काठमांडू: एशिया में भारत और नेपाल (Nepal) का रिश्ता बड़े भाई-छोटे भाई के अलावा एक परस्पर सहयोगी मित्र देश की भी है. ऐसे में चाहे नेपाल के नेता भारत के खिलाफ कई बार कितनी भी बयानबाजी क्यों न कर लें लेकिन बुरे वक्त में नेपाल भारत को ही याद करता है और भारत भी बढ़ चढ़कर नेपाल की मदद करता है. नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली (KP Sharma Oli) द्वारा संसद को भंग किए जाने के बाद नेपाल में राजनीतिक भूचाल आया हुआ है. नेपाल के नेता पुष्प कमल दहल उर्फ “प्रचंड” (Pushpa Kamal Dahal ‘Prachanda’) ने ओली के इस फैसले को असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक करार दिया है. ऐसे में प्रचंड भारत व अन्य अंतरराष्ट्रीय समुदायों की इस मामले में सहायता चाहते हैं. Also Read - UPSC Exam: UPSC की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों को झटका, नहीं मिलेगा अतिरिक्त मौका

बता दें सत्ता की खींचतान के बीच 20 सितंबर को केपी शर्मा ओली द्वारा प्रतिनिधि सभा को भंग कर दिया गया था. इसके बाद से ही नेपाल में राजनीतिक संकट छाया हुआ है. संसद को भंग करने का विरोध प्रचंड गुट लगातार कर रहा है. ऐसे में प्रचंड ने एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया समूह से बातचीत में कहा कि हमे अगर संघीय और लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूत करना है तो अपने संसद को बहाल करना होगा. इसी कड़ी में बता दें कि आज प्रचंड शक्ति प्रदर्शन करने वाले हैं और एक विशाल रैली का नेतृत्व करने वाले हैं. Also Read - Last Day Of RailTel IPO: 11 गुना सब्सक्राइब हुआ इश्यू, रिटेल पार्ट 13 गुना बुक, यहां पर जानें सबकुछ

रैली से पहले उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय प्रतिनिधि सभा को भंग करने को लेकर केपी शर्मा ओली के असंवैधानिक कदम को स्वीकृति नहीं देगी. प्रचंड ने चेतावनी दी की अगर सदन प्रतिनिधि सभा को बहाल नहीं किया गया तो, देश एक गंभीर संकट में चला जाएगा. लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत रखने के लिए सरकार के इस फैसले के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए. Also Read - Privatisation of PSU Banks: सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का निजीकरण क्यों करना चाहती है भारत सरकार?

प्रचंड ने इस मामले में भारत सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय समुदायों से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है ताकि दोबारा लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बहाल किया जा सके. हालांकि भारत सरकार द्वारा इस मदद की मांग पर भारत सरकार द्वारा इसे नेपाल का आंतरिक मामला बताया गया है. बता दें कि भारत सरकार की पॉलिसी हमेशा से रही है कि हम किसी भी देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करते हैं.