नेपाल: Gen-Z आंदोलन के बीच PM ओली ने तोड़ी चुप्पी, बोले - हम नहीं झुकेंगे..., गृहमंत्री रमेश लेखक ने छोड़ा पद

नेपाल में प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब समेत 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बैन हटाने से इनकार कर दिया है. इसके खिलाफ उठे जेनरेशन जेड के विरोध में 20 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई.

Published date india.com Published: September 8, 2025 10:56 PM IST
नेपाल: Gen-Z आंदोलन के बीच PM ओली ने तोड़ी चुप्पी, बोले - हम नहीं झुकेंगे..., गृहमंत्री रमेश लेखक ने छोड़ा पद

नेपाल में सोशल मीडिया पर प्रतिबंध (बैन) को लेकर जारी Gen-Z प्रोटेस्ट के बीच प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली का बयान सामने आया है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा – उनकी सरकार 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लगाए गए बैन को वापस नहीं लेगी. बता दें पड़ोसी देश में फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, व्हाट्सऐप और एक्स जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स पर रोक लगाने का फैसला पिछले हफ्ते ही ले लिया गया था. सरकार का तर्क है कि इन कंपनियों ने संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के साथ पंजीकरण नहीं कराया. हालांकि, आलोचकों का कहना है कि यह कदम अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला और सेंसरशिप की ओर बढ़ता कदम है. कैबिनेट बैठक में सहयोगी दल नेपाली कांग्रेस के मंत्रियों ने इस फैसले का विरोध किया और बैठक से बाहर चले गए.

गृहमंत्री रमेश लेखक ने दिया इस्तीफा

सोमवार को हालात तब बिगड़े जब गृहमंत्री रमेश लेखक ने इस्तीफा दे दिया. उनका कहना था कि वे नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ रहे हैं. क्योंकि पुलिस ने काठमांडू और इटहरी में हुए प्रदर्शन में गोलीबारी की, जिसमें 20 से ज्यादा लोगों की मौत और 400 से अधिक घायल हुए. प्रदर्शनकारियों का नारा था – ‘करप्शन बंद करो, सोशल मीडिया नहीं’ वरिष्ठ कांग्रेस नेता गगन थापा और बिश्व प्रकाश शर्मा ने गृहमंत्री के इस्तीफे की मांग की थी, इससे ओली सरकार पर राजनीतिक दबाव और बढ़ गया.

आखिर क्यों भड़के Gen Z?

यह विरोध प्रदर्शन शुरू तो ऑनलाइन हुआ था, लेकिन देखते-ही-देखते Gen Z Revolution में बदल गया. हजारों स्कूली और कॉलेज के छात्र-छात्राएं राष्ट्रीय झंडा लेकर सड़कों पर उतर आए और संसद के पास पुलिस बैरिकेड्स तोड़ दिए. हालात काबू से बाहर होने पर पुलिस ने आंसू गैस, पानी की बौछार और गोलियां चलाईं. अब यह आंदोलन सिर्फ सोशल मीडिया बैन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह भ्रष्टाचार और कुप्रशासन के खिलाफ बड़े नागरिक अधिकार आंदोलन का रूप ले चुका है.

काठमांडू समेत कई शहरों में कर्फ्यू लागू

स्थिति बिगड़ने पर सरकार ने राजधानी काठमांडू समेत कई शहरों में कर्फ्यू लागू कर दिया और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए नेपाल आर्मी को तैनात किया गया. प्रधानमंत्री ओली के आवास पर राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाई गई, जिसमें सेना प्रमुख अशोक राज सिग्देल और मुख्य सचिव समेत वरिष्ठ मंत्री मौजूद थे. राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ते जनाक्रोश के बीच सवाल यह है कि क्या ओली सरकार इस संकट से निकल पाएगी या यह आंदोलन नेपाल की राजनीति में बड़ा बदलाव लेकर आएगा.

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