुल्लाह के लड़ाकों को ट्रेनिंग देती है. IRGC की ओर से इन्हें रणनीतिक सहयोग भी मिलता है.
ईरान को इससे क्या फायदा होता है?
हिजबुल्लाह को ईरान की 'Axis of Resistance' रणनीति का अहम हिस्सा माना जाता है. इसके जरिए ईरान इजरायल पर दबाव बनाए रखता है. लेबनान और पूरे लेवांत क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाता है. अमेरिकी और इजरायली हितों को चुनौती देता है. इसलिए इजरायल ईरान के साथ-साथ लेबनान के हिजबुल्लाह संगठन को अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानता है. हिजबुल्लाह के साथ ही गाजा का हमास संगठन भी 'Axis of Resistance' में आता है. ईरान इसे भी फंडिंग करता है. लेकिन, 2023 से चली आ रही इजरायल-गाजा जंग में हमास की ताकत कम हो गई है.
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