यरूशलम: इजरायली विशेषज्ञों का मानना है कि फिलिस्तीन के प्रति अपना पारंपरिक समर्थन प्रदर्शित करना भारत की रणनीतिक जरूरत है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रामल्ला यात्रा भारत-इजरायल के मजबूत होते रिश्तों के बीच फिलिस्तीनियों को ‘सहज करने वाला पुरस्कार’ है. Also Read - कोरोना से लड़ने में PM मोदी की अपील को मंत्र बनाएं देश के लोग: अमित शाह

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मोदी फिलिस्तीन की यात्रा पर गए पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से यरूशलम को इजरायल की राजधानी घोषित करने के बाद क्षेत्र में पैदा हुए तनाव के बीच मोदी की यात्रा हो रही है. भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर फिलिस्तीन के पक्ष में लगातार वोट किया है, जिससे रणनीतिक साझेदार इजरायल अक्सर चिंतित रहता है. Also Read - PM Narendra Modi Address to Nation Full Speech: कोरोना और नवरात्रि, ईद, छठ से लेकर कबीर के दोहा तक, पढ़ें पीएम मोदी के संबोधन की 10 बड़ी बातें

नई दिल्ली और वॉशिंगटन में एक पूर्व इजरायली प्रवक्ता लियोर वाइनट्रॉब ने कहा, ‘मेरा मानना है कि फिलिस्तीनी समझते हैं कि पिछले कुछ साल में इजरायल और भारत के संबंध मजबूत होने के बाद यह यात्रा सहज करने वाला एक पुरस्कार है.’लियोर ने कहा, ‘फिलिस्तीनी प्राधिकरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा का कूटनीतिक महत्व होगा. एक तरफ भारतीयों के लिए यह दिखाना जरूरी है कि बात जब इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष की हो तो उन्होंने अपनी परंपरागत स्थिति की अनदेखी नहीं की है. दूसरी ओर प्रधानमंत्री मोदी और बेंजामिन नेतन्याहू के करीबी संबंध दोनों पक्षों के बीच बातचीत फिर से शुरू कराने में मदद कर सकते हैं.’ इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कुछ हफ्ते पहले भारत की यात्रा की थी.

इजरायल के वरिष्ठ सूत्रों ने पुष्टि की कि इजरायली सरकार को नेतन्याहू की भारत यात्रा से बहुत पहले मोदी की फिलिस्तीन यात्रा की जानकारी थी. सूत्र ने कहा, ‘हमें शिकायत की कोई वजह नजर नहीं आती. हमारे रिश्ते इतने परिपक्व हो चुके हैं कि हम भारत की जरूरतें समझ सकते हैं.’ तेल अवीव यूनिवर्सिटी में व्याख्याता गेनेडी श्लॉम्पर मोदी की यात्रा को अरब जगत के साथ भारत के संवाद के तौर पर देखते हैं.