प्योंगयांग: संयुक्त राज्य अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र के समक्ष उत्तर कोरिया के खिलाफ अन्तरराष्ट्रीय प्रतिबन्ध लगाने का प्रस्ताव रखा है, ‘जिससे उत्तर कोरिया को पूरे तरीके से परमाणु मुक्त किया जा सके.’

उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने इन नए प्रतिबन्धों के प्रस्ताव का पुरजोर विरोध किया है. उत्तर कोरिया की सरकारी न्यूज एजेंसी केसीएनए ने बताया कि किम ने आज कहा कि  ‘शत्रुतापूर्ण ताकतें’ नाकाबंदी कर कोरियाई जनता को बर्बाद करना चाहती हैं. अमेरिका आर्थिक प्रतिबंधों के जरिए परमाणु कार्यक्रम को लेकर प्योंगयांग पर दबाव बरकरार रखे हुए है.

अमेरिका गैंगेस्टर की तरह कर रहा है मांग
किम और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस साल जून में सिंगापुर में ऐतिहासिक बैठक की थी. लेकिन तब से संबंधों के आगे बढ़ने की दिशा में ज्यादा प्रगति नहीं हुई है और उत्तर कोरिया ने अमेरिका पर पूर्ण परमाणु नि:शस्त्रीकरण के लिए ‘गैंगेस्टर की तरह मांग’  करने का आरोप लगाया है.  वोनसान-कलमा तटीय पर्यटन क्षेत्र में एक निर्माण स्थल पर किम ने कहा कि ‘शत्रुतापूर्ण ताकतें’ कोरियाई जनता को प्रतिबंधों और नाकाबंदी के जरिए बर्बाद करना चाहती है.

किम ने कहा कि समुद्र के किनारे तटीय पर्यटन क्षेत्र वोनसान में हमारा अति महत्त्वाकांक्षी प्रोजेक्ट बन रहा है, जो लूटने वाले प्रतिबन्धों के खिलाफ हमारा संघर्ष है. हम अपने देश के लोगों को खुशहाल जिन्दगी देने के लिए एक लड़ाई लड़ रहे हैं.

पहले भी लगे हैं DPRK पर प्रतिबन्ध
गौरतलब है कि 3 अगस्त को अमेरिका की ओर से संयुक्त राष्ट्र में यह प्रस्ताव रखा गया था. डेमोक्रेटिक पीपल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया या उत्तर कोरिया पर पहले भी सिक्योरिटी काउंसिल के रेसोल्युशन के उल्लंघन पर अपने परमाणु कार्यक्रमों के लिए प्रतिबन्ध लगते रहे हैं. इसके बदले सिक्योरिटी काउंसिल ने प्योंगयांग को होने वाले कोयले, लौह अयस्क, लेड और सीफ़ूड के निर्यात पर प्रतिबन्ध लगा दिया था. दिसम्बर में भी मिसाइल परीक्षण को लेकर आर्थिक प्रतिबन्ध लगाए गए थे.

रूस ने भी की निन्दा
रूस के डिप्टी प्रधानमंत्री ने भी अमेरिका के इस कदम की आलोचना करते हुए कहा है कि बिना किसी पुख्ता जानकारी के अमेरिका ने प्रतिबन्धों का प्रस्ताव पेश किया है जो उचित नहीं है.