माले: मालदीव के राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने गुरुवार को देश में स्थिति सामान्य होने का हवाला देते हुए 45 दिनों से लगे आपातकाल को हटाने का ऐलान किया. राष्ट्रपति यामीन के कार्यालय से जारी बयान के अनुसार, “सुरक्षा सेवाओं की सलाह और सामान्य स्थिति बहाल करने के प्रयास के तहत, राष्ट्रपति ने आपातकाल हटाने का फैसला किया है”Also Read - अजय देवगन की साली ने 43 की उम्र में बढ़ाया इंटरनेट का पारा, हुस्न जैसे कोई संगमरमर हो

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राष्ट्रपति के अंतर्राष्ट्रीय प्रवक्ता इब्राहीम शीहाब ने कहा कि इस संबंध में सभी विभागों को सूचित कर दिया गया है. यामीन ने पांच फरवरी को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे’ का हवाला देकर 15 दिनों के लिए देश में आपातकाल लगा दिया था. इससे पहले देश के सर्वोच्च न्यायालय ने स्वनिर्वासित पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नाशीद समेत अन्य विपक्षी नेताओं को रिहा करने के आदेश दिए थे. आपातकाल हटाए जाने पर पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नाशीद ने कहा, ”राष्ट्रपति यामीन ने आपातकाल को इसलिए हटा लिया है क्योंकि उन्हें अब इसकी जरूरत नहीं रही, यामीन ने न्यायपालिका और विधायिका को कुचल कर रख दिया, कई बेकसूर लोगों को गिरफ्तार किया और मालदीव में एक नई तरह की ‘शांति’ को लागू किया जोकि पूरी तरह से तानाशाही है लेकिन हम हार नहीं मानेंगे, हम लड़ेंगे और जीतेंगे”. Also Read - सिगार का कश लगाते नजर आए Chris Gayle, समुंदर की लहरों के बीच में दौड़ाई 'जेट स्की'

राष्ट्रपति के आग्रह पर 20 फरवरी को संसद में प्रस्ताव लाकर आपातकाल को 30 दिनों के लिए बढ़ा दिया गया था. मालदीव इंडिपेंडेंट की रिपोर्ट के अनुसार, “आपातकाल के दौरान हिरासत में लिए गए नाशीद की मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी (एमडीपी) के सदस्यों को बिना किसी आरोप के रिहा कर दिया गया है.”

एमडीपी के उपाध्यक्ष मोहम्मद शीफाज, पूर्व सांसद इलियास लबीब और कई अन्य सदस्यों को 16 मार्च को प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किया गया था. पुलिस का आरोप था कि ये लोग राजधानी में हिंसा और अशांति फैलाकर सरकार को उखाड़ फेंकने की योजना बना रहे थे.

आपातकाल के दौरान संवैधानिक अधिकार निलंबित रहने से, हिरासत में लिए गए लोगों को उन पर लगे आरोपों के बारे में नहीं बताया गया था. इन लोगों को गुरुवार रात को आपातकाल के 45 दिन पूरे होने से पहले रिहा किया गया. विपक्ष के अनुसार, पांच फरवरी को आपाताकाल की घोषणा के बाद करीब 60 लोगों को गिरफ्तार किया गया था. मालदीव सरकार के आपातकाल लगाने के निर्णय की भारत और अमेरिका समेत वैश्विक स्तर पर निंदा की गई थी.