Lassa Fever: कोरोना के बाद अब लासा बुखार ने डराया, यूके में 3 की मौत | WHO ने दिया ये अहम अपडेट

Lassa Fever News Update: अमेरिकी सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (CDC) ने बताया कि ये एक जानवरों से निकली या जूनोटिक, तेजी से फैलने वाली वायरल बीमारी है. बताया गया कि रक्तस्रावी बीमारी लासा वायरस की वजह से होती है.

Published date india.com Published: February 16, 2022 10:08 AM IST
Lassa Fever

Lassa Fever News Update: कोरोना वायरस महामारी (Coronavirus Pandemic) और इसके नए-नए वेरिएंट से जूझ रही दुनिया में एक और संक्रमण ने परेशानी बढ़ा दी है. इस नए वायरस का नाम है लासा बुखार (Lassa fever), जो यूनाइटेड किंगडम मिला है. बताया कि गया नया वायरस यहां अभी तक तीन लोगों की मौत का कारण बन चुका है. स्वास्थ्य अधिकारियों ने चेताया कि इसमें महामारी बनने की संभावना है.

क्या है लासा बुखार

अमेरिकी सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (CDC) ने बताया कि ये एक जानवरों से निकली या जूनोटिक, तेजी से फैलने वाली वायरल बीमारी है. बताया गया कि रक्तस्रावी बीमारी लासा वायरस की वजह से होती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक मनुष्य आमतौर पर संक्रमित मास्टोमिस चूहों के मूल या मल से दूषित भोजन या अन्य चीजों के संपर्क में आने से लासा बुखार से संक्रमित हो जाते हैं. ये बीमारी पश्चिमी अफ्रीका के कुछ देशों में है. विश्व स्वास्थ्य संगठन से बीमारी पर मिली जानकारी के मुताबिक ये एक इंसान से दूसरे इंसान में फैल सकती है. लैबोरेट्री ट्रांसमिशन भी संभव है.

लासा वायरस का पहला केस कब मिला

इस बीमारी की खोज साल 1969 में हुई थी और इसका नाम नाइजीरिया के उसी शहर के नाम पर रखा गया जहां सबसे पहले इसके केस सामने आए. सीडीसी के अनुसार लासा बुखार से हर साल अनुमानित 100,000 से 300,000 लोग संक्रमित होते हैं, जिसमें लगभग 5,000 मौतें होती हैं.

बीमारी के क्या है लक्षण और संकेत

लासा बुखार की अवधि दो से एक्कीस दिन तक होती है. WHO के मुताबिक लासा के अधिकतर लक्षण हल्के और बिना निदान वाले होते हैं. इसने बताया कि बुखार धीरे-धीरे सामान्य कमजोरी और खराब अस्वस्थता के साथ शुरू होता है और जैसे-जैसे संक्रमण बढ़ता है, मरीजों को सिरदर्द, गले में खराश, मांसपेशियों में दर्द, सीने में दर्द, जी मचलाना, उल्टी, दस्त, खांसी के साथ पेट दर्द भी हो सकता है. इस संक्रमण के गंभीर मामलों में चेहरे पर सूजन, मुंह, नाक और नाजुक स्थानों से रक्तस्राव हो सकता है. डब्ल्यूएचओ ने आगे कहा कि इसमें मृत्यु आमतौर पर घातक मामलों में 14 दिनों के भीतर होती है.

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