काठमांडू: नेपाल ने शनिवार को कहा कि उसे विश्वास है कि उसके दोनों ‘मित्रवत पड़ोसी’ भारत और चीन क्षेत्र की स्थिरता एवं वैश्विक शांति को ध्यान में रखते हुए शांतिपूर्ण तरीकों से वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर सीमा गतिरोध को सुलझा लेंगे.Also Read - Quad Summit 2022: क्वाड सम्मेलन में आज चर्चा करेंगे अमेरिका-जापान-भारत-ऑस्ट्रेलिया, बौखलाए चीन ने जापान को धमकाया

दोनों एशियाई महाशक्तियों के बीच स्थित हिमालयी राष्ट्र ने कहा कि वह क्षेत्रीय और वैश्विक शांति के लिए हमेशा दृढ़ता से खड़ा है और उसने विश्वास जताया कि अच्छे पड़ोसी की भावना के साथ भारत और चीन के बीच मतभेदों को सुलझा लिया जाएगा. विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘नेपाल मानता है कि देशों के बीच विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाया जाना चाहिए.’’ हालांकि नेपाल ने खुलेतौर पर किसी भी देश का समर्थन न करते हुए दोनों देशों को मित्र बताया है. Also Read - जापान में जुटे चार देश तो हिल गया चीन, अमरीका ने ताइवान मसले पर चीन को दी खुली चुनौती | Watch Video  

कुछ दिन पहले ही नेपाल सरकार ने संविधान संशोधन के माध्यम से अपने देश के राजनीतिक मानचित्र को बदलने की प्रक्रिया पूरी की थी. रणनीतिक महत्व वाले भारत के तीन क्षेत्रों – लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा को इस नक्शे में दर्शाया गया है. यह कदम भारत के साथ उसके संबंधों को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है. Also Read - हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में चीन का बुलबुला फोड़ेंगे चार देश; भारत, अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया ने की जुगलबंदी | Watch Video  

इसमें कहा गया है, ‘‘हमारे मित्रवत पड़ोसियों भारत और चीन के बीच गलवान घाटी में हालिया घटनाक्रम के संदर्भ में नेपाल को विश्वास है कि दोनों पड़ोसी देश अच्छे पड़ोसी की भावना के साथ द्विपक्षीय,क्षेत्रीय तथा वैश्विक शांति और स्थिरता के पक्ष में शांतिपूर्ण तरीकों से अपने मतभेद सुलझा लेंगे.’’

नेपाल ने यह बयान लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीन के बलों के बीच हाल में हुई झड़पों की पृष्ठभूमि में दिया है.

सोमवार रात गलवान घाटी में चीन के सैनिकों के साथ झड़प में एक कर्नल समेत भारत के 20 सैन्यकर्मी शहीद हो गए थे. बीते पांच दशक में भारत और चीन के बीच यह सबसे बड़ी सैन्य झड़प थी जिसके कारण दोनों देशों के बीच सीमा पर पहले से जारी गतिरोध के हालात और गंभीर हो गए.

(इनपुट भाषा)