जहां पढ़ने जाने पर लड़की को गोली मार दी जाती है, उसी पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट में आयशा ए मलिक बनी पहली महिला जज

पाकिस्तान जैसे देश में पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं के जीने से लेकर मरने तक उन पर किसी पुरुष का अख्तियार होता है, और उससे भी अधिक जहां अदालतों में कुछ मामलों में महिलाओं की गवाही का वजन पुरुषों की गवाही से आधा होता है, उस देश में एक महिला का सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश बन जाना अपने आप में किसी चमत्कार से कम नहीं है.

Published: January 9, 2022 3:31 PM IST

By India.com Hindi News Desk | Edited by Digpal Singh

जहां पढ़ने जाने पर लड़की को गोली मार दी जाती है, उसी पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट में आयशा ए मलिक बनी पहली महिला जज

लाहौर/नई दिल्ली : आपने कई बॉलीवुड फिल्में देखी होंगी, जिनमें लड़की के जन्म पर ही उसे मार दिया जाता है. जो लड़कियां बच भी जाती हैं उन्हें शिक्षा से महरूम रखा जाता है. महिलाओं को बिल्कुल भी अधिकार नहीं दिए जाते. अधिकारों की बात करने वाली और स्कूल जाने की चाह रखने वाली लड़कियों को गोली मार दी जाती है. ऐसा सिर्फ फिल्मों में ही थोड़े ही होता है, हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान (Pakistan) इसका जीता जागता उदाहरण है. इसके बावजूद एक ऐसे देश में जहां महिलाओं को पुरुषों से हमेशा कमतर माना जाता है. लड़कियों की शिक्षा की बात करने वालों को गोली मार दी जाती है, उसी देश में एक महिला सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of Pakistan) की जज नियुक्त हुई हैं. सच में यह उस महिला के लिए एक बड़ी उपलब्धि है.

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पाकिस्तान जैसे देश में पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं के जीने से लेकर मरने तक उन पर किसी पुरुष का अख्तियार होता है, और उससे भी अधिक जहां अदालतों में कुछ मामलों में महिलाओं की गवाही का वजन पुरुषों की गवाही से आधा होता है, उस देश में एक महिला का सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश बन जाना अपने आप में किसी चमत्कार से कम नहीं है. वह भी ऐसे हालात में जब वकीलों और कानून विशेषज्ञों ने देशभर में बहिष्कार की धमकी दी हो, तब आयशा ए मलिक की नियुक्ति ऐतिहासिक ही कही जाएगी.

आयशा ए मलिक अपनी मेहनत, लगन और ईमानदारी से इस चमत्कार को अंजाम दिया है, जो पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला न्यायाधीश बनने जा रही हैं. देश के न्यायिक आयोग ने उनके नाम को मंजूरी दे दी है और अब संसदीय समिति से मंजूरी मिलने के बाद वह पड़ोसी मुल्क में एक ऐसा दर्जा हासिल कर लेंगी, जो वहां की महिलाओं के लिए किसी ख्वाब से कम नहीं.

तीन जून 1966 को जन्मी आयशा मलिक ने कराची ग्रामर स्कूल से शुरुआती पढ़ाई करने के बाद कराची के ही गवर्नमेंट कालेज ऑफ कॉमर्स एंड इकोनॉमिक्स से स्नातक की उपाधि ली. इसके बाद कानूनी शिक्षा की तरफ उनका रुझान हुआ और लाहौर के कॉलेज ऑफ लॉ से डिग्री लेने के बाद उन्होंने अमेरिका में मेसाच्यूसेट्स के हॉवर्ड स्कूल ऑफ लॉ से एलएलएम की पढ़ाई की. उनकी उल्लेखनीय योग्यता का सम्मान करते हुए उन्हें 1998-1999 में ‘लंदन एच गैमोन फेलो’ चुना गया.

आयशा मलिक ने अपना करियर कराची में फखरूद्दीन जी इब्राहिम एंड कंपनी से शुरू किया और 1997 से 2001 तक चार साल यहीं गुजारे. अगले 10 बरसों में उन्होंने खूब नाम कमाया और कई मशहूर कानूनी फर्मों के साथ जुड़ी रहीं. 2012 में वह लाहौर हाईकोर्ट में जज के तौर पर नियुक्त हुईं और कानून की दुनिया में एक बड़ा नाम बन गईं.

अपने निष्पक्ष और बेबाक फैसलों के कारण अक्सर चर्चा में रहने वाली आयशा की हालिया नियुक्ति का कुछ न्यायाधीशों और वकीलों ने विरोध किया है. उन्होंने आयशा की वरिष्ठता और इस पद के लिए उनकी योग्यता पर सवाल खड़े किए हैं. हालांकि ‘वीमन इन लॉ इनिशिएटिव-पाकिस्तान’ ने इस विरोध के जवाब में इससे पहले के 41 मौकों का हवाला दिया है, जब वरिष्ठता के बिना नियुक्ति की गई. याद रहे कि पिछले बरस न्यायिक आयोग ने इस पद पर आयशा की नियुक्ति से इंकार कर दिया था.

आयशा मलिक देश में महिला अधिकारों की पैरोकार मानी जाती हैं और उन्होंने इस दिशा में प्रयास भी किए हैं. इसका एक उदाहरण उनका पिछले वर्ष का एक ऐतिहासिक फैसला है, जिसमें बलात्कार के मामलों में महिलाओं पर किए जाने वाले एक विवादित परीक्षण को उन्होंने रद्द कर दिया, जो अकसर आरोपियों को कानून के फंदे से बच निकलने में मददगार होता था और पीड़ित महिला के चरित्र को संदेह के घेरे में खड़ा कर देता था.

बहरहाल आयशा मलिक की नियुक्ति का पाकिस्तान की कई प्रमुख हस्तियों ने समर्थन किया है. सत्तारूढ़ तकरीक-ए-इंसाफ पार्टी की सांसद और कानून के लिए संसदीय सचिव मलिका बुखारी ने उनकी नियुक्ति पर ट्वीट किया, ‘हमारे देश के लिए एक महत्वपूर्ण और निर्णायक पल जब एक शानदार वकील और बेहतरीन जज को पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला जज बनाया गया. रवायतें टूट रही हैं.’

पाकिस्तानी लेखिका बीना शाह ने उनकी नियुक्ति पर कहा कि उन्होंने नया इतिहास बनाया है. पाकिस्तान में महिलाओं के हालात दुनिया में किसी से छिपी नहीं हैं और महिला अधिकारों के पैरोकारों के संघर्ष का भी अपना एक इतिहास रहा है. आशा है कि आयशा मलिक की नियुक्ति से महिला अधिकारों की बहाली की दिशा में भी एक नया इतिहास लिखा जाएगा.

(इनपुट – पीटीआई)

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Published Date: January 9, 2022 3:31 PM IST