काबुल: हाल के वर्षों में तालिबान पहले से मजबूत हुआ है और उसने अफ़ग़ानिस्तान के कई बड़े शहरों पर कब्जा कर लिया है और नियमित रूप से बड़े हमले कर रहा है. इस हफ्ते भी तालिबान आतंकियों ने गजनी शहर पर लगातार हमले किए जिसमें सैकड़ों लोगों की मौत हो गई. गजनी पर हमले के साथ ही तालिबानियों ने दो अफ़ग़ान मिलिट्री बेस को भी तहस-नहस कर दिया.Also Read - अफगानिस्तान को पाकिस्तान के रास्ते मानवीय सहायता पहुंचाएगा भारत, विदेश मंत्रालय ने कहा- रोडमैप तैयार कर रहे हैं

अफगानिस्तान में शांति बहाली के उपाय विफल
दरअसल तालिबान का ये उग्र रवैया अफगानिस्तान में शांति बहाल करने के लिए अमेरिका से हो रही वार्ता को विफल करने के लिए है. जून महीने में ही कतर में अमेरिका और तालिबान के प्रतिनिधियों के बीच कई मुलाकातें हुई. इन मुलाकातों के बाद तीन दिन का सफल सीज फायर भी रहा था. खुद अफगानी राष्ट्रपति ने इसे शान्ति की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम बताया था. Also Read - USA समेत वेस्टइंडीज दौरे के लिए Ireland टीम की घोषणा, Ben White को मौका

लेकिन शान्ति बहाली के सारे कयासों को धता बताते हुए आज तालिबान के नेता ने कहा कि अफगानिस्तान में तब तक शांति नहीं आएगी जब तक यहां विदेशी ‘कब्जा’ बरकरार रहेगा. इस आतंकी समूह का कहना है कि अमेरिका से सीधी बातचीत के बाद ही देश से हिंसा को समाप्त किया जा सकता है. ईद-उल-जुहा के मौके पर भी जारी किए गए संदेश में मौलवी हैबतुल्ला अखुनजादा ने कहा था कि तालिबान ‘इस्लामिक लक्ष्यों’ और अफगानिस्तान की संप्रभुता और युद्ध को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है. Also Read - तालिबान अधिग्रहण के बाद अफगानिस्तान क्रिकेट टीम का फैसला करेगी ICC

तालिबान का अफगान सरकार से वार्ता का इन्कार
तालिबान ने अफगानिस्तान सरकार से बात करने से मना कर दिया है क्योंकि इस आतंकी समूह का मानना है कि अफगानी सरकार अमेरिका का मुखौटा है और वह सीधे अमेरिका से बातचीत करेगा. समूह ने कहा है कि वह क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और अन्य देशों को खतरे में नहीं डालेगा. आतंकी समूह ने अमेरिकी और नाटो सेनाओं की अफगानिस्तान से पूरी तरह वापसी की मांग की है.

अफगानिस्तान में किए गए ताजा हमलों को तालिबान के शक्ति प्रदर्शन के रूप में ही देखा जा रहा है. हमले का केन्द्र रहा गजनी शहर राजधानी काबुल से 100 किलोमीटर से भी कम दूरी पर है. कई दिनों तक चली लड़ाई में हालांकि अमेरिकी और अफगानी सेना ने शहर को फिरसे कब्जे में ले लिया है, लेकिन हमले में 500 से भी ज्यादा लोगों की मौत हो गई और शहर पूरी तरह बर्बाद हो गया.

बुधवार को भी इस्लामिक स्टेट के सुसाइड हमले में एक शिया समुदाय के स्कूल के 34 लोगों की मौत हो गई. इसके अलावा जाबुल, कंधार, हेलमंद और उरुजगन पर भी कुछ दिनों पहले हमले किए गए.

बम का प्रयोग, क्योंकि बैलट से नहीं जीत सकते
अमेरिका के रक्षा सचिव जिम मैटिस ने अफगानिस्तान में अक्टूबर में होने वाले चुनावों को देखते हुए ताजा घटनाक्रम पर कहा कि “वो (तालिबान) बम का प्रयोग करते हैं , क्योंकि वो बैलट का प्रयोग नहीं कर सकते. शान्ति बहाली या सीज फायर जैसे प्रयासों को विफल करने के लिए ये हमले किए जा रहे हैं. इसके लिए दुश्मन कई निर्दोष लोगों की हत्या कर रहा है.”