टोक्यो: चीनी सैनिकों द्वारा वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास लद्दाख की गलवान घाटी में भारतीय जवानों पर किए गए हिंसक हमले के एक सप्ताह बाद, जापान ने एक द्वीप श्रंखला के पूर्ण एकीकरण की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसपर चीन की लंबे समय से नजर रही है. ओकिनावा प्रान्त में इशिगाकी नगर परिषद ने एक विधेयक को मंजूरी दे दी है, जो टोक्यो के दक्षिण-पश्चिम में 1,931 किलोमीटर दूर सेनकाकस नामक निर्जन द्वीप समूह पर जापान के नियंत्रण को मजबूत करता है. Also Read - अब अमेरिका से भिड़ा चीन, बोला- एक हजार साल से दक्षिण चीन सागर हमारा है

हालांकि चीन इन द्वीप समूह को दियाओयुस नाम से पुकारता है, जिन पर 1972 से जापान का नियंत्रण है और उन्हें जापान द्वारा ही प्रशासित किया जा रहा है, लेकिन उनकी कानूनी स्थिति अब तक कुछ विवादित रही है. Also Read - देश में कोरोना के मामले 9 लाख के पार, एक दिन में आए 28,498 नए केस

नगर परिषद द्वारा विधेयक पारित किए जाने से पहले, बीजिंग ने द्वीप श्रंखला की यथास्थिति में किसी भी बदलाव के खिलाफ टोक्यो को चेतावनी दी थी. Also Read - पूर्वी लद्दाख विवाद: भारत-चीन के आर्मी कमांडरों के बीच आज चुशुल में हाईलेविल मीटिंग

चीन के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि द्वीप समूह अंतर्निहित क्षेत्र हैं. बीजिंग ने जापान से ‘चार-सिद्धांत सहमति’ की भावना का पालन करने, दियाओयुस द्वीप मुद्दे पर नए घटनाक्रम से बचने और पूर्वी चीन सागर की स्थिति की स्थिरता को बनाए रखने के लिए व्यावहारिक कार्रवाई करने का आग्रह किया है.

हालांकि जापान में नगर परिषद ने कहा कि विधेयक प्रशासनिक प्रक्रियाओं की दक्षता में सुधार करने के लिए आवश्यक है.

अप्रैल के बाद से चीनी जहाजों को जापानी तट रक्षक द्वारा सेनकाकस के करीब पानी में देखा गया था. चीनी जहाजों की संख्या पिछले कुछ हफ्तों में बढ़ी है, जिनमें से चार जहाज तो उस दिन भी देखे गए थे, जब क्षेत्र में नगर परिषद द्वारा बिल पारित किया गया था.

जापान के कैबिनेट सचिव ने पिछले हफ्ते दोहराया कि सेनकाकस टोक्यो के नियंत्रण में है और यह क्षेत्र निर्विवाद रूप से ऐतिहासिक और अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत जापान का है. उन्होंने चीन को चेतावनी देते हुए कहा, यह बेहद गंभीर है कि ये गतिविधियां जारी हैं. हम चीनी पक्ष को दृढ़ता और शांति से जवाब देंगे.