नई दिल्ली: आईटी सेवा कंपनियों के मंच नैस्कॉम ने अमेरिकी सरकार के हालिया प्रस्ताव को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि अमेरिका के इस कदम से अनिश्चितताएं खड़ी होंगी और अमेरिका में नौकरियों पर संकट आ सकता है. प्रस्ताव के तहत, एच-1बी वीजा मांगने वाली कंपनियों को इसके लिए पहले से इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अर्जी लगानी होगी. हालांकि नैस्कॉम ने अपने बयान में कहा कि वह पहले 139 पन्नों के इन नए प्रस्तावों की सावधानीपूर्वक समीक्षा करेगा और इसके कार्यान्वयन से अमेरिकी कंपनियों तथा अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभावाओं का मूल्यांकन करके ही अपनी टिप्पणी देगा.

अनिश्चितताओं पर चिंता !
ट्रंप सरकार ने शुक्रवार को एच-1बी वीजा आवेदन प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करने का प्रस्ताव किया था. नए नियम के तहत एच-1 बी वीचा चाहने वाली कंपनियों को पहले से अपनी अर्जी इलेक्ट्रॉनिक रूप में पंजीकृत करने की जरुरत होगी. जिसका उद्देश्य इस लोकप्रिय वीजा को अत्याधिक कुशल और ऊंची पगार वाले विदेशी श्रमिकों को देना है. नैस्कॉम ने कहा, अभी और अप्रैल 2019 में खुलने वाले एच-1 बी वीजा की अगली लॉट्री के बीच ज्यादा समय नहीं है. कंपनियों ने पहले ही अपनी जरुरतों का आकलन शुरू कर दिया है और अगले साल के लिए आवेदन जमा करने की तैयारी कर रही हैं. इसलिए हम उन अनिश्चितताओं के बारे में चिंतित हैं, जो कि सरकार के एच-1बी प्रक्रिया में एक और बड़ा परिवर्तन लागू करने के कारण उत्पन्न हो सकती है.

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खतरे में अमेरिकी नौकरियां
उसने कहा कि वह टिप्पणी जमा करने से पहले प्रस्ताव की समीक्षा करेगा और प्रकिया की निष्पक्षता को सुनिश्चित करने के लिए अन्य जरुरी कदम उठाएगा. नैस्कॉम ने जोर दिया, अमेरिकी सरकार की नीति विदेशी आईटी कंपनियों के लिए अमेरिका में अपनी विशेष सेवा देने को कठिन और महंगा बनाती है. यह उन अमेरिकी कंपनियों को भी कमजोर करेंगी जो अपनी कुशलता की कमी को पूरा करने के लिए दूसरी कंपनियों पर निर्भर रहती है. यह कार्रवाई अमेरिकी नौकरियों को खतरे में डाल सकती है और आईटी के कामकाज को अमेरिका में करने के बजाए विदेश भेजने का दबाव डाल सकती है. (इनपुट एजेंसी)

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