स्टाकहोम: तीन वैज्ञानिकों को लीथियम आयन बैटरी के विकास पर काम के लिए बुधवार को रसायनशास्त्र का नोबेल पुरस्कार देने का ऐलान किया गया. इन हल्की, पुन: रिचार्ज हो सकने वाली और शक्तिशाली बैटरियों का इस्तेमाल अब मोबाइल फोन से लेकर लैपटॉप और इलेक्ट्रॉनिक वाहनों आदि सभी में होता है.

 

यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास से जुड़े अमेरिकी वैज्ञानिक जॉन गुडइनफ, बिंघमटन में स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूयॉर्क के एम स्टेनली व्हिटिंघम तथा जापान के असाही कासेई कॉर्पोरेशन एंड मीजो यूनिवर्सिटी के अकीरा योशिनो को नोबेल पुरस्कार से नवाजा जाएगा. एकेडमी के महासचिव गोरान हैनसॉन ने कहा कि यह पुरस्कार एक ‘रिचार्ज होने वाली दुनिया’ को लेकर है. समिति ने एक बयान में कहा कि लीथियम आयन बैटरियों ने हमारी जिंदगियों को बदल दिया है और इन वैज्ञानिकों ने एक बेतार, जीवाश्म ईंधन मुक्त समाज की बुनियाद रखी.

नोबेल समिति ने कहा कि लीथियम आयन बैटरी के विकास की शुरूआत 1970 के दशक में तेल संकट के दौरान हुई थी जब व्हिटिंघम ऐसी ऊर्जा तकनीकों पर काम कर रहे थे जो पेट्रोल-डीजल जैसे जीवाश्म ईंधन से मुक्त हों. इस पुरस्कार के तहत स्टाकहोम और नॉर्वे के ओस्लो में 10 दिसंबर को एक समारोह में 90 लाख क्रोनोर (9,18,000 डॉलर) की नगद राशि, एक स्वर्ण पदक और डिप्लोमा प्रदान किया जाता है.

10 दिसंबर को इस पुरस्कार के संस्थापक स्वीडिश उद्योगपति अल्फ्रेड नोबेल की पुण्यतिथि है. डायनामाइट के आविष्कारक नोबेल ने फैसला किया था कि भौतिकी, रसायनशास्त्र, चिकित्सा औार साहित्य के नोबेल पुरस्कार स्टाकहोम में तथा शांति का नोबेल पुरस्कार ओस्लो में प्रदान किये जाएंगे. (इनपुट एजेंसी)