मिडिल ईस्ट तनाव पर World Bank की चेतावनी, कहा - 'और बुरा होना बाकी...', किस बात के दिए संकेत

Written By: Gargi Santosh Updated by: Gargi Santosh
Updated Date:April 11, 2026 11:26 PM IST

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच तेल की कीमतें 100 डॉलर के करीब पहुंच गई हैं. इस बीच, वर्ल्ड बैंक ने भी चेतावनी दी है. चलिए आपको बताते हैं वार्निंग से विश्‍व बैंक किस खतरे का संकेत दे रहा है.

अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन गई है. इस युद्ध का सबसे ज्यादा असर तेल की कीमतों पर देखने को मिला, जो 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच चुकी हैं. इसी के साथ दुनियाभर के शेयर बाजारों में भी गिरावट देखी गई. अब विश्‍व बैंक (World Bank) ने मिडिल ईस्ट तनाव को लेकर गंभीर चेतावनी दी है.

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वर्ल्ड बैंक ने कहा - अभी और बिगड़ सकते हैं हालात

वर्ल्ड बैंक के प्रमुख अजयपाल सिंह बंगा का कहना है कि जो असर अभी दिख रहा है, वह सिर्फ शुरुआत है. असली चुनौती तो युद्ध खत्म होने के बाद सामने आएगी. उन्होंने कहा कि अगर तुरंत युद्धविराम भी हो जाए, तब भी अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाला असर लंबे समय तक बना रहेगा. यानी हालात जल्दी सामान्य होने वाले नहीं हैं और दुनिया को इसके लिए तैयार रहना होगा.

जंग से ग्लोबल ग्रोथ पर पड़ रहा असर

रिपोर्ट के मुताबिक, अगर युद्धविराम कायम भी रहता है तो भी वैश्विक विकास दर में 0.3 से 0.4 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है. लेकिन हालात फिर से बिगड़ते हैं और जंग जारी रहती है, तो यह गिरावट 1% तक पहुंच सकती है. इसका असर सिर्फ एक देश पर नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के व्यापार, ऊर्जा बाजार और फाइनेंशियल सिस्टम पर पड़ेगा. आसान भाषा में समझें, तो इससे दुनिया की आर्थिक रफ्तार धीमी हो सकती है और कई देशों को मंदी जैसे हालात का सामना करना पड़ सकता है.

आम लोगों पर मंडरता महंगाई का खतरा

इस पूरे संकट का सबसे बड़ा असर महंगाई पर पड़ सकता है. अनुमान है कि अगर हालात ऐसे ही रहे, तो ग्लोबल महंगाई 200 से 300 बेसिस पॉइंट तक बढ़ सकती है. वहीं अगर संघर्ष लंबा खिंचता है, तो इसमें और बढ़ोतरी हो सकती है. खासकर विकासशील देशों के लिए स्थिति ज्यादा गंभीर हो सकती है, जहां महंगाई 6.7% तक पहुंचने का खतरा है. इसका मतलब हुआ कि खाने-पीने से लेकर रोजमर्रा की चीजें महंगी हो जाएंगी और आम आदमी का बजट बिगड़ सकता है.

जंग का समाधान क्या है?

वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के संकट से बचने के लिए देशों को अपनी ऊर्जा नीति में बदलाव करना होगा. अजयपाल बंगा ने भी कहा कि सिर्फ पारंपरिक ईंधन पर निर्भर रहना अब खतरनाक हो सकता है. इसके बजाय देशों को सौर, पवन, जल और परमाणु ऊर्जा जैसे विकल्पों पर ध्यान देना चाहिए. उन्होंने नाइजीरिया का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे वहां रिफाइनरी प्रोजेक्ट से ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हुई है. वर्ल्ड बैंक प्रमुख का कहना, अगर देशों ने समय रहते कदम नहीं उठाए, तो भविष्य में आर्थिक और पर्यावरणीय दोनों तरह के खतरे और बढ़ेंगे.

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