काहिरा: सूडान में सैन्य तख्तापलट हो गया है. सेना ने सूडान के अंतरिम प्रधानमंत्री को हिरासत में ले लिया है. इसके साथ ही कई अन्य शीर्ष लोगों को भी हिरासत में लिया गया है. सेना ने कई अहम जगहों पर कब्जा कर लिए है. पूरे देश में उथल-पुथल मच गई है. वहीं, इसे लेकर यूरोपीय संघ (ईयू) और अमेरिका ने गंभीर चिंता व्यक्त की है. वहीं, तख्तापलट की ख़बरों के बाद लोग सड़कों पर उतर आये हैं.Also Read - Omicron को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के सलाहकार फाउची ने कहा, चिंता की बात नहीं...

यूरोपीय संघ के विदेश मामलों के प्रमुख जोसेप बोरेल ने ट्वीट किया कि सूडान में सैन्य बलों द्वारा अंतरिम प्रधानमंत्री सहित कई वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों को हिरासत में लेने की खबर ‘‘अत्यधिक चिंतित’’ करने वाली है और वह उत्तर पूर्व अफ्रीकी राष्ट्र में घटनाओं पर नजर रखे हुए हैं. Also Read - UN headquarters के बाहर दिखा हथियारबंद शख्स, घंटों बंद रहे दरवाजे

बोरेल ने लंबे समय तक शासक रहे उमर अल-बशीर के 2019 में सत्ता से हटने के बाद सूडान के निरंकुशता से लोकतंत्र की दिशा में बढ़ने का जिक्र करते हुए लिखा, ‘‘यूरोपीय संघ सभी हितधारकों और क्षेत्रीय भागीदारों से लोकतांत्रिक शासन को वापस लाने का आह्वान करता है.’’ Also Read - Afghanistan GDP: अफगानिस्तान की जीडीपी एक साल में 20 फीसदी घटने की संभावना : यूएन

इससे पहले, ‘हॉर्न ऑफ अफ्रीका’ के लिए अमेरिकी विशेष दूत जेफरी फेल्टमैन ने कहा, ‘‘अमेरिका इससे बेहद चिंति है और उसने संकेत दिया था कि सैन्य तख्तापलट से इस गरीब देश को अमेरिकी सहायता पर असर पड़ेगा.’’ ‘हॉर्न ऑफ अफ्रीका’ में जिबूती, इरिट्रिया, इथियोपिया और सोमालिया शामिल हैं. ‘यूएस ब्यूरो ऑफ अफ्रीकन अफेयर्स’ ने ट्विटर पर लिखा, ‘‘जैसा हमने बार-बार कहा है, संक्रमणकालीन सरकार में बलपूर्वक किसी भी परिवर्तन से अमेरिकी सहायता पर असर पड़ सकता है.’’