शपथ लेने के हफ्ते भर के भीतर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा निर्णय लेते हुए 7 मुस्लिम बहुल देशों के नागरिकों की अमेरिका में एंट्री पर रोक लगा दी है। यह रोक फिलहाल 90 दिनों के लिए लगाई गई है जिसे बढ़ाया भी जा सकता है। जिन देशों के नागरिकों के आने पर रोक लगाई गई है उनके नाम- ईरान, इराक, सीरिया, लीबिया, यमन, सूडान और सोमालिया हैं। इसी के साथ ट्रंप ने अमेरिका के शरणार्थी कार्यक्रम पर भी चार महीने के लिए रोक लगा दी है। ट्रंप का कहना कहना है कि 9/11 के हमले के बाद उठाए गए कदम कट्टरपंथियों के अमेरिका में आने से नहीं रोक पाए। जिन विदेशी लोगों ने व‌र्ल्ड ट्रेड सेंटर पर और उसके बाद के हमलों को अंजाम दिया, वे कट्टरपंथी अमेरिका में पर्यटन, पढ़ाई, नौकरी इत्यादि का वीजा लेकर आए थे। कुछ ऐसे भी थे जो अमेरिका के शरणार्थी सहायता कार्यक्रम का फायदा लेकर आए थे।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि 9/11 हमले में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर और पेंटागन को लक्ष्य बनाने वाले 19 अपहरणकर्ताओं में से 15 सऊदी अरब के नागरिक थे बाकी संयुक्त अरब अमीरात, मिस्र और लेबनान से थे। ये देश ट्रंप की वीजा प्रतिबंध सूची में नहीं है।

शासकीय आदेश में कहा गया कि वीजा जारी करते समय अमेरिका को सतर्क रहना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जिन्हें मंजूरी दी जा रही है, उनका इरादा अमेरिकियों को नुकसान पहुंचाने का न हो और उनका संबंध आतंकवाद से न हो। शासकीय आदेश अमेरिकी शरणार्थी प्रवेश कार्यक्रम को 120 दिन के लिए तब तक निलंबित करता है जब तक इसे ‘सिर्फ उन देशों के नागरिकों के लिए’ पुनर्भाषित न कर दिया जाए जिनकी ट्रंप के कैबिनेट के सदस्यों के अनुसार, पूरी तरह जांच की जा सकती है।

यह आदेश इराक, सीरिया, ईरान, सूडान, लीबिया, सोमालिया और यमन के सभी लोगों को 30 दिन तक अमेरिका में दाखिल होने से रोकता है। साथ ही अफगानिस्तान, पाकिस्तान और सऊदी अरब जैसे अन्य देशों के मामले में शासकीय आदेश सघन जांच अपनाएगा।

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ट्रंप को कोर्ट ने दिया झटका

एक संघीय जज ने राष्ट्रपति ट्रंप के अस्थायी आव्रजन प्रतिबंध के कुछ हिस्से को अवरूद्ध करते हुए अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे अमेरिकी एयरपोर्ट्स पर फंसे शरणार्थियों और अन्य यात्रियों को निर्वासित करना बंद करें। अमेरिकी सिविल लिबटीर्ज यूनियन के वकीलों ने ट्रंप के शासकीय आदेश को रोकने के लिए सरकार पर मुकदमा किया था।

अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज एन डोनले की ओर से फैसला सुनाए जाने के बाद इन वकीलों ने ट्वीट किया, “जीत हुई, हमारी अदालतों ने आज ठीक वैसे ही काम किया, जैसा उन्हें सरकारी प्रताड़ना या असंवैधानिक नीतियों और आदेशों के खिलाफ एक अवरोधक के रूप में करना चाहिए।”

पिचाई और जुकरबर्ग ने की फैसले की आलोचना

गूगल के भारतीय मूल के सीईओ सुंदर पिचाई और फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने भी इसकी आलोचना की है। पिचाई ने इसे दुखद निर्णय बताते हुए कहा कि इससे गूगल के कम से कम 187 कर्मचारियों पर असर पड़ेगा। माइक्रोसॉफ्ट के भारतीय—अमेरिकी सीईओ सत्य नडेला ने लिंक्डइन पर एक नोट पोस्ट करते हुए कहा, कंपनी इस महत्वपूर्ण विषय पर समर्थन करती रहेगी।

उन्होंने कहा कि एक प्रवासी और कपंनी का सीईओ होने के नाते उनके पास दोनों अनुभव हैं और उन्होंने देश, दुनिया और उनकी कंपनी पर आव्रजन का सकारात्मक प्रभाव देखा है।

कंपनी ने एक बयान में कहा, हम सूची में शामिल देशों के हमारे कर्मियों पर शासकीय आदेश के असर के बारे में चिंताओं को साझा करते हैं, ये सभी कानूनी तरीके से अमेरिका में रहते रहे हैं और हम उन्हें कानूनी सलाह और सहायता देने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। कंपनी ने कहा कि उसे प्रतिबंधित सात देशों के 76 कर्मचारियों की जानकारी है।