
Tanuja Joshi
हल्द्वानी से दिल्ली के बड़े न्यूजरूम तक... तनुजा जोशी, उत्तराखंड के शांत और खूबसूरत शहर हल्द्वानी से ताल्लुक रखती हैं. देहरादून के ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी ... और पढ़ें
US Green Card: स्थायी निवास कार्ड, जिसे ग्रीन कार्ड के नाम से भी जाना जाता है, अमेरिका में अप्रवासियों के बीच एक बेहद प्रतिष्ठित परमिट है. यह लोगों को अमेरिकी नागरिकता प्राप्त करने की राह पर अग्रसर करता है. हालांकि, ग्रीन कार्ड धारक पूर्ण अमेरिकी नागरिकों के बराबर नहीं होते, फिर भी उन्हें कई समान अधिकार प्राप्त होते हैं. ग्रीन कार्ड प्राप्त करने का एक आम तरीका अमेरिकी नागरिक से विवाह करना है. हालांकि, एक आव्रजन वकील के अनुसार, अमेरिकी नागरिक से विवाह करने से अब ग्रीन कार्ड की गारंटी नहीं मिलती.
अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा (USCIS) के अनुसार, किसी अमेरिकी नागरिक का जीवनसाथी ‘अमेरिकी नागरिक का तत्काल रिश्तेदार (Immediate Relative of a US Citizen)’ की श्रेणी में आता है. अमेरिकी कानून के तहत पति या पत्नी सहित ऐसे तत्काल रिश्तेदार ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने के पात्र होते हैं. हालांकि, अमेरिकी आव्रजन वकील ब्रैड बर्नस्टीन ने चेतावनी दी है कि अब सिर्फ शादी कर लेना ग्रीन कार्ड मिलने की गारंटी नहीं रहा.
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के मौजूदा कार्यकाल में शादी के आधार पर मिलने वाले ग्रीन कार्ड आवेदनों की कड़ी जांच की जा रही है. अब अधिकारी इस बात पर ज्यादा जोर दे रहे हैं कि शादी सिर्फ कागजों में कानूनी न हो, बल्कि वास्तव में असली (जेन्युइन) हो. ग्रीन कार्ड कार्यक्रम पर बढ़ी इस सख्ती के तहत ट्रंप प्रशासन ने डाइवर्सिटी वीजा (DV) लॉटरी को भी निलंबित कर दिया है, जिसके जरिए हर साल कम आव्रजन वाले देशों के लोगों को यादृच्छिक चयन के माध्यम से करीब 50,000 वीजा दिए जाते थे.
ब्रैड बर्नस्टीन, जिनके पास 30 साल से ज्यादा का अनुभव है और जो लॉ ऑफिसेज ऑफ स्पार एंड बर्नस्टीन की कानूनी टीम का हिस्सा हैं, कहते हैं, ‘सिर्फ रिश्ते में होना आपको ग्रीन कार्ड नहीं दिलाता. साथ रहना ग्रीन कार्ड दिलाता है.’ उन्होंने चेतावनी दी कि जो विवाहित जोड़े अलग-अलग रहते हैं, उनके आवेदन खारिज होने का खतरा काफी ज्यादा होता है. उनके मुताबिक, ‘अगर पति-पत्नी एक ही घर में नहीं रहते, तो उनका ग्रीन कार्ड केस पहले ही कमजोर हो जाता है.’
एक फेसबुक वीडियो में उन्होंने बताया कि शादी आधारित मामलों में आव्रजन अधिकारियों को इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि आप अलग क्यों रहते हैं चाहे वजह नौकरी हो, पढ़ाई हो, पैसे की समस्या हो या सुविधा. बर्नस्टीन के अनुसार, सह-निवास (एक साथ रहना) सबसे अहम फैक्टर है. उन्होंने कहा, ‘अधिकारियों को सिर्फ यह देखना होता है कि आप वास्तव में पति-पत्नी की तरह साथ रहते हैं या नहीं.’
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