ट्रंप की सेना के टारगेट पर मोजतबा खामेनेई, फिर कैसे करेंगे अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर हस्ताक्षर?

Written By: Vineet Sharan Updated by: Vineet Sharan
Updated Date:May 27, 2026 7:11 AM IST

Mojtaba Khamenei: विशेषज्ञों का कहना है कि संभावना है कि मोजतबा खामेनेई गुप्त कूरियर नेटवर्क के जरिए डील पर साइन करेंगे.

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Mojtaba Khamenei: ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई पिछले करीब तीन महीने से छिपे हैं. विशेषज्ञ कहते हैं कि मोजतबा अभी भी अमेरिका-इजरायल की सेना के टारगेट पर हैं. फिर सवाल उठता है कि वह अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे.

गुप्त कूरियर नेटवर्क का सहारा

फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, आतंकवाद-रोधी विशेषज्ञों ने मंगलवार को कहा कि संभावना है कि ईरान के सर्वोच्च नेता, मोजतबा खामेनेई को अमेरिका के साथ किसी भी अंतिम समझौते को गुप्त कूरियर नेटवर्क के जरिए मंजूरी देनी होगी, जबकि वे एक टारगेट के तौर पर छिपे रहेंगे.

अमेरिका कर रहा अदृश्य पक्ष के साथ समझौता?

विशेषज्ञों ने दावा किया कि इस अभूतपूर्व व्यवस्था का मतलब है कि वॉशिंगटन एक पूरी तरह से अदृश्य पक्ष के साथ एक बहुत ही महत्वपूर्ण समझौता कर रहा है. इस संभावित समझौते पर एक शासन के नेता और एक "निर्धारित लक्ष्य" के हस्ताक्षर होंगे, जो कभी भी सार्वजनिक रूप से अपना चेहरा नहीं दिखा सकता.

बड़ी बातें

  • यह अमेरिकी सैन्य दबाव में किया गया एक ऐसा समझौता है, जिसमें शामिल शासन का नेता अपना चेहरा भी नहीं दिखा सकता
  • अमेरिका जो भी समझौता करेगा, उसका पालन पूरी तरह से उस व्यक्ति के जीवित रहने पर निर्भर करेगा

क्या कहते हैं विशेषज्ञ

मोसुल के एक इतिहासकार डॉ. उमर मोहम्मद ने को बताया, खामेनेई एक निर्धारित लक्ष्य हैं, और उनकी हर पुष्ट मौजूदगी एक 'कोऑर्डिनेट' होती है.

रिपोर्ट के अनुसार, संदेश भेजने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला कूरियर सिस्टम कोई अस्थायी व्यवस्था नहीं है. यह उनके शासन का 'ऑपरेटिंग सिस्टम' है. ईरान के सर्वोच्च नेता 4,000 लोगों के गुप्त नेटवर्क के ज़रिए 'राज्य के भीतर एक राज्य' चलाते हैं.

यही है समझौते में देरी का कारण

विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भारत में बताया था कि इस समझौते में देरी क्यों हो रही है. रूबियो ने कहा, बात बस जवाब मिलने में लगने वाले समय की है. मेरा मतलब है, जब आप इन मामलों की गहराई में जाते हैं, तो आपको दूसरे पक्ष से जवाब का इंतज़ार करना पड़ता है. ईरानियों को जवाब देने में थोड़ा ज़्यादा समय लगता है.

जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी में 'चरमपंथ पर यहूदी-विरोध अनुसंधान पहल कार्यक्रम' के निदेशक डॉ. उमर मोहम्मद ने कहा, "इसके जरिए विदेश मंत्री रूबियो ने आधिकारिक तौर पर कूरियर प्रणाली में होने वाली देरी की पुष्टि की है.

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