येरूशलम: इजराइल में इस हफ्ते हुए आम चुनाव के परिणामों के बाद गतिरोध शुरू हो गया है, क्योंकि देश में सत्तारूढ़ प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की दक्षिणपंथी लिकुड पार्टी देश में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी है, किंतु प्रधानमंत्री पद पर बने रहने के लिए उन्हें लंबा संघर्ष करना होगा.

देश में मंगलवार को हुए आम चुनावों के लगभग पूर्ण नतीजे आने के बाद पूर्व सैन्य प्रमुख बेनी गैंट्ज की मध्यमार्गी ब्लू एंड व्हाइट पार्टी को 120 सीटों वाले सदन में 33 सीटें मिली हैं. नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को इस चुनाव में 31 सीटें मिली हैं. लेकिन बहुमत गठबंधन बनाने के लिए दोनों के पास कोई स्पष्ट रास्ता दिखाई नहीं पड़ रहा है. प्रधानमंत्री ने गुरूवार को स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि उनकी उम्मीदों के विपरीत इन नतीजों से वह दक्षिणपंथी गठबंधन बनाने में असमर्थ हैं और उन्होंने गैंट्ज से अपील की कि वह उनके साथ मिल कर एकीकृत सरकार का गठन करें.

गैंट्ज ने इस पेशकश का यह कहते हुए उत्तर दिया कि एकीकृत सरकार में वह प्रधानमंत्री होंगे, क्योंकि ब्लू एंड व्हाइट देश में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. इस गतिरोध से हालांकि देश में एक अन्य चुनाव होने की संभावना बढ़ गई है. अगर ऐसा होता है तो अप्रैल के बाद एक साल के भीतर यह तीसरा मौका होगा जब चुनाव कराये जाएंगे. अप्रैल में कराए गए चुनाव में भी किसी दल को जरूरी बहुमत नहीं मिल पाया था.

इजरायल के राष्ट्रपति रियूवेन रिवलिन ने रविवार को राजनीतिक दलों के साथ विचार-विमर्श शुरू करने की योजना बनाई है ताकि यह तय किया जा सके कि सरकार बनाने के लिए किसे चुना जाए. इनमें केवल उन्हीं दलों के साथ चर्चा की जाएगी, जिन्हें संसदीय चुनाव में वोट मिले हैं.

इजराइल की निर्वाचन समिति ने बताया कि अंतिम नजीते बुधवार को घोषित किए जाएंगे और उम्मीद है कि इसमें कुछ बदलाव हो सकते हैं. समिति ने कहा कि इस परिणाम में 14 मतदान केंद्रों के नतीजे शामिल नहीं है जहां सत्यापन अब भी जारी है.

इजराइल के मीडिया के अनुसार 99 फीसदी मतों की गिनती हो चुकी है. इन चुनावों में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी अरब ज्वाइंट लिस्ट गठबंधन है जिसने 13 सीटें जीती हैं. इस बात की प्रबल संभावना है कि अगर लिकुड पार्टी ब्लू एंड व्हाइट के साथ मिल कर देश में एकीकृत सरकार बनाती है तो 13 सीटों वाले गठबंधन के नेता आयमान ओदेह देश के पहले अरब नेता प्रतिपक्ष बने.