Pakistan flour crisis 2026: पाकिस्तान में भले ही पेट्रोल-डीजल के दाम सस्ते हो लेकिन आटे की कीमतें आसमान छू रही हैं. बगैर रोटी के पाकिस्तानी नागरिकों का जीना मुहाल हो गया है. नई फसल आने और डीजल के दाम घटने के बावजूद, आटा मिलों की मनमानी के आगे सिंध सरकार और प्रशासन पूरी तरह बेबस नजर आ रहा है.
पाकिस्तान में एक तरफ जहां आर्थिक संकट गहराता जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ आटे की रिकॉर्ड तोड़ कीमतों ने मुनीर सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. मार्च-अप्रैल में नई गेहूं की फसल आने और डीजल की कीमतों में कमी के बावजूद आटा मिल मालिकों ने कीमतों में लगातार बढ़ोतरी की है. आर्थिक सर्वेक्षण 2026 के आंकड़ों के अनुसार, गेहूं का उत्पादन 4.3% बढ़कर 29.61 मिलियन टन हो गया है, फिर भी आम आदमी को सस्ती रोटी नसीब नहीं हो रही है.
सिंध सरकार और कराची प्रशासन आटा मिलों के आगे पूरी तरह नतमस्तक दिखाई दे रहा है. ताजा आंकड़ों के अनुसार, 50 किलो आटे के बोरे की कीमत 6,725 रुपये तक पहुंच गई है, जो जून के अंत में 6,300 रुपये थी. व्यापारियों का तर्क है कि खुले बाजार में गेहूं महंगा है, इसलिए वे कीमतें बढ़ा रहे हैं.
DAWN की रिपोर्ट के अनुसार, कराची कमिश्नर की तय की गई खुदरा कीमतें कागजों तक ही सीमित हैं. सरकारी रेट लिस्ट के मुताबिक, आटा 2.5 की कीमत 113 प्रति किलो तय थी, लेकिन बाजार में यह 150 रुपये में बिक रहा है. वहीं चक्की का आटा 170-180 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है. रोटी और नान की कीमतों में भी भारी उछाल आया है; एक साधारण नान के लिए लोग 30 रुपये तक चुकाने को मजबूर हैं.
पाकिस्तानी सरकार अनाज की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने में पूरी तरह विफल रही है. सरकार लगातार गेहूं की खरीद बढ़ाने और जमाखोरों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश तो दिए हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि सरकारी लक्ष्य का एक छोटा हिस्सा ही पूरा हो पाया है. बढ़ती महंगाई ने आम आदमी की थाली से रोटी भी छीन ली है, और प्रशासन की विफलता ने इस संकट को और विकराल बना दिया है.
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