
Gargi Santosh
गार्गी संतोष, जी मीडिया के India.com में सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वह हाइपरलोकल, नेशनल और वर्ल्ड सेक्शन की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. गार्गी को लाइफस्टाइल, हेल्थ, टेक्नोलॉजी, और ... और पढ़ें
नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) ने हाल ही में एक ऐसा बदलाव किया है जो सुनने में तो छोटा लग सकता है, लेकिन अंतरिक्ष मिशनों के लिहाज से यह काफी बड़ा कदम है. अब आने वाले मिशनों में अंतरिक्ष यात्री अपने साथ स्मार्टफोन, खासतौर पर iPhone जैसे डिवाइस लेकर जा सकेंगे. यह फैसला उन मिशनों के लिए लागू होगा, जो पृथ्वी की कक्षा में जाएंगे या फिर चांद की ओर रवाना होंगे. बता दें NASA की अब तक की नीति काफी सख्त रही है, जिसमें निजी तकनीक को लेकर कई तरह की पाबंदियां थीं. लेकिन यह नया बदलाव नासा के पुराने सिस्टम में नई सोच का संकेत देता है.
इस अपडेट की पुष्टि नासा के एडमिनिस्ट्रेटर जेरेड आइजैकमैन ने बुधवार रात की. उन्होंने बताया कि Crew-12 और Artemis II मिशन में जाने वाले एस्ट्रोनॉट्स को स्मार्टफोन साथ ले जाने की अनुमति होगी. यह बदलाव नासा की उस पारंपरिक सोच से अलग है, जिसमें अंतरिक्ष में निजी डिवाइस को लेकर बेहद सतर्कता बरती जाती थी. पहले अंतरिक्ष यात्रियों को सिर्फ कुछ सीमित कैमरे ही इस्तेमाल करने की अनुमति होती थी. लेकिन पर्सनल फोन ले जाना मना था. अब इस फैसले से अंतरिक्ष यात्री अपने अनुभवों को ज्यादा आसानी से रिकॉर्ड कर पाएंगे और परिवार व दुनिया के साथ साझा भी कर सकेंगे.
Apple ने भी इसे एक बड़ी उपलब्धि बताया है और कहा है कि यह पहली बार होगा जब iPhone को अंतरिक्ष में लंबे समय तक इस्तेमाल के लिए आधिकारिक मंजूरी मिलेगी. हालांकि, अभी यह साफ नहीं किया गया है कि कौन-सा iPhone मॉडल इस मिशन के लिए योग्य होगा. लेकिन इतना तय है कि iPhone को लेकर यह कदम तकनीक के लिहाज से बेहद अहम है. इससे अंतरिक्ष यात्रियों को अलग कैमरे या पुराने गैजेट्स की जरूरत कम पड़ेगी और वे रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले डिवाइस से ही फोटो और वीडियो रिकॉर्ड कर सकेंगे.
जेरेड आइजैकमैन ने कहा कि यह फैसला सिर्फ सुविधा के लिए नहीं है, बल्कि नासा के पुराने नियमों और धीमी प्रक्रिया को चुनौती देने की दिशा में भी है. उन्होंने बताया कि किसी भी डिवाइस को अंतरिक्ष में ले जाने से पहले उसे रेडिएशन, अत्यधिक तापमान, वैक्यूम, कंपन और डिवाइस के अंदर इस्तेमाल होने वाली सामग्री तक की जांच से गुजरना पड़ता है. यह सब सुरक्षा के लिए जरूरी है, लेकिन कई बार यही नियम तकनीक को अपडेट करने में देरी कर देते हैं. इसलिए नासा अब यह देख रहा है कि कौन से नियम वाकई जरूरी हैं और किन्हें बदला जा सकता है.
इस बदलाव से पहले Artemis II मिशन के लिए जो कैमरे तय किए गए थे, वे काफी पुराने माने जा रहे थे. उदाहरण के तौर पर सबसे नया Nikon DSLR कैमरा 2016 का था और GoPro भी पुराने मॉडल के थे. अब स्मार्टफोन के आने से एस्ट्रोनॉट्स को ज्यादा पावरफुल कैमरा क्वालिटी और बेहतर वीडियो रिकॉर्डिंग का फायदा मिलेगा. वैसे यह पहली बार नहीं है जब फोन अंतरिक्ष में गया हो – 2011 में स्पेस शटल मिशन में iPhone 4 गया था, लेकिन उसका उपयोग सीमित था. वहीं निजी मिशनों जैसे Polaris और Axiom में स्मार्टफोन पहले से इस्तेमाल हो रहे हैं. अब नासा भी इस दिशा में कदम बढ़ा रहा है और जल्द ही चांद से iPhone की पहली तस्वीरें सामने आ सकती हैं.
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