नई दिल्लीः पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की बेटी मरियम नवाज शरीफ को उनका राजनीतिक उत्तराधिकारी माना जाता है, लेकिन आज के अदालती फैसले को उनके लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. पाकिस्तान की एक जवाबदेही अदालत ने भ्रष्टाचार के मामले में पिता नवाज शरीफ के साथ उनको भी दोषी करार देते हुए सात साल की सजा सुनाई है. अदालत ने नवाज शरीफ को 10 साल की कैद की सजा सुनाई है. पाकिस्तान के सबसे अहम राजनीतिक परिवार में 1973 में मरियम का जन्म हुआ था, लेकिन करीब 40 साल की उम्र में उन्होंने 2012 में राजनीति में कदम रखा. 2013 के आम चुनाव में उन्हें पिता नवाज शरीफ के चुनाव प्रचार का प्रभारी बनाया गया था. यहीं से मरियम के साथ विवाद भी जुड़ता चला गया. सियासत में आने के महज 4-5 वर्षों में ही मरियम और विवाद, एक-दूसरे से हमेशा जुड़े रहे हैं. पूर्व पीएम नवाज शरीफ की बेटी इतनी ‘शरीफ’ भी नहीं है. इसलिए आज जब पनामा पेपर्स के मामले में अदालत ने दोनों पिता-पुत्री को सजा सुनाई तो किसी को ताज्जुब न हुआ.

नवाज के प्रचार प्रभारी से इस्तीफा
उनकी नियुक्ति को लाहौर हाईकोर्ट में चुनौती दिए जाने की वजह से उन्होंने 2014 में पिता नवाज शरीफ के चुनाव प्रचार प्रभारी से इस्तीफा दे दिया था. शरीफ, मरियम और उनके पति सफदर के साथ ही अपदस्थ प्रधानमंत्री के दो पुत्र- हसन और हुसैन भी भ्रष्टाचार के मामले में वांछित हैं. उन्हें भगोड़ा घोषित कर दिया गया है.

2012 में राजनीति में रखा कदम.

2012 में राजनीति में रखा कदम.

 

मेडिकल की पढ़ाई छोड़नी पड़ी 
मरियम ने अपनी शुरुआती पढ़ाई लाहौर के स्कूल से की. इसके बाद उन्होंने 1980 के दशक में किंग एडवर्ड मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया, लेकिन वह अपनी डिग्री पूरी नहीं कर पाईं. दाखिले में अनियमितता की रिपोर्ट आने के बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी. पाकिस्तान के तत्कालीन विपक्ष के नेता ने दाखिले में अनियमितता का आरोप लगाया था.

पिता नवाज शरीफ का राजनीतिक वारिस माना जाता है.

पिता नवाज शरीफ का राजनीतिक वारिस माना जाता है.

 

तीन बच्चों की मां हैं मरियम
करीब 19 साल की उम्र में 1992 में मरियम की शादी मोहम्मद सफदर अवान से हुई. उनके तीन बच्चे हैं. कहा जाता है कि उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन और मास्टर की डिग्री हासिल की है. यह भी कहा जाता है कि वह 9/11 की घटना के बाद पाकिस्तान में बढ़े कट्टरपंथ पर पीएचडी भी कर रही थीं. हालांकि 2014 में अंग्रेजी विषय में उनकी एमए और पॉलिटिकल साइंस में पीएचडी की डिग्री पर भी लाहौर हाईकोर्ट ने सवाल उठाया था.

पाकिस्तानी मीडिया इनको भविष्य का बड़ा नेता बताता है.

पाकिस्तानी मीडिया इनको भविष्य का बड़ा नेता बताता है.

 

परोपकारी कार्यों से जुड़ीं हैं मरियम
राजनीतिक में आने के बाद भी मरियम परोपकारी कार्यों से जुड़ी हुई हैं. वह शरीफ ट्रस्ट, शरीफ मेडिकल सिटी और शरीफ इंस्टीट्यूशन इंस्टीट्यूट्स की चेयरपर्सन हैं. मार्च 2012 में न्यूजवीक ने मरियम को शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) की भविष्य की नेता बताया था.

मरियम की मां कैंसर से जूझ रही हैं.

मरियम की मां कैंसर से जूझ रही हैं.

2013 में बनीं पीएम यूथ प्रोग्राम की चेयरपर्सन
नवंबर 2013 में मरियम को प्रधानमंत्री यूथ प्रोग्राम का चेयरपर्सन बनाया गया, लेकिन उनकी नियुक्ति को लेकर विवाद पैदा हो गया. विपक्षी पार्टियों ने नवाज शरीफ पर घोर भाई-भतीजावाद करने का आरोप लगाया. इमरान खान की पार्टी पीटीआई ने इस नियुक्ति को लाहौर हाईकोर्ट में चुनौती दी. इसके बाद मरियम को इस पद से भी इस्तीफा देना पड़ा.