वॉशिंगटन. भारत से अमेरिका में पढ़ाई के लिए जाने वाले स्‍टूडेंट्स को जारी किए जाने वाले वीजा में भारी कमी आई है. इतना ही नहीं, चीन से भी अमेरिका जाने वाले स्‍टूडेंट्स की संख्‍या काफी घट गई है. ऐसे में ये सवाल उठ रहा है कि क्‍या यूएस प्रेसिडेंट डोनाल्‍ड ट्रम्‍प की नई नीति के कारण ऐसा हो रहा है. 2017 में विदेशों से अमेरिका में आने वाले विदेशी छात्रो को जारी किए जाने वीजा एफ-1 में 17 फीसदी कमी दर्ज हुई. अमेरिका में इसकी रिपोर्ट जारी हुई है.4,17,728 स्‍टूडेंट्स 2016 में विदेशों से पढ़ाई के लिए पहुंचे अमेरिका, जबकि 2017 में 3,93,573 स्‍टूडेंट्स को वीजा जारी हुआ. Also Read - बड़ा खुलासा: देश में एक ही IMEI नंबर के 13 हजार से अधिक मोबाइल फोन सक्रिय

न्यू स्टेट डाटा की रिपोर्ट के आंकड़े सामने आए
इस रिपोर्ट के मुताबिक, पढ़ाई के लिए भारतीय छात्रों को जारी होने वाले वीजा की संख्‍या में सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली है. वहीं, चीनी छात्रों की संख्या में 24 फीसदी की कमी आई है. इसका कारण साल 2014 में चीन के लिए अमेरिका की बदली गई वीजा नीति है. Also Read - Jio Mart ने इन जगहों पर शुरू की अपनी सर्विस, घर बैठे इस नंबर पर मैसेज कर मंगवा सकते हैं सामान

अमेरिका में विदेशी छात्रों की संख्‍या में आई ये कमी
4,17,728 विदेश स्‍टूडेंट को जारी वीजा- 2016
3,93,573 विदेशी स्‍टूडेंट को जारी वीजा- 2017 Also Read - Coronavirus: इटली से लाए गए 263 भारतीयों को छात्रों को ITBP Quarantine Facility भेजा गया

एक साल में 28 फीसदी भारतीय छात्र घटे अमेरिका में
65,257 भारतीय स्‍टूडेंट्स को जारी हुए वीजा- 2016
47,302 भारतीय स्‍टूडेंट्स को जारी हुए वीजा- 2017

24 फीसदी कमी चीन के स्‍टूडेंट्स की संंख्‍या मेें आई 
रिपोर्ट के मुताबिक, 2014 में चीन में वीजा पॉलिसी में 5 साल के लिए मिलने वाले एफ-1 वीजा को हासिल करने की प्रक्रिया में बदलाव किया गया. इसमें हर साल उनको वीजा को रिन्‍यू कराना जरूरी कर दिया गया. इसकी गिरवट का एक कारण ये भी हो सकता है.

इन देशों की ओर इंटरनेशल स्‍टूडेंट्स कर रहे रुख
अमेरिका की बजाय बड़ी संख्‍या में विदेशों से कनाडा, जर्मनी और ऑस्‍ट्रेलिया जा रहे हैं. यहां इंटरनेशल स्‍टूडेंट्स को पढ़ने और रहने के लिए सहूलियतें दी जा रही हैं और पढ़ाई के बाद वहां का वर्कफोर्स भी बन जाते हैं.

भारत और चीन टॉप पर
भारत और चीन से सबसे ज्‍यादा स्‍टूडेंट्स अमेरिका पढ़ने के लिए जाते हैं और इसके बाद साउथ कोरिया, सउदी अरब और कनाडा हैं.

कुछ ने ट्रम्‍प प्रसाशान को ठहराया दोषी
अमेरिका में विदेशी स्‍टूडेंट्स की बड़ी संख्‍या में भारी गिरावट आने से कई यूनिवर्सिटीज और स्‍कूलों पर काफी असर दिखाई दे रहा है. कुछ अधिकारी इस कदम के लिए ट्रम्‍प प्रशासन को दोषी ठहरा रहे हैं.

दोषी ट्रम्‍प या महंगी फीस
यह भी जानना जरूरी है कि विदेशी छात्रों मे कमी डोनॉल्ड ट्रम्प के राष्टपति बनने से पहले ही शुरू हो गई थी. साल 2016 में ही पिछले साल के 644233 से यह आंकड़ा घटकर 471728 हो गया था. इसका कारण अमेरिका में कोर्सेज की ज्यादा फीस को भी माना जाता है.

ऐसे में अमेरिका के प्रति गलत सोच बन रही
यूए एसोसिएसन ऑफ कॉलेज रजिस्टरार्स और एडमिशन ऑफिसर्स ने इस मुद्दे पर कहा कि अमेरिका के कॉलेजों में विदेशी छात्रों के आवेदनों में लगभग 40 फीसदी की कमी आई है. इस पर भी ध्यान देने की जरूरत है, क्योंकि दुनिया भर के छात्रों और उनके परिवारों की अमेरिका के प्रति गलत सोच विकसित हो रही है. वे ऐसा सोचने लगते हैं कि अमेरिका में विदेशी छात्रों के लिए अच्छा माहौल नहीं है. (इनपुट-एजेंसी)